राष्ट्रमंडल खेल 2026 के पदक विजेताओं का सम्मान : खेल मंत्री मांडविया ने सौंपी ईनामी राशि
नई दिल्ली, 4 अगस्त। केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने मंगलवार को राष्ट्रमंडल खेल 2026 के दौरान मुक्केबाजी, जूडो और पैरा-एथलेटिक्स में ऐतिहासिक प्रदर्शन करने वाले भारतीय खिलाड़ियों को सम्मानित किया। इस दौरान स्वर्ण पदक विजेताओं को 30 लाख रुपये, रजत पदक विजेताओं को 20 लाख और कांस्य पदक विजेताओं को 10 लाख रुपये की पुरस्कार राशि के चेक सौंपे गए।
An inspiring interaction with our CWG 2026 Judo and para-athlete champions, whose strength and resilience made Bharat proud in Glasgow! 🇮🇳 pic.twitter.com/2pbTkIB8TE
— Dr Mansukh Mandaviya (@mansukhmandviya) August 4, 2026
चैम्पियन खिलाड़ियों से अगली पीढ़ी को तैयार करने का आग्रह
डॉ. मांडविया ने खिलाड़ियों को बधाई देने के साथ उनसे प्रतिस्पर्धी करिअर के बाद भी भारतीय खेलों में योगदान जारी रखने और अगली पीढ़ी के खिलाड़ियों के मार्गदर्शक एवं प्रेरणास्रोत बनने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों का अनुभव देश में नई प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
मुक्केबाजी टीम ने जीते 7 स्वर्ण सहित 10 पदक
सम्मान समारोह में भारतीय मुक्केबाजी दल के सदस्य शामिल हुए, जिन्होंने ग्लास्गो में कुल 10 पदक जीतकर मुक्केबाजी पदक तालिका में शीर्ष स्थान हासिल किया। भारतीय मुक्केबाजों ने सात स्वर्ण और तीन रजत पदक अपने नाम किए।

भारत के सात स्वर्ण पदक विजेताओं में प्रीति पवार (54 किग्रा), जैस्मीन लैंबोरिया (57 किग्रा), साक्षी चौधरी (51 किग्रा), प्रिया घंघास (60 किग्रा), अरुंधति चौधरी (70 किग्रा), सचिन सिवाच (60 किग्रा) और अंकुश पांघाल (80 किग्रा) शामिल रहे। उनके अलावा जादुमनी सिंह (55 किग्रा), ओलम्पिक मेडलिस्ट लवलीना बोरगोहेन (75 किग्रा) और नरेंद्र बेरवाल (90+ किग्रा) ने रजत पदक जीते।
जूडो में भारत का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन
केंद्रीय खेल मंत्री ने भारतीय जूडो दल को भी सम्मानित किया। भारतीय जूडोकाओं ने ग्लास्गो की 12 जूडो स्पर्धाओं में हिस्सा लेते हुए चार पदक जीते, जिनमें दो स्वर्ण, एक रजत और एक कांस्य शामिल रहे। राष्ट्रमंडल खेलों की जूडो स्पर्धाओं में भारत का यह अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा।

अस्मिता और हर्ष ने रचा इतिहास
अस्मिता डे राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला जूडोका बनीं। वहीं हर्ष ने स्वर्ण पदक जीतकर यह उपलब्धि हासिल करने वाले पहले भारतीय पुरुष जूडोका बनने का गौरव हासिल किया।
पैरा-एथलेटिक्स में भी भारतीय खिलाड़ियों ने छोड़ी छाप
पैरा-एथलेटिक्स दल को भी समारोह में सम्मानित किया गया। ग्लास्गो में भारतीय पैरा-एथलीटों के शानदार प्रदर्शन को देश के पैरा-स्पोर्ट्स के लिए महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा गया। खिलाड़ियों के प्रदर्शन ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की पैरा-स्पोर्ट्स क्षमता को मजबूती से सामने रखा।
36,000 करोड़ रुपये की ‘खेलो इंडिया’ योजना का जिक्र
खिलाड़ियों से बातचीत के दौरान डॉ. मांडविया ने उन्हें अपने खेल करिअर से आगे की सोचने और भारतीय खेलों की अगली पीढ़ी के विकास में योगदान देने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने 36,000 करोड़ रुपये के निवेश वाली विस्तारित ‘खेलो इंडिया’ योजना का उल्लेख करते हुए खिलाड़ियों से सक्रिय करिअर के बाद स्पोर्ट्स एकेडमी शुरू करने और युवा प्रतिभाओं को निखारने पर विचार करने का आग्रह किया।
Bharat signs off from the Commonwealth Games 2026 with a commendable 4th-place finish. 🇮🇳
Despite Glasgow 2026 being a trimmed-down edition without several disciplines where India traditionally excels, Team India improved from 30 medals in the comparable disciplines at… pic.twitter.com/2bZEW65bUJ
— Dr Mansukh Mandaviya (@mansukhmandviya) August 3, 2026
‘सिर्फ सरकारी नौकरी के लिए पदक न जीतें’
डॉ. मांडविया ने कहा कि खिलाड़ियों का लक्ष्य केवल सरकारी नौकरी हासिल करना नहीं होना चाहिए। उन्होंने खिलाड़ियों से अपने सक्रिय करिअर के बाद स्पोर्ट्स एकेडमी चलाने और अपने अनुभव के जरिए युवा खिलाड़ियों को तैयार करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विस्तारित ‘खेलो इंडिया’ योजना के जरिए आने वाले वर्षों में भारतीय खेलों में लगातार निवेश सुनिश्चित किया जाएगा।
एशियाई खेलों में प्रदर्शन बेहतर करने का लक्ष्य
एशियाई खेल 2026 को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय खेल मंत्री ने खिलाड़ियों से राष्ट्रमंडल खेल में हासिल किए गए प्रदर्शन को आगे बढ़ाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि रजत और कांस्य पदक जीतने वाले खिलाड़ी अगली बार स्वर्ण हासिल करने का प्रयास करें, जबकि स्वर्ण पदक जीतने वाले खिलाड़ी अपने प्रदर्शन के स्तर को बनाए रखते हुए उसे और बेहतर करें।
कोच के योगदान को कभी न भूलने की अपील
डॉ. मांडविया ने खिलाड़ियों से उनके कोच के योगदान को कभी नहीं भूलने की अपील की। उन्होंने कहा कि सफलता के पीछे कोच का मार्गदर्शन और निरंतर मेहनत महत्वपूर्ण होती है। उनके अनुसार, गुरु का मार्गदर्शन खिलाड़ियों को खेल के साथ-साथ जीवन में भी आगे बढ़ने में मदद करता है।
सरकारी योजनाओं से खिलाड़ियों को मिला सहयोग
पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को ‘खेलो इंडिया’, टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS) और ‘एनुअल कैलेंडर फॉर ट्रेनिंग एंड कॉम्पिटिशन’ (ACTC) कार्यक्रम के जरिए सरकार से सहायता मिली। इसके अलावा साई एनसीओई में नेशनल कैंप, अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने के अवसर, उपकरण और प्रशिक्षण सहायता भी उपलब्ध कराई गई।
