नई दिल्ली, 3 सितम्बर। अभिजीत दिपके की अगुआई वाली कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) में बगावत की पहली घटना सामने आई है। पार्टी के पूर्व वॉलंटियर मनीष ब्रह्मभट्ट ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी-डेमोक्रेटिक’ (CJP-D) नाम से एक अलग गुट बना लिया है।
मनीष ब्रह्मभट्ट का आरोप – दिपके ने विरोध करने वालों को किनारे लगा दिया
ब्रह्मभट्ट ने साथ ही सीजेपी के फाउंडर अभिजीत दिपके पर आरोप लगाया है कि उन्होंने विरोध करने वालों को किनारे कर दिया और युवाओं के नेतृत्व वाले इस आंदोलन को अपनी पसंद के लोगों से बनी ‘टीम केजरीवाल’ में बदल दिया।
🚨 BIG REBELLION IN CJP 🔥
Manish Brahmbhatt launches 'Cockroach Janata Party Democratic' (CJP-D), accusing founder Abhijeet Dipke of HIJACKING the youth movement.
Brahmbhatt alleges the 12-member core committee is "TEAM KEJRIWAL in disguise," claiming 8 AAP-linked members… pic.twitter.com/TjBaU2sRfA
— Megh Updates 🚨™ (@MeghUpdates) September 3, 2026
दिपके ने ‘सीजेपी-डी‘ के लॉन्च को खारिज कर दिया
उन्होंने आरोप लगाया कि सीजेपी की लीडरशिप में ऐसे लोगों का दबदबा है, जो पहले आम आदमी पार्टी (AAP) से जुड़े थे और जिनकी दिलचस्पी सिर्फ भाजपा का विरोध करने में है। हालांकि अभिजीत दिपके ने ‘सीजेपी-डी’ के लॉन्च को खारिज कर दिया
मनीष व राहुल पंड्या ने पिछले माह दिपके के घर के बाहर विरोध प्रदर्शन किया था
इससे पहले अगस्त में, मनीष ब्रह्मभट्ट गुजरात से छत्रपति संभाजीनगर गए थे, जब उन्हें पता चला कि सीजेपी की मुख्य टीम दिपके के घर पर बैठक कर रही है। ब्रह्मभट्ट और उनके साथी राहुल पंड्या ने दिपके के घर के बाहर विरोध प्रदर्शन किया और आरोप लगाया कि जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शनों में सक्रिय रूप से शामिल वॉलंटियर्स को इन चर्चाओं से बाहर रखा गया है। बाद में, विरोध प्रदर्शन के दौरान तबीयत बिगड़ने पर दोनों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। उस समय, समाचार रिपोर्टों में ब्रह्मभट्ट की पहचान ‘सीजेपी वर्कर’ के तौर पर की गई थी।
उल्लेखनीय है कि दिपके ने 16 मई को सीजेपी की शुरुआत एक व्यंग्यात्मक ऑनलाइन आंदोलन के तौर पर की थी। यह तब शुरू हुआ, जब भारत के प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की ओर से कुछ लोगों को ‘कॉकरोच’ और ‘परजीवी’ (पैरासाइट) कहे जाने की बात सामने आने पर लोगों में गुस्सा फैल गया।
देखने को तो यह प्लेटफॉर्म एक ऑनलाइन मजाक के तौर पर शुरू हुआ, लेकिन बाद में युवाओं का एक ऐसा मंच बन गया, जिसने बेरोजगारी, परीक्षा के पेपर लीक होने और शिक्षा व्यवस्था में कथित गड़बड़ियों जैसे मुद्दों को उठाया।
नीट पेपर लीक को मुद्दा बनाकर शुरू हुआ सीजेपी का जंतर मंतर पर आंदोलन तो इस कदर परवान चढ़ा कि देश के तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा तक देना पड़ा। यही नहीं आंदोलन के दौरान देशभर में जिन प्रदर्शनकारी छात्रों पर मुकदमे दर्ज हुए, उन्हें भी सुप्रीम कोर्ट ने रद कर दिया। फिलहाल यह देखना दिलचस्प रहेगा कि (CJP-D) के गठन से क्या तस्वीर उभरकर सामने आती है।


