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विदेश मंत्रालय ने दी जानकारी- चाबहार पोर्ट पर अमेरिकी हमलों से भारतीय टर्मिनल सुरक्षित

विदेश मंत्रालय ने दी जानकारी- चाबहार पोर्ट पर अमेरिकी हमलों से भारतीय टर्मिनल सुरक्षित

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नई दिल्ली, 17 जुलाई। भारत ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि ईरान के चाबहार बंदरगाह पर अमेरिकी हमलों से वहां के ‘शहीद बेहेश्ती’ टर्मिनल को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। अमेरिकी अधिकारियों ने स्वीकार किया था कि ईरान के खिलाफ अपने सैन्य अभियान के तहत उन्होंने इस हफ्ते चाबहार बंदरगाह पर हमला किया था। चाबहार बंदरगाह में दो टर्मिनल हैं – शहीद बेहेश्ती और शहीद कलंतरी। इनमें से शहीद बेहेश्ती टर्मिनल का संचालन भारत कर रहा है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि चाबहार पर अमेरिकी प्रतिबंधों से मिली छूट अप्रैल में समाप्त हो गई थी। इसके बाद से भारत इस मुद्दे को आगे बढ़ाने के लिए संबंधित पक्षों के साथ बातचीत कर रहा है। उन्होंने हमले की खबरों की पुष्टि करते हुए साफ किया कि भारतीय टर्मिनल पूरी तरह सुरक्षित है।

नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमले का विरोध

रणधीर जायसवाल ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष पर भारत का रुख भी दोहराया। उन्होंने कहा कि किसी भी परिस्थिति में नागरिक बुनियादी ढांचे (सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर) को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। चाबहार बंदरगाह को भारत और ईरान मिलकर विकसित कर रहे हैं ताकि दोनों देशों के बीच व्यापार और संपर्क को बढ़ावा दिया जा सके। दोनों देश चाबहार को ‘अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा’ (INSTC) का हिस्सा बनाने की वकालत कर रहे हैं।

बुलेट ट्रेन परियोजना को लेकर पूर्व जापानी मंत्री के दावों को किया खारिज

वहीं मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना में देरी के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराने वाले जापान के एक पूर्व मंत्री के दावों को खारिज करते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि ये टिप्पणियां व्यक्तिगत राय हैं और तथ्यों से काफी अलग हैं। वास्तव में, मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड ट्रेन को लेकर भारत और जापान के बीच बातचीत अच्छी तरह आगे बढ़ रही है।

जापान की ई-20 ट्रेन श्रृंखला 2030 के शुरुआती वर्षों में ही संभव

रणधीर जायसवाल ने कहा कि जापान ई-20 ट्रेन श्रृंखला उपलब्ध कराएगा। लेकिन यह 2030 के शुरुआती वर्षों में ही संभव होगा। यह ट्रेन अभी विकास के चरण में है। इस बीच, निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। पहला हिस्सा वर्ष 2027 में ही शुरू हो जाएगा। इसलिए दोनों पक्षों ने भारतीय हाई स्पीड ट्रेन के साथ परिचालन शुरू करने पर सहमति जताई है।

जायसवाल ने बताया कि इसी के अनुसार सिग्नल देने वाले उपकरणों का ऑर्डर दिया गया है और ये अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हैं। इस मामले में जापान की ओर से कोई प्रस्ताव नहीं मिला था। परियोजना का काम इस साझा लक्ष्य के अनुसार आगे बढ़ रहा है कि हाई स्पीड ट्रेन परियोजना को जल्द से जल्द शुरू किया जाए।

जापान के पूर्व न्याय मंत्री माकिहारा ने परियोजना में विलंब पर जताई थी नाराजगी

उल्लेखनीय है कि बुलेट ट्रेन परियोजना को लेकर जापान के पूर्व न्याय मंत्री हिदेकी माकिहारा ने नाराजगी जताई थी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर दावा किया कि परियोजना में देरी की सबसे बड़ी वजह भारतीय पक्ष का रवैया रहा। माकिहारा ने कहा कि वह खुद इस परियोजना से जुड़े रहे हैं और जापानी टीम ने पूरी मेहनत के साथ काम किया। लेकिन उम्मीद के मुताबिक प्रगति नहीं हो सकी।

उनके मुताबिक, भारतीय पक्ष ने कई बार किए गए वादों को पूरा नहीं किया और समझौतों के बावजूद बाद में शर्तों में बदलाव किए गए। उन्होंने दावा किया कि इसी वजह से परियोजना की रफ्तार प्रभावित हुई। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री स्तर की बैठकों से भी अपेक्षित परिणाम नहीं मिले।

पीएम मोदी ने तत्कालीन जापानी पीएम शिंजो आबे संग 2017 में रखी थी आधारशिला

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने 14 सितम्बर, 2017 को अहमदाबाद में इसकी आधारशिला रखी थी। 508 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर पर बुलेट ट्रेन से मुंबई और अहमदाबाद के बीच सफर करीब तीन घंटे में पूरा होने की उम्मीद है। फिलहाल सामान्य ट्रेन से इस दूरी को तय करने में करीब सात से आठ घंटे लगते हैं। इस मार्ग पर मुंबई, ठाणे, विरार, बोइसर, वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, वडोदरा, आणंद, अहमदाबाद और साबरमती समेत 12 स्टेशन प्रस्तावित हैं। इनमें मुंबई स्टेशन भूमिगत होगा।

 

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