मुंबई, 13 जुलाई। वैश्विक बाजारों में जारी अनिश्चितता के बीच गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत सीमित दायरे में हुई। घरेलू अर्थव्यवस्था के मजबूत संकेतकों और लगातार निवेश प्रवाह से बाजार को सहारा मिला, लेकिन कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक जोखिमों को लेकर चिंता के कारण शुरुआती बढ़त ज्यादा देर कायम नहीं रह सकी। 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स पिछले बंद स्तर 77,966.35 के मुकाबले 145.56 अंक यानी 0.18 प्रतिशत चढ़कर 78,111.91 पर खुला। वहीं एनएसई निफ्टी 50 पिछले बंद 24,435.95 से 4.35 अंक की मामूली गिरावट के साथ 24,431.60 पर लगभग सपाट खुला।
हालांकि कुछ ही देर में दोनों प्रमुख सूचकांकों में गिरावट बढ़ गई। खबर लिखे जाने तक सेंसेक्स करीब 180 अंक यानी 0.24 प्रतिशत टूटकर 77,775 के आसपास कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 50 95.75 अंक यानी 0.39 प्रतिशत की गिरावट के साथ 24,340.20 के आसपास बना हुआ था।
मिडकैप में गिरावट, स्मॉलकैप मजबूत
व्यापक बाजार में निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 0.15 प्रतिशत नीचे रहा, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप में 0.33 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो निफ्टी मीडिया 0.61 प्रतिशत की बढ़त के साथ सबसे मजबूत रहा। इसके बाद निफ्टी ऑटो में 0.39 प्रतिशत की तेजी आई। इससे ऑटो शेयरों में खरीदारी का रुझान देखने को मिला।
दूसरी ओर रियल्टी और आईटी शेयरों पर दबाव रहा। निफ्टी रियल्टी 0.81 प्रतिशत और निफ्टी आईटी 0.69 प्रतिशत कमजोर हुआ। पीएसयू बैंक, ऑयल एंड गैस तथा प्राइवेट बैंकिंग इंडेक्स में भी 0.61 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी 50 में ग्रासिम इंडस्ट्रीज, अल्ट्राटेक सीमेंट और हिंडाल्को इंडस्ट्रीज शुरुआती कारोबार में सबसे ज्यादा दबाव में रहे।
घरेलू अर्थव्यवस्था से बाजार को सहारा
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निकट अवधि में भारतीय शेयर बाजार सीमित दायरे में रह सकता है। घरेलू आर्थिक बुनियादी संकेतक और घरेलू निवेशकों का लगातार निवेश बाजार को मजबूती दे रहा है, जबकि वैश्विक जोखिम निवेशकों को सतर्क बनाए हुए हैं।
विश्लेषकों के अनुसार, जीएसटी संग्रह, माल ढुलाई, ऑटोमोबाइल बिक्री और बैंक ऋण वृद्धि जैसे उच्च-आवृत्ति वाले आर्थिक संकेतक अर्थव्यवस्था की मजबूती की ओर इशारा कर रहे हैं। इससे आने वाली तिमाहियों में कंपनियों की आय को समर्थन मिलने की उम्मीद है।
कच्चे तेल की कीमतों पर नजर
कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव अभी भी बाजार के लिए प्रमुख चिंता बना हुआ है। तेल की कीमतों का असर महंगाई, भारत के आयात बिल और कंपनियों की उत्पादन लागत पर पड़ सकता है।
हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार से कुछ राहत मिली। ब्रेंट क्रूड 1 प्रतिशत से अधिक गिरकर 87.75 डॉलर प्रति बैरल, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड 1.64 प्रतिशत फिसलकर 81.90 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। तेल कीमतों में नरमी से महंगाई और कंपनियों की लागत को लेकर चिंता कुछ कम हो सकती है।
निफ्टी के लिए 24,540-24,666 का स्तर अहम
तकनीकी विश्लेषकों के मुताबिक बुधवार के कारोबार में निफ्टी ने 20-दिवसीय मूविंग एवरेज के पास मजबूती दिखाई और चार्ट पर हैमर कैंडलस्टिक पैटर्न बनाया। इससे निकट अवधि में बाजार का तकनीकी रुख कुछ बेहतर हुआ है।
विशेषज्ञों के अनुसार, निफ्टी में पहले चरण में 24,540 से 24,666 तक की तेजी देखने को मिल सकती है। इसके बाद इंडेक्स 24,850 से 25,100 के स्तर की ओर बढ़ सकता है। हालांकि 24,490 के आसपास मुनाफावसूली और कंसोलिडेशन देखने को मिल सकता है।
फिलहाल बाजार की दिशा घरेलू आर्थिक आंकड़ों, कॉरपोरेट आय, विदेशी और घरेलू निवेश प्रवाह तथा कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करेगी। मजबूत घरेलू संकेतक बाजार को सहारा दे रहे हैं, जबकि वैश्विक परिस्थितियां निवेशकों को सतर्क रहने के लिए मजबूर कर रही हैं।

