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कच्चे तेल में गिरावट से शेयर बाजार में जोरदार तेजी, सेंसेक्स 400 अंक उछला, आईटी-रियल्टी शेयर चमके

कच्चे तेल में गिरावट से शेयर बाजार में जोरदार तेजी, सेंसेक्स 400 अंक उछला, आईटी-रियल्टी शेयर चमके

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मुंबई। कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट का सकारात्मक असर गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार पर देखने को मिला। बाजार की शुरुआत मजबूत बढ़त के साथ हुई और शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स करीब 400 अंक चढ़ गया, जबकि निफ्टी 24,100 के स्तर के ऊपर कारोबार करता नजर आया। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 399.85 अंक (0.52 फीसदी) की बढ़त के साथ 77,391.07 पर और निफ्टी 104.20 अंक (0.43 फीसदी) मजबूत होकर 24,125.85 पर पहुंच गया।

बाजार में तेजी की अगुवाई आईटी और रियल्टी सेक्टर ने की। निफ्टी आईटी और निफ्टी रियल्टी सूचकांकों में सबसे ज्यादा बढ़त दर्ज की गई। इसके अलावा ऑटो, पीएसयू बैंक, ऑयल एंड गैस, फाइनेंशियल सर्विसेज, प्राइवेट बैंक और सर्विसेज सेक्टर के शेयर भी हरे निशान में कारोबार करते दिखे। वहीं, निफ्टी मेटल इंडेक्स में हल्की कमजोरी रही।

लार्जकैप शेयरों के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी निवेशकों की खरीदारी देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप 100 करीब 290 अंक की तेजी के साथ 62,426 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 मामूली बढ़त के साथ 18,879 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया।

सेंसेक्स के प्रमुख बढ़त वाले शेयरों में इंडिगो, एमएंडएम, मारुति सुजुकी, ट्रेंट, आईसीआईसीआई बैंक, अल्ट्राटेक सीमेंट, एसबीआई, टीसीएस, एचडीएफसी बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, बजाज फिनसर्व, टेक महिंद्रा, एचयूएल, एक्सिस बैंक और एनटीपीसी शामिल रहे। दूसरी ओर, इटरनल, टाइटन, इन्फोसिस, पावर ग्रिड, एशियन पेंट्स, आईटीसी, बीईएल, टाटा स्टील और सन फार्मा के शेयर दबाव में रहे।

एशियाई बाजारों में भी सकारात्मक रुख देखने को मिला। टोक्यो, शंघाई, बैंकॉक, सोल और जकार्ता के बाजार बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे, जबकि हांगकांग बाजार कमजोरी के साथ बंद हुआ। वहीं, अमेरिकी बाजारों में बुधवार को मिला-जुला रुख रहा। डाओ जोन्स 0.35 फीसदी की बढ़त के साथ बंद हुआ, जबकि नैस्डैक में 0.43 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमत घटकर करीब 73 डॉलर प्रति बैरल पर आने से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। तेल कीमतों में नरमी भारत के चालू खाते के घाटे को कम करने में मददगार साबित हो सकती है। साथ ही इससे आर्थिक विकास को समर्थन मिलने और वित्त वर्ष 2026-27 में महंगाई पर नियंत्रण बनाए रखने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।

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