लोकसभा में प्रियंका गांधी ने सरकार से पूछा- छात्रों पर पेलेट गन चलाने की क्या जरूरत थी, किसने दिया आदेश?

नई दिल्ली, 28 जुलाई। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने लोकसभा में मंगलवार को लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान केंद्र सरकार पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि सरकार युवाओं और छात्रों की आवाज दबाने का काम कर रही है।

प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को देना होगा इसका जवाब

कांग्रेस सांसद ने छात्र आंदोलन के दौरान बल प्रयोग को लेकर प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं को इसका जवाब देना चाहिए कि किसके आदेश पर छात्रों के खिलाफ पेलेट गन का इस्तेमाल किया गया।

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प्रियंका गांधी ने गत 20 जुलाई को दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों पर किये गए बल प्रयोग का उल्लेख करते हुए कहा, ‘मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से पूछना चाहती हूं कि छात्रों पर आंसू गैस छोड़ने, लाठीचार्ज करने, पेलेट गन और एके-47 का इस्तेमाल करने की क्या जरूरत थी? क्या वे छात्र आतंकवादी थे? देश के युवाओं पर पेलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया? क्या यह आदेश प्रधानमंत्री ने दिया या गृह मंत्री ने? इसका जवाब उन्हें देना होगा। सिर्फ कांग्रेस ही नहीं, पूरा देश इसका जवाब मांग रहा है।’

घायल छात्रा की मां का जिक्र किया

उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले वह दिल्ली के राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल में उस छात्रा का हालचाल जानने गई थीं, जो पुलिस लाठीचार्ज में घायल होने के बाद आईसीयू में जिंदगी की जंग लड़ रही थी। उन्होंने बताया कि उनके अस्पताल पहुंचने से कुछ समय पहले केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा और अन्य नेता भी छात्रा से मिलने पहुंचे थे।

प्रियंका गांधी ने कहा कि जब वह वहां पहुंचीं तो छात्रा की मां बेहद दुखी थीं और उन्होंने हाथ जोड़कर कहा, ‘आपके आने के लिए धन्यवाद, लेकिन मैं किसी से मिलना नहीं चाहती। मैं किसी से बात नहीं करना चाहती। सुबह से बड़े-बड़े नेता एक के बाद एक आ रहे हैं, वीडियो बना रहे हैं। मेरी बेटी की इस हालत के लिए जो जिम्मेदार हैं, वे भी यहां आए। आखिर क्यों?” उन्होंने कहा कि उस मां का दर्द साफ दिखाई दे रहा था और पूरा शरीर कांप रहा था।

देश सांसदों की जागीर नहीं, बल्कि जनता की अमानत

सरकार पर हमला जारी रखते हुए प्रियंका गांधी ने कहा कि यह देश ‘सांसदों की जागीर नहीं, बल्कि जनता की अमानत’ है और सरकार की जिम्मेदारी है कि वह जनता के सवालों का जवाब दे। उन्होंने दावा किया कि आज युवाओं को लगने लगा है कि मेहनत से ज्यादा बेईमानी मायने रखती है।

उन्होंने शिक्षा व्यवस्था को लेकर कहा कि इसमें गंभीर खामियां हैं, बच्चे आत्महत्या कर रहे हैं और परिवार कर्ज लेकर पढ़ाई करा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 10 वर्षों में 152 पेपर लीक हुए, करोड़ों छात्र प्रभावित हुए, लेकिन पेपर लीक माफिया के एक भी सदस्य को सजा नहीं मिली। कांग्रेस सांसद ने कहा कि शिक्षा प्रणाली खुद विफल हो चुकी है।

सरकार को आखिर किस बात का अहंकार?

उन्होंने कहा कि तत्कालीन शिक्षा मंत्री (धर्मेंद्र प्रधान) ने शर्मनाक परिस्थितियों में इस्तीफा दिया, लेकिन संसद परिसर में सत्तापक्ष के सांसदों ने उनका ‘सुपरस्टार की तरह स्वागत’ किया। उन्होंने सवाल किया कि सरकार को आखिर किस बात का अहंकार है? प्रियंका गांधी ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री को अपने सलाहकार बदल देने चाहिए। शायद वह असलियत से दूर जा चुके हैं। नयी-नयी समितियों से कुछ नहीं होगा।’

‘प्रधानमंत्री को कैमरे का नहीं, दिल का एंगल बदलना पड़ेगा’

प्रियंका ने प्रधानमंत्री पर कटाक्ष करते हुए कहा, ‘‘अगर ‘जेन जेड’ का भरोसा वापस जीतना चाहते हैं तो कैमरे के एंगल बदलने से कुछ नहीं होगा। प्रधानमंत्री को कैमरे का नहीं, दिल का एंगल बदलना पड़ेगा।’’

वायनाड से सांसद ने सरकार से सवाल करते हुए कहा कि वह देश के युवाओं से आखिर क्यों डर रही है और छात्रों की आवाज दबाने का अधिकार उसे किसने दिया। उन्होंने कहा कि छात्र आंदोलन पर बल प्रयोग और परीक्षा प्रणाली की विफलता जैसे गंभीर मुद्दों पर सरकार को संसद और देश के सामने जवाब देना चाहिए।

वो लाठियां बच्चों की पीठ से ज्यादा मोदी सरकार की साख पर पड़ीं

उन्होंने कहा कि छात्रों को सड़क से हटाया जा सकता है, लेकिन उनके सवालों को नहीं। सच यही है कि वो लाठियां बच्चों की पीठ से ज्यादा मोदी सरकार की साख पर पड़ी हैं। देश के नौजवान न्याय मांग रहे हैं, भीख नहीं। वे सरकार गिराने नहीं, अपना भरोसा बचाने के लिए आए थे।

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