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दान चोरी विवाद : श्री राम जन्मभूमि ट्रस्ट के अनुरोध पर SIT गठित, टीम 15 दिनों में सौंपेगी फाइनल रिपोर्ट

दान चोरी विवाद : श्री राम जन्मभूमि ट्रस्ट के अनुरोध पर SIT गठित, टीम 15 दिनों में सौंपेगी फाइनल रिपोर्ट

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लखनऊ, 13 जून। अयोध्या स्थित श्री राम मंदिर में दान पात्रों की राशि में कथित गबन और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को लेकर उभरे राजनीतिक विवाद के बीच उत्तर प्रदेश शासन ने शनिवार को विशेष जांच टीम (SIT) गठित कर दी। यह जांच टीम 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।

इसके पूर्व श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने स्वयं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से SIT का गठन कर उच्चस्तरीय जांच कराने का अनुरोध किया था। शासन ने ट्रस्ट के अनुरोध पर SIT का गठन कर दिया। यह टीम सात दिनों में प्रारंभिक रिपोर्ट और 15 दिनों में फाइनल रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। इस कमेटी में लखनऊ मंडलायुक्त IAS विजय विश्वास पंत, आईजी रेंज IPS किरन एस और विशेष सचिव वित्त नील रतन शामिल हैं।

ट्रस्ट का कहना है कि करोड़ों देश-विदेश के भक्तों की अटूट आस्था से जुड़े इस पावन मामले की पूरी तरह से पारदर्शी और निष्पक्ष जांच होना बेहद आवश्यक है, ताकि सोशल मीडिया पर चल रही तमाम तरह की भ्रामक अफवाहों पर तत्काल पूर्णविराम लग सके। राज्य सरकार के प्रवक्ता के अनुसार राम मंदिर के दान पात्रों में दान की गई बहुमूल्य धनराशि की चोरी के संबंध में फैल रही अफवाहों को लेकर ही ट्रस्ट ने मुख्यमंत्री से यह अनुरोध किया था।

पूर्व लेखा प्रभारी ने लगाए ट्रस्ट पर गंभीर आरोप

यह पूरा विवाद तब देशभर की सुर्खियों में आया, जब राम मंदिर के पूर्व मुख्य लेखा प्रभारी महिपाल सिंह ने दावा किया कि मंदिर के चढ़ावे की गिनती के दौरान बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं की जा रही थीं। उन्होंने सीधा आरोप लगाया कि पूर्व में एक बार उन्होंने स्वयं अपनी सतर्कता से लगभग पांच लाख रुपये की नकद चोरी को रंगेहाथ पकड़ा था, लेकिन उच्चाधिकारियों से लिखित शिकायत करने के बाद उन्हें न्याय देने के बजाय उल्टे नौकरी से ही निष्कासित कर दिया गया।

महिपाल सिंह ने अपने दावों को और मजबूत करते हुए यह भी संगीन आरोप लगाया कि मंदिर परिसर के कुछ महत्वपूर्ण CCTV फुटेज को जान बूझकर डिलीट कर दिया गया है और भक्तों द्वारा चढ़ाए गए सोने-चांदी व अन्य कीमती आभूषणों का कोई भी पारदर्शी डिजिटल रिकॉर्ड नहीं रखा गया है।

ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने किया आरोपों का खंडन

हालांकि ट्रस्ट के प्रभावशाली महासचिव चंपत राय ने पूर्व लेखा प्रभारी द्वारा लगाए गए इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इनका कड़ा खंडन किया है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर में भक्तों के दान संग्रह, उसकी दैनिक गिनती, सुरक्षित परिवहन और अंततः अधिकृत बैंक में जमा करने की पूरी प्रक्रिया पूरी तरह से कंप्यूटरीकृत और पारदर्शी है।

चंपत राय ने बताया कि देश के प्रतिष्ठित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के विशेषज्ञ अधिकारियों के साथ मंदिर के खातों का नियमित रूप से वित्तीय ऑडिट किया जाता है और अब तक की जांच में किसी भी प्रकार के बड़े वित्तीय गबन की कोई पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि, विवाद को बढ़ता देख ट्रस्ट ने आंतरिक स्तर पर भी एक विस्तृत जांच शुरू कर दी है, जिसमें मुख्य रूप से पिछले महीनों के सीसीटीवी फुटेज की पुनरीक्षा और कैश हैंडलिंग प्रक्रिया की गहन पड़ताल शामिल है।

4 कर्मचारियों की हिरासत व 5 लाख रुपये की कथित रिकवरी का भी दावा

इस बीच, पुलिस द्वारा संदिग्ध गतिविधियों के आरोप में चार कर्मचारियों को हिरासत में लेने और उनके पास से पांच लाख रुपये की कथित रिकवरी होने का दावा भी सामने आ रहा है।

अखिलेश यादव ने की न्यायिक संज्ञान की मांग

वहीं इस मामले पर उत्तर प्रदेश की सियासत भी पूरी तरह गरमा गई है और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मंदिर से करीब 5-7 करोड़ रुपये की बड़ी चोरी होने का आरोप लगाते हुए माननीय न्यायालय से इस विषय पर तत्काल स्वतः संज्ञान लेने की पुरजोर मांग की है।

PMO ने भी ट्रस्ट से विस्तृत व बिंदुवार रिपोर्ट तलब की

दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता डॉ. रजनीश सिंह ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक विशेष पत्र लिखकर इस पूरे कथित घोटाले की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो या प्रवर्तन निदेशालय से जांच कराने की मांग की है। इस राजनीतिक हलचल के बाद सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने भी सक्रियता दिखाते हुए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से पूरे मामले की एक विस्तृत और बिंदुवार रिपोर्ट तलब की है।

संत समाज ने भी पारदर्शिता पर उठाए सवाल

इस मामले में महंत कमल नयन दास (जो कि ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के घोषित उत्तराधिकारी हैं) ने निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि पावन राम मंदिर के चढ़ावे में किसी भी स्तर पर कोई वित्तीय गड़बड़ी पायी जाती है तो दोषियों के खिलाफ बिना किसी रियायत के कठोरतम दंडात्मक काररवाई की जानी चाहिए। वर्तमान में राम मंदिर के विशाल परिसर में भक्तों की सुविधा और चढ़ावे के लिए करीब चार दर्जन (48) बड़े दान पात्र अलग-अलग स्थानों पर स्थापित किए गए हैं।

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