वाराणसी, 4 अगस्त। केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने मंगलवार को यहां पुरातात्विक खंडहर परिसर का निरीक्षण करने के बाद कहा कि संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक व सांस्कृतिक संगठन (UNESCO) की विश्व धरोहर सूची में शामिल होने के बाद सारनाथ में देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों और बौद्ध अनुयायियों के लिए सुविधाएं बढ़ाई जाएंगी।
यूनेस्को ने सारनाथ को घोषित किया है विश्व धरोहर स्थल
गौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक व सांस्कृतिक संगठन यूनेस्को ने गत 25 जुलाई को गौतम बुद्ध की उपदेश स्थली सारनाथ को विश्व धरोहर स्थल घोषित कर दिया। दक्षिण कोरिया के बुसान में हुई यूनेस्को विश्व धरोहर समिति की 48वीं बैठक में सारनाथ को यह दर्जा मिला।
भारत का 45वीं यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है सारनाथ
इसके साथ ही भारत में अब विश्व धरोहर स्थलों की संख्या अब 45 हो गई है। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि सारनाथ को 1998 में ही यूनेस्को की संभावित सूची यानी टेंटेटिव लिस्ट में रखा गया था। अब जाकर इसे अंतिम मान्यता मिली है।

वाराणसी वासियों के लिए बहुत गर्व और सौभाग्य की बात
गजेंद्र सिंह शेखावत ने इस उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए कहा, ‘यह पल हम सबके लिए, देश के लिए, खासकर वाराणसी वासियों के लिए बहुत गर्व और सौभाग्य की बात है। प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन और नेतृत्व में सारनाथ की इस पुरातात्विक और धार्मिक धरोहर को यूनेस्को की सूची में जगह मिली है।’
क्यूआर कोड में प्रमुख विदेशी भाषाओं को भी शामिल करने पर जोर
केंद्रीय मंत्री ने विश्व धरोहर पट्टिका और पुरातात्विक स्मारकों के आसपास लगाए जाने वाले क्यूआर कोड में भारतीय भाषाओं के साथ प्रमुख विदेशी भाषाओं को भी शामिल करने पर जोर दिया। क्यूआर कोड में 22 भारतीय भाषाओं के साथ जापानी, कोरियाई, चीनी, थाई, कंबोडियाई, श्रीलंका, म्यामार समेत अन्य बौद्ध देशों की भाषाओं में भी जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।
पुरातत्व विभाग के मानकों के अनुरूप अस्थायी ध्यान केंद्र बनाने का सुझाव
इससे दुनियाभर से आने वाले बौद्ध अनुयायी और पर्यटक अपने मोबाइल से क्यूआर कोड स्कैन कर सारनाथ के इतिहास, पुरातात्विक महत्व और भगवान बुद्ध से जुड़े इतिहास की जानकारी आसानी से हासिल कर सकेंगे। उन्होंने बौद्ध अनुयायियों के पूजा-पाठ और ध्यान के लिए पुरातत्व विभाग के मानकों के अनुरूप अस्थायी ध्यान केंद्र बनाने का सुझाव दिया।
शेखावत ने कहा कि विश्व धरोहर का दर्जा मिलने के बाद यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या में बड़ी बढ़ोतरी होगी। इससे न सिर्फ वाराणसी की अर्थव्यवस्था को फायदा होगा बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान भी और मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि गर्मी, सर्दी और बरसात के मौसम में बड़ी संख्या में बौद्ध अनुयायी सारनाथ पहुंचते हैं। उनके लिए पूजा-पाठ और ध्यान की उचित व्यवस्था होनी चाहिए। काशी भगवान महादेव की नगरी है, जबकि सारनाथ बौद्ध धर्म की प्रमुख स्थली है।
सारनाथ वह पवित्र जगह है, जहां गौतम बुद्ध ने ज्ञान प्राप्त करने के बाद अपना पहला उपदेश दिया था। इसे ‘धर्मचक्र प्रवर्तन’ भी कहा जाता है। बौद्ध धर्म की शुरुआत यहीं से मानी जाती है। इस धरोहर स्थल में चौखंडी स्तूप (यहीं बुद्ध अपने पहले शिष्यों से मिले थे) और सारनाथ के पुरातात्विक अवशेष, जिनमें प्रसिद्ध धमेख स्तूप, धर्मराजिका स्तूप, मूलगंधकुटी विहार और ऐतिहासिक अशोक स्तंभ शामिल हैं।
केंद्रीय मंत्री के साथ यूनेस्को में भारत के स्थायी सदस्य व राजदूत विशाल वी. शर्मा भी रहे। मंत्री के पुरातात्विक खंडहर परिसर पहुंचने पर सहायक संरक्षण अधिकारी राजू ने उनका स्वागत किया। इस दौरान उपनिदेशक पर्यटन दिनेश कुमार, केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा संस्थान के कुलपति प्रो. वांगचुक दोरजे नेगी, कुलसचिव डा. सुनीता चंद्रा, डॉ. सुशील सिंह, पर्यटन अधिकारी नितिन द्विवेदी और सुनील कुमार आदि साथ रहे।
