3 अक्टूबर 2026 का पंचांग: सप्तमी के बाद अष्टमी तिथि, जानें शुभ मुहूर्त, राहुकाल और दिशाशूल

3 अक्टूबर। हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व माना जाता है। शुभ कार्य, पूजा-पाठ, यात्रा, निवेश और अन्य महत्वपूर्ण कार्यों की शुरुआत से पहले पंचांग देखा जाता है। पंचांग सूर्य, चंद्रमा और ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति के आधार पर दिन के शुभ-अशुभ समय की जानकारी देता है।

3 अक्टूबर 2026, शनिवार को आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि सुबह 7:59 बजे तक रहेगी। इसके बाद अष्टमी तिथि शुरू होगी। इस दिन सूर्योदय सुबह 6:23 बजे और सूर्यास्त शाम 6:08 बजे होगा। चंद्रोदय रात 11:47 बजे और चंद्रास्त दोपहर 1:00 बजे होगा।

सूर्य हस्त नक्षत्र में रहेंगे

पंचांग के अनुसार, शनिवार को सूर्य हस्त नक्षत्र में स्थित रहेंगे। वैदिक ज्योतिष में हस्त को 27 नक्षत्रों में 13वां माना गया है। इसका अर्थ ‘हाथ’ होता है। हस्त नक्षत्र के स्वामी चंद्रमा हैं और इसकी राशि कन्या है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, सूर्य के हस्त नक्षत्र में रहने का प्रभाव सभी 12 राशियों पर पड़ सकता है।

वरीयान योग का निर्माण

3 अक्टूबर को दोपहर 3:21 बजे तक वरीयान योग रहेगा। इसे 27 नित्य योगों में 18वां योग माना जाता है। ‘वरीयान’ शब्द का अर्थ श्रेष्ठ, उत्तम या ऊंचा होता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस योग के अधिपति कुबेर माने जाते हैं, जबकि गुरु और शुक्र को इसके प्रमुख प्रेरक ग्रह बताया गया है। इस योग में जन्म लेने वाले जातकों के बारे में प्रभावशाली, कर्मठ, बुद्धिमान, कला-प्रेमी और धार्मिक प्रवृत्ति का होने की मान्यता है।

अभिजीत मुहूर्त

शनिवार को अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:52 बजे से दोपहर 12:39 बजे तक रहेगा। पंचांग में इसे दिन के प्रमुख शुभ मुहूर्तों में गिना जाता है। मान्यता है कि इस अवधि में शुभ कार्य करने से सकारात्मक परिणाम मिलते हैं।

अमृतकाल

इस दिन अमृतकाल शाम 4:05 बजे से 4:05 बजे तक बताया गया है। अमृतकाल को ज्योतिष और पंचांग में शुभ समय माना जाता है। इस दौरान पूजा-पाठ, नए कार्य, व्यापार, निवेश या यात्रा जैसे महत्वपूर्ण कार्य करने की मान्यता है।

राहुकाल में शुभ कार्य से बचें

शनिवार को राहुकाल सुबह 9:19 बजे से 10:47 बजे तक रहेगा। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, राहुकाल में नए शुभ कार्य की शुरुआत नहीं करनी चाहिए। हालांकि, पहले से शुरू किए गए कार्यों को जारी रखा जा सकता है। राहुकाल का समय स्थान के अनुसार बदल सकता है।

गुलिक काल

शनिवार को गुलिक काल सुबह 6:23 बजे से 7:51 बजे तक रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं में गुलिक काल को शुभ कार्यों के लिए अनुकूल नहीं माना जाता। हालांकि, कुछ परंपराओं में इस अवधि को बार-बार किए जाने वाले कार्यों तथा दान आदि के लिए उपयोगी माना जाता है।

यमगंड काल

यमगंड काल दोपहर 1:44 बजे से 3:12 बजे तक रहेगा। इसे नए कार्य शुरू करने के लिए अशुभ समय माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस अवधि में नई यात्रा, व्यापार की शुरुआत और महत्वपूर्ण लेनदेन से बचने की सलाह दी जाती है।

सूर्य कन्या और चंद्रमा मिथुन राशि में

इस दिन सूर्य कन्या राशि में रहेंगे। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, कन्या राशि में सूर्य की स्थिति व्यक्ति को कामकाज में व्यावहारिक और योजनाबद्ध दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित कर सकती है। वहीं, चंद्रमा मिथुन राशि में गोचर करेंगे। मिथुन राशि के स्वामी बुध हैं और चंद्रमा को मन का कारक माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस स्थिति में विचारों की अधिकता, मानसिक चंचलता या असमंजस की स्थिति बन सकती है।

पूर्व दिशा में दिशाशूल

शनिवार को पूर्व दिशा और ईशान कोण में दिशाशूल रहेगा। ज्योतिष और वास्तु की मान्यताओं के अनुसार, दिशाशूल वाली दिशा में यात्रा करना शुभ नहीं माना जाता। ऐसे में यात्रा की योजना बनाते समय पंचांग में बताए गए दिशाशूल का ध्यान रखने की परंपरा है।

नोट: पंचांग के मुहूर्त और काल स्थानीय सूर्योदय-सूर्यास्त के आधार पर स्थान के अनुसार बदल सकते हैं। ऊपर दिए गए समय आपके उपलब्ध स्रोत के अनुसार रखे गए हैं।

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