‘तिरुक्कुरल पयिल्वोम’ थीम पर आयोजित होगा काशी तमिल संगमम का पांचवां संस्करण

वाराणसी, तीन नवम्बर। काशी और तमिलनाडु के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक एवं सभ्यतागत संबंधों को और मजबूत करने के उद्देश्य से काशी तमिल संगमम के पांचवें संस्करण का आयोजन आगामी 28 नवम्बर से 12 दिसम्बर तक किया जाएगा। इस बार आयोजन की थीम ‘तिरुक्कुरल पयिल्वोम – तिरुक्कुरल अभ्यास करें’ रखी गई है।

तैयारियों को लेकर बीएचयू में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक

काशी तमिल संगमम 5.0 के सफल आयोजन की तैयारियों को लेकर मंगलवार को काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने हिस्सा लिया। बैठक में आयोजन की तैयारियों, विभागीय समन्वय, व्यवस्थाओं और कार्यक्रम को व्यापक स्तर पर सफल बनाने से जुड़े विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की गई।

भारत सरकार के उच्च शिक्षा विभाग की सचिव श्रीमती दीप्ति गौड़ मुखर्जी, बीएचयू के कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी, उत्तर प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा श्री अमित कुमार घोष, शिक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव श्रीमती अंकिता मिश्रा बुंदेला तथा भारतीय भाषा समिति के अध्यक्ष श्री चमू कृष्ण शास्त्री सहित वाराणसी के मंडलायुक्त, जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन और विभिन्न विभागों के अधिकारी बैठक में उपस्थित रहे।

तिरुक्कुरल के जरिए जुड़ेंगी देश की भाषाएं और संस्कृतियां

काशी तमिल संगमम का पांचवां संस्करण संत कवि तिरुवल्लुवर की कालजयी रचना ‘तिरुक्कुरल’ पर केंद्रित होगा। तिरुवल्लुवर के 1,330 कुरल में धर्म, अर्थ और प्रेम के साथ नैतिकता, सदाचार और जीवन मूल्यों की गहरी सीख मिलती है। इस ग्रंथ की सार्वभौमिक प्रासंगिकता को देखते हुए केंद्रीय शास्त्रीय तमिल संस्थान ने इसका अनुवाद संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी 22 भाषाओं में कराया है। इस संस्करण के माध्यम से तिरुक्कुरल के शाश्वत मूल्यों को देश के युवाओं और शैक्षणिक संस्थानों तक पहुंचाने पर विशेष जोर दिया जाएगा।

देशभर के 1,000 संस्थानों के विद्यार्थी होंगे शामिल

कार्यक्रम के तहत भारत के विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के नोडल संस्थानों द्वारा चयनित एक हजार सहभागी संस्थानों के विद्यार्थी तिरुक्कुरल का अध्ययन करेंगे। प्रत्येक संस्थान अपने इच्छुक विद्यार्थियों का मूल्यांकन कर मेरिट के आधार पर एक विद्यार्थी का चयन करेगा।

चयनित विद्यार्थी अपनी भाषा में आयोजित दो शैक्षणिक व्याख्यानों और एक माह की शोध एवं शैक्षणिक सहभागिता में हिस्सा लेंगे। उन्हें संकाय पर्यवेक्षक या मार्गदर्शक के निर्देशन में चार से पांच पृष्ठ का लेख अथवा शोध टिप्पणी तैयार करनी होगी। इसके अतिरिक्त, प्रत्येक विद्यार्थी एक घंटे की प्रस्तुति के माध्यम से तिरुक्कुरल के संदेश को अपने संस्थान और परिसर तक पहुंचाएगा।

पोर्टल और पंजीकरण का हो चुका है शुभारंभ

काशी तमिल संगमम 5.0 के वेब पोर्टल एवं पंजीकरण प्रक्रिया का शुभारंभ 22 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री प्रहलाद जोशी द्वारा किया गया था। कार्यक्रम के क्रियान्वयन में शिक्षा मंत्रालय की प्रमुख भूमिका है।

केंद्रीय शास्त्रीय तमिल संस्थान, चेन्नई आयोजन के पोर्टल, पंजीकरण, चयन प्रक्रिया, बहुभाषी शैक्षणिक अभिविन्यास, डिजिटल संग्रह, ऐप, फिल्मों, प्रकाशनों और विद्यालयों तक पहुंच बनाने का कार्य करेगा। वहीं आईआईटी मद्रास और काशी हिंदू विश्वविद्यालय क्रमशः तमिलनाडु और काशी पक्ष के नोडल एवं समन्वयक संस्थान होंगे। भारतीय रेल, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, संस्कृति मंत्रालय,  उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु सरकारें भी आयोजन के प्रचार-प्रसार, यात्रा, प्रदर्शनियों और अन्य व्यवस्थाओं में सहयोग करेंगी।

‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना को मिलेगी मजबूती

काशी तमिल संगमम की परिकल्पना ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना को साकार करने के उद्देश्य से की गई है। यह आयोजन गंगा तट की प्राचीन नगरी काशी और वैगई एवं कावेरी नदियों के तट पर विकसित तमिल सभ्यता के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, भाषाई, आध्यात्मिक और शैक्षणिक संबंधों को नई पीढ़ी से जोड़ने का महत्वपूर्ण मंच है।

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