1. Home
  2. हिन्दी
  3. राष्ट्रीय
  4. राजस्थान हाई कोर्ट ने आसाराम को 20 दिनों की पैरोल दी, राज्य सरकार नहीं बता सकी पैरोल खारिज करने का ठोस वजह
राजस्थान हाई कोर्ट ने आसाराम को 20 दिनों की पैरोल दी, राज्य सरकार नहीं बता सकी पैरोल खारिज करने का ठोस वजह

राजस्थान हाई कोर्ट ने आसाराम को 20 दिनों की पैरोल दी, राज्य सरकार नहीं बता सकी पैरोल खारिज करने का ठोस वजह

0
Social Share

जयपुर, 4 अगस्त। राजस्थान हाई कोर्ट ने खुद को भगवान बताने वाले आसाराम को 20 दिनों की रेगुलर पैरोल दी है। हाई कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार उनकी पैरोल अर्जी को खारिज करने के अपने फैसले को सही साबित नहीं कर पाई, जबकि इससे पहले अंतरिम रिहाई के दौरान उसका व्यवहार अच्छा रहा था और वह 13 वर्षों से ज्यादा समय जेल में बिता चुका है।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायमूर्ति संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने सोमवार को यह आदेश दिया। पीठ ने आसाराम को उसकी पहली नियमित पैरोल दी और ₹50,000 का निजी मुचलका और 25-25 हजार की दो ज़मानत राशि जमा करने के बाद उसे 20 दिनों के लिए रिहा करने का आदेश दिया।

अदालत ने अच्छे व्यवहार का हवाला दिया

अदालत ने कहा कि जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद दोषी बलात्कारी ने जेल में 13 साल, एक महीना और 24 दिन बिताए हैं। अदालत ने गौर किया कि उसे पहले भी कई बार अंतरिम जमानत दी गई थी और उन अवधियों के दौरान जमानत की शर्तों का उल्लंघन करने, भागने की कोशिश करने, गवाहों को प्रभावित करने या कानून-व्यवस्था की कोई समस्या पैदा करने का कोई रिकॉर्ड नहीं था।

राज्य सरकार ने पैरोल का विरोध किया

राज्य सरकार ने आसाराम की पैरोल का विरोध करते हुए हाई कोर्ट से कहा कि रिहा होने पर वह भाग सकता है। सरकार ने पैरोल न देने की वजह के तौर पर राजस्थान के बाहर चल रहे आपराधिक मामलों और गुजरात में उसे दोषी ठहराए जाने का भी जिक्र किया। सरकार ने आगे कहा कि उसका मेडिकल इलाज चल रहा है, उसे पैरोल के लिए मेडिकल तौर पर फिट घोषित नहीं किया गया है और उसकी रिहाई से पीड़ित परिवार की सुरक्षा को खतरा हो सकता है।

हाई कोर्ट ने खारिज कीं राज्य सरकार की आपत्तियां

हाई कोर्ट ने कहा कि आसाराम के भागने या खतरा पैदा करने को लेकर राज्य की चिंताएं सिर्फ़ अटकलों पर आधारित हैं और उनके समर्थन में कोई सबूत नहीं है। कोर्ट ने यह भी कहा कि आसाराम की पैरोल अर्जी पर ‘राजस्थान प्रिजनर्स रिलीज ऑन पैरोल रूल्स’ के तहत फैसला किया जाना चाहिए।

नाबालिग से रेप के मामले में उम्रकैद की सदा कटा रहा आसाराम

कोर्ट ने आदेश दिया कि दूसरे राज्यों में चल रहे मामलों या दोषी ठहराए जाने को इस मामले में पैरोल न देने की वजह नहीं बनाया जा सकता। इससे पहले, गत 27 मई को हाई कोर्ट ने 2013 के नाबालिग से रेप के मामले में आसाराम की सजा और उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा था।

Join our WhatsApp Channel

And stay informed with the latest news and updates.

Join Now
revoi whats app qr code