लखनऊ, 7 जुलाई। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने गुजरात के गिर सोमनाथ जिले के चर्चित ऊना दलित अत्याचार मामले में अधिकांश आरोपियों के बरी होने पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए राज्य सरकार को हाईकोर्ट में मजबूती से पैरवी करनी चाहिए और सभी दोषियों को कड़ी सजा दिलाने का हरसंभव प्रयास करना चाहिए।
आरोपियों के बरी होने पर जताई चिंता
मायावती ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि वर्ष 2016 में ऊना में दलितों के साथ हुए जघन्य अत्याचार मामले में स्थानीय अदालत द्वारा मार्च 2026 में अधिकांश आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले के बाद पीड़ित परिवारों को न्याय के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि आर्थिक और कानूनी चुनौतियों के कारण पीड़ित परिवारों की लड़ाई और कठिन हो गई है, जिससे बहुजन समाज में गहरी चिंता व्याप्त है।
पीड़ितों से मिलने खुद पहुंची थीं मायावती
बसपा प्रमुख ने कहा कि घटना के बाद वह स्वयं ऊना जाकर पीड़ित परिवारों से मिली थीं और पूरी स्थिति का जायजा लेने के बाद राज्य सरकार से दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की थी। उन्होंने कहा कि पूरे देश में विरोध और आक्रोश के बावजूद 40 में से 35 आरोपियों का बरी हो जाना बेहद चिंताजनक है।
सरकार की भूमिका पर उठाए सवाल
मायावती ने आरोप लगाया कि इस मामले का परिणाम दलितों के प्रति सरकारी उदासीनता और उनके हितों व सुरक्षा के प्रति लापरवाही को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि अभी भी समय है कि गुजरात सरकार अपनी गलती सुधारते हुए हाईकोर्ट में प्रभावी ढंग से पैरवी करे और दोषियों को सजा दिलाने के लिए ठोस कदम उठाए।
मुफ्त कानूनी सहायता देने की भी मांग
बसपा प्रमुख ने कहा कि राज्य सरकार को पीड़ित परिवारों की संतुष्टि के अनुरूप सरकारी खर्च पर सक्षम वकील उपलब्ध कराने चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि उत्तर प्रदेश में उनकी सरकार के दौरान गरीबों को मुफ्त कानूनी सहायता उपलब्ध कराने का कानूनी प्रावधान किया गया था। उनके अनुसार, ऐसी व्यवस्था से पीड़ित परिवारों को न्याय पाने में मदद मिलेगी और भविष्य में ऐसे अपराधों पर भी अंकुश लगेगा।

