कैलाश मानसरोवर तीर्थयात्रा 20 जून से : सिक्किम में नाथुला दर्रे से 10 बैच में 500 श्रद्धालु शुरू करेंगे यात्रा
कलिम्पोंग (पश्चिम बंगाल), 13 जून। कैलाश मानसरोवर की बहुप्रतीक्षित यात्रा 20 जून से शुरू होने जा रही है और श्रद्धालु सिक्किम में नाथुला दर्रे के रास्ते से अपनी यात्रा शुरू करेंगे। इस वर्ष 500 तीर्थयात्री कुल 10 बैच में नाथुला दर्रे के रास्ते से यात्रा करेंगे। हर बैच में 50 तीर्थयात्री होंगे। हर ग्रुप के साथ एक संपर्क अधिकारी और एक चिकित्सा सहायक भी होंगे।
सिक्किम पर्यटन विकास निगम (STDC) के चेयरमैन लोकेंद्र रसैली ने शनिवार को बताया कि सिक्किम के नाथुला दर्रे के रास्ते से कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए आधिकारिक प्रक्रिया 11 जून को शुरू हो गई है। तीर्थयात्रियों का पहला जत्था 15 जून की शाम को सिक्किम पहुंचेगा। इसके बाद तीर्थयात्रियों को अपने शरीर को ऊंचाई के हिसाब से ढालने के लिए एक मुश्किल प्रक्रिया से गुजरना होगा।
कठोर शारीरिक तैयारी
16 जून को तीर्थयात्रियों को 18वां मील पर बने एक अनुकूलन केंद्र ले जाया जाएगा, जहां वे दो दिन रहेंगे। इसके बाद, 18 और 19 जून को उन्हें त्सोमगो (चांगू) झील के दूसरे अनुकूलन केंद्र में ले जाया जाएगा। सारी शारीरिक तैयारी पूरी होने के बाद ही 20 जून को कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए पहले बैच को आधिकारिक रूप से रवाना किया जाएगा।
लॉटरी के जरिए तीर्थयात्रियों का चयन
उम्मीद है कि इस वर्ष कैलाश मानसरोवर यात्रा में लगभग 500 तीर्थयात्री हिस्सा लेंगे। STDC के चेयरमैन लोकेंद्र रसैली ने कहा, ‘इस तीर्थयात्रा के लिए लगभग 1,500 लोगों ने आवेदन किया था। उनमें से 500 को लॉटरी सिस्टम से चुना गया। यह तीर्थयात्रा 20 जून से 24 अगस्त के बीच 10 बैच में की जाएगी। हर बैच तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र (TAR) में लगभग 12 दिनों की यात्रा पूरी करके लौटेगा।
2020 में कोविड-19 के कारण रोक दी दी गई थी यात्रा
गौरतलब है कि कोविड-19 महामारी के कारण 2020 में कैलाश मानसरोवर यात्रा रोक दी गई थी। पांच वर्ष बीत जाने के बाद भी तीर्थयात्रा फिर से शुरू नहीं हो सकी। पिछले कुछ वर्षों में लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश में भारत और चीन के बीच बॉर्डर पर तनाव की वजह से तीर्थयात्रा का भविष्य पक्का नहीं था।
