सुप्रीम कोर्ट में अभद्रता पर SCBA सख्त : कोर्ट की वीडियो रिकॉर्डिंग और सोशल मीडिया प्रसार पर गाइडलाइन की मांग

नई दिल्ली, 11 जुलाई। सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को न्यायिक कार्यवाही के दौरान हुई एक अभूतपूर्व घटना पर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। एसोसिएशन ने अदालत के समक्ष एक वादी के कथित अभद्र और अपमानजनक व्यवहार की निंदा करते हुए कहा कि इस तरह की घटनाएं न्यायपालिका की गरिमा और न्याय व्यवस्था की पवित्रता के लिए गंभीर चुनौती हैं।

एससीबीए ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि न्यायमूर्ति के. वी. विश्वनाथन और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान संबंधित पक्षकार का व्यवहार पूरी तरह अस्वीकार्य था। अदालत के भीतर गाली-गलौज, धमकी या किसी भी प्रकार का व्यवधान न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करता है और कानून के शासन पर सीधा आघात है। बार एसोसिएशन ने कहा कि न्यायालय की गरिमा और सम्मान हर परिस्थिति में बनाए रखा जाना चाहिए। अदालत के भीतर अनुशासन और मर्यादा लोकतांत्रिक न्याय व्यवस्था की आधारशिला हैं, इसलिए ऐसे मामलों में कानून के अनुरूप सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

वीडियो रिकॉर्डिंग और सोशल मीडिया पर गाइडलाइन की मांग

घटना के बाद एससीबीए ने अदालत की कार्यवाही की वीडियो रिकॉर्डिंग, क्लिपिंग, एडिटिंग और सोशल मीडिया पर उनके प्रसार को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश (गाइडलाइन) तैयार करने की मांग की है। एसोसिएशन का कहना है कि वर्तमान समय में कोर्ट की कार्यवाही के वीडियो या उनके संपादित अंश सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित किए जाते हैं। कई बार इन्हें संदर्भ से हटाकर प्रस्तुत किया जाता है, जिससे तथ्यों की गलत व्याख्या होती है और न्यायपालिका की छवि प्रभावित होती है। एससीबीए ने जोर देकर कहा कि ऐसी स्पष्ट व्यवस्था बनाई जानी चाहिए, जिससे कोर्टरूम की रिकॉर्डिंग के दुरुपयोग को रोका जा सके और न्यायिक संस्थानों की गरिमा सुरक्षित रह सके। एसोसिएशन के अनुसार, संदर्भ से हटाकर प्रसारित किए गए वीडियो आम जनता में भ्रम पैदा कर सकते हैं और न्यायपालिका पर लोगों के विश्वास को कमजोर कर सकते हैं।

केंद्र सरकार से भी की अपील

बार एसोसिएशन ने केंद्र सरकार से अनुरोध किया है कि कानून के अनुरूप ऐसे वीडियो और एडिट किए गए क्लिप, जिनका उद्देश्य न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुंचाना या अदालतों के प्रति जनता का विश्वास कमजोर करना हो, उन्हें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटाने के लिए आवश्यक प्रशासनिक और कानूनी कदम उठाए जाएं। एससीबीए ने अंत में कहा कि न्यायालय की कार्यवाही की पवित्रता बनाए रखना सभी पक्षों की साझा जिम्मेदारी है और न्यायपालिका के सम्मान से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता।

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