वाराणसी, 15 अगस्त। उत्तर प्रदेश के वाराणसी से एक ऐसी मार्मिक घटना सामने आई है, जिसने रिश्तों की बदलती तस्वीर पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। महाराष्ट्र से बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए काशी आए एक परिवार का कुछ ही दिनों में ऐसा दुखद अंत हुआ कि उनके शव को लेने और अंतिम संस्कार के लिए भी कोई अपना आगे नहीं आया। अंततः पुलिस ने शुक्रवार शाम को समाजसेवी अमन कबीर की मदद से हरिश्चंद्र घाट पर पति, पत्नी और बेटे का एक साथ ही अंतिम संस्कार करवाया।
पुलिस के अनुसार, महाराष्ट्र निवासी व्यापारी विशाल मुखर्जी (56) अपनी पत्नी जया मुखर्जी (51) और पुत्र ईशान मुखर्जी (25) के साथ पांच अगस्त को काशी दर्शन के लिए आए थे। परिवार ने श्री काशी विश्वनाथ धाम सहित अन्य प्रमुख मंदिरों में दर्शन-पूजन किया तथा गंगा आरती में भी भाग लिया। बताया जा रहा है कि गंभीर बीमारी से जूझ रहे विशाल मुखर्जी की सावन में बाबा विश्वनाथ के दर्शन करने की अंतिम इच्छा थी। रविवार को बीमारी के चलते विशाल मुखर्जी की ट्रामा सेंटर में मृत्यु हो गई। पति की मौत का सदमा पत्नी और पुत्र सहन नहीं कर सके।
पुलिस के अनुसार, दोनों ट्रॉमा सेंटर में विशाल का शव छोड़कर लक्सा क्षेत्र स्थित अपने होम स्टे लौट आए और रविवार-मध्यरात्रि से सोमवार के बीच जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या कर लिए। जांच में यह भी सामने आया कि विशाल मुखर्जी और उनके पुत्र ईशान पर काफी कर्ज था, जिससे पूरा परिवार आर्थिक और मानसिक तनाव में था। पुलिस का मानना है कि यही परिस्थितियां इस दुखद घटना की प्रमुख वजह हो सकती हैं।
घटना के बाद पुलिस ने प्रयागराज समेत अन्य स्थानों पर रहने वाले परिजनों और रिश्तेदारों से कई बार संपर्क किया, लेकिन किसी ने भी शव लेने की सहमति नहीं दी। पुलिस के अनुसार, कई रिश्तेदारों ने फोन पर यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि उनका इस परिवार से अब कोई संबंध नहीं है। शुक्रवार शाम को पुलिस ने समाजसेवी अमन कबीर की मदद से तीनों का अंतिम संस्कार कराया। पति, पत्नी और बेटे के शवों को अमन कबीर ने स्वयं मुखाग्नि दी।
अमन कबीर ने बताया कि वह अक्सर लावारिस अथवा आर्थिक रूप से असमर्थ परिवारों के अंतिम संस्कार में सहयोग करते हैं, लेकिन यह पहला अवसर था जब उन्हें एक ही परिवार के तीन सदस्यों को एक साथ मुखाग्नि देनी पड़ी। उन्होंने कहा, “जीवनभर साथ निभाने वाले अपने लोग मृत्यु के बाद इस तरह मुंह मोड़ लेंगे, इसकी कभी कल्पना भी नहीं की थी।” यह घटना न केवल एक परिवार की त्रासदी है, बल्कि बदलते सामाजिक रिश्तों और मानवीय संवेदनाओं पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न छोड़ जाती है।

