विदेश मंत्री जयशंकर ने यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की से की भेंट, बोले- रूसी तेल खरीदने या न खरीदने से यूक्रेन युद्ध नहीं रुकेगा

कीव, 3 सितम्बर। पिछले हफ्ते मॉस्को में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात के बाद विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर अब यूक्रेन दौरे पर पहुचे हैं। इस क्रम में गुरुवार को उन्होंने यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की सहित अन्य शीर्ष नेताओं से मुलाकात की और साथ ही रूस से तेल खरीद के मुद्दे पर भारत का रुख दोहराते हुए कहा कि यूक्रेन संकट का हल इस बात से नहीं निकलेगा कि कोई देश तेल खरीद रहा है या नहीं।

जयशंकर ने अमेरिका और यूरोप को दिया जवाब

डॉ. जयशंकर ने कहा कि भारत इस लंबे संघर्ष को समाप्त करने के लिए हर संभव सहयोग देने को तैयार है। दरअसल, अमेरिका द्वारा रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर प्रतिबंध लगाने की संभावना के संदर्भ में पूछे गए सवाल पर जयशंकर ने कहा, ‘विश्व की ऊर्जा स्थिति इस समय अत्यंत कठिन है। 1.4 अरब लोगों के लिए ऊर्जा उपलब्ध कराना चुनौती है। यूक्रेन का अपना दृष्टिकोण है और हम उसका सम्मान करते हैं।’

उन्होंने आगे कहा, ‘यह संघर्ष, जो अब अपने 5वें वर्ष में है, किसी के तेल, एल्यूमिना, खनिज, धातु या उर्वरक खरीदने अथवा न खरीदने से हल नहीं होगा। यह संवाद, कूटनीति और बातचीत से सुलझेगा। इसीलिए हम इसे प्रोत्साहित करेंगे।’

गौरतलब है कि 2022 में युद्ध शुरू होने के बाद से रूसी तेल की निरंतर खरीद को लेकर भारत पर अमेरिका और यूरोपीय देशों की आलोचना होती रही है। नई दिल्ली ने इन खरीदों का बचाव करते हुए कहा है कि उसे अपने नागरिकों के लिए सस्ती ऊर्जा सुनिश्चित करने का अधिकार है।

द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना यूक्रेन-पोलैंड का मकसद

देखा जाए तो जयशंकर के तीन दिवसीय यूक्रेन-पोलैंड दौरे का मकसद द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना और क्षेत्रीय तथा वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करना है। कीव में उन्होंने राष्ट्रपति जेलेंस्की के अलावा विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा से मुलाकात की। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिश्केक में एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से अनुरोध किया था कि ‘अनंत युद्ध’ से आगे बढ़कर ‘युद्ध के अंत’ की ओर बढ़ा जाए।

‘यह युद्ध का युग नहीं है‘

राजधानी कीव में वार्ता के दौरान जयशंकर ने भारत की स्थायी स्थिति दोहराई कि यह युद्ध का युग नहीं है और युद्ध के मैदान से समाधान नहीं निकलेगा। भारत दोनों पक्षों के साथ संवाद बनाए हुए है। कुछ दिन पहले मॉस्को में भी उच्चस्तरीय बैठकें हुई थीं जबकि अब कीव में सीधी बातचीत हो रही है। भारत का संदेश दोनों राजधानियों में एक जैसा रहा है, युद्ध बंद हो, बातचीत शुरू हो।

इस दौरान विदेश मंत्री ने दो दिन पहले कीव पर हुए हमले का भी उल्लेख किया, जिसमें एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई थी। उन्होंने कहा, ‘हम सभी मृतकों के प्रति शोक व्यक्त करते हैं और प्रभावित परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं।’

भारतीय नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा

जयशंकर ने सिबिहा के साथ बातचीत में काला सागर में व्यावसायिक जहाजों पर हमलों और भारतीय नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि इस संघर्ष के कुछ विशिष्ट पहलू चर्चा में आए, जिनमें वाणिज्यिक जहाजों पर हमले सबसे महत्वपूर्ण थे। भारतीय नाविक विश्व के कई देशों के जहाजों पर काम करते हैं। दुर्भाग्य से वे इन हमलों के शिकार हुए हैं। भारत काला सागर में नागरिक जहाजों पर किसी भी पक्ष के हमले को अस्वीकार्य मानता है। इन हमलों का असर केवल चालक दल तक सीमित नहीं है। वैश्विक दक्षिण के कई देश ईंधन, उर्वरक और भोजन की कमी झेल रहे हैं क्योंकि समुद्री मार्ग बाधित हो रहे हैं।

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