अमेरिकी सीनेट में ईरान जंग के खिलाफ प्रस्ताव पास : ट्रम्प से सैन्य काररवाई रोकने को कहा

वॉशिंगटन, 24 जून। ईरान के साथ शांति समझौते पर जारी बातचीत के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। दरअसल, सीनेट ने मंगलवार को ‘वॉर पावर्स रेजोल्यूशन’ पास कर दिया, जो अमेरिकी राष्ट्रपति यूएस प्रेसिडेंट की शक्तियों से जुड़ा है। इसका मकसद यूएस आर्मी के ईरान के खिलाफ मिलिट्री एक्शन को रोकना है।

प्रस्ताव में संसद की सैन्य काररवाई के आदेश देने तक ईरान संघर्ष में तैनात सेना को हटाने की बात कही गई है। 50-48 मतों से यह प्रस्ताव पास हुआ। यह 10वां मौका था, जब सीनेट ने ईरान के साथ जंग को रोकने का प्रयास किया था। इसी महीने की शुरुआत में प्रस्ताव को अमेरिकी हाउस ऑफ रेप्रेसेंटेटिव से भी मंजूरी मिल चुकी है।

1973 के वॉर पॉवर्स एक्ट के बाद यह पहला मौका है, जब अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों ने किसी राष्ट्रपति से युद्ध जैसी काररवाई खत्म करने की मांग की है। वोटिंग के दौरान चार रिपब्लिकन सांसदों ने भी डेमोक्रेट्स का साथ दिया, जिससे ट्रम्प की पार्टी के भीतर बढ़ती बागवत भी सामने आई। हालांकि ह्वाइट हाउस ने कहा है कि इस प्रस्ताव का कोई कानूनी असर नहीं होगा और अमेरिकी सैन्य काररवाई पहले ही समाप्त हो चुकी है।

ट्रम्प का गुस्सा फूटा, रिपब्लिकन पार्टी के सदस्यों को भी लताड़ा

फिलहाल अमेरिकी सीनेट में पास हुए प्रस्ताव पर ट्रम्प का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने रिपब्लिकन पार्टी के चार सांसदों को भी आड़े हाथ लिया, जिन्होंने इस प्रस्ताव का समर्थन किया है। उन्होंने सीनेट पर दुश्मनों को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया। उन्होंने अपने सोशल ट्रुथ पर पोस्ट कर इस पर प्रतिक्रिया दी। ट्रम्प ने सीनेटे के फैसले को ‘गलत समय’ पर लिया गया ‘खराब फैसला’ बताया। उन्होंने कहा कि यह एक तरह से ईरान को मदद करने जैसा है।

ट्रम्प ने सोशल ट्रुथ पर दी प्रतिक्रिया

ट्रम्प ने अपने सोशल ट्रुथ पर पोस्ट कर लिखा, “मैंने ईरान को ‘कमजोर’ स्थिति में डाल दिया, वो गिरने को तैयार है, हमें लगभग कुछ भी देने को तैयार है और दशकों में पहली बार अमेरिका और उसके राष्ट्रपति का बहुत सम्मान कर रहा है, तभी अमेरिकी सीनेट ने एक गलत समय पर और अर्थहीन युद्ध शक्ति अधिनियम पर मतदान करने का फैसला किया, जिससे दुनिया के सबसे बड़े आतंकवाद प्रायोजक को यह संदेश दिया गया कि अमेरिका को मेरा उनके प्रति किया गया व्यवहार पसंद नहीं है और मुझे इसे रोकना होगा।”

उन्होंने आगे लिखा, ‘ऐसा करके उसने दुश्मन को सहायता और समर्थन प्रदान किया है। चार हारे हुए रिपब्लिकन सांसदों ने डेमोक्रेट्स के साथ मतदान किया और ईरान ने मेरे लोगों से पूछा, ‘इसका क्या मतलब है?’ इन सीनेटरों ने मेरा काम और मुश्किल कर दिया है, लेकिन मैं इसे हर हाल में पूरा करूंगा, क्योंकि मैं हमेशा अपना काम पूरा करता हूं!’

खाड़ी देशों की चिंता दूर करने के लिए मार्को रुबियो पहुंचे कुवैत

इस बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो UAE, बहरीन और कुवैत के दौरे पर पहुंचे हैं। उनका मकसद अमेरिका-ईरान समझौते को लेकर खाड़ी देशों की चिंताओं को दूर करना है। इन देशों को आशंका है कि समझौते से होर्मुज स्ट्रेट में ईरान का प्रभाव बढ़ सकता है। साथ ही समझौते में ईरान के मिसाइल कार्यक्रम पर कोई स्पष्ट शर्त नहीं होने से भी सवाल उठ रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रही वार्ता में ईरान के पुनर्निर्माण के लिए 300 अरब डॉलर के संभावित फंड पर भी चर्चा हो रही है। माना जा रहा है कि इसमें खाड़ी देशों से आर्थिक सहयोग मांगा जा सकता है। ऐसे में वॉशिंगटन अपने सहयोगी देशों का समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहा है।

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