लखनऊ, आठ अक्टूबर। उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष प्रस्तावित विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी (सपा) को एक बड़ा झटका लगने जा रहा है। वजह, पार्टी के तीन बागी विधायक गौरीगंज से राकेश प्रताप सिंह, अयोध्या (गोसाईं गंज) से अभय सिंह और कालपी (जालौन) से विनोद चतुर्वेदी आधिकारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होंगे। इन तीनों नेताओं ने 2024 के राज्यसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की थी।
इन तीनों नेताओं की भाजपा में एंट्री के लिए 14 अक्टूबर को अमेठी के गौरीगंज में बड़ा कार्यक्रम आयोजित किए जाने की तैयारी है। यह मेगा ज्वॉइनिंग कार्यक्रम गौरीगंज स्थित राकेश प्रताप सिंह के निजी निवास में आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं और मंत्रियों के शामिल होने की संभावना है।
उल्लेखनीय है कि हाल ही में कालपी से विधायक विनोद चतुर्वेदी ने लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की थी। इस दौरान गौरीगंज के विधायक राकेश प्रताप सिंह और गोसाईगंज के विधायक अभय सिंह भी मौजूद थे। तीनों की मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद उनके भाजपा के साथ जाने की चर्चा और तेज हो गई थी।
राकेश प्रताप सिंह ने खुद 14 अक्टूबर को भाजपा की सदस्यता लेने की बात कही है। वह शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस भी करेंगे। इस पीसी में तीनों नेताओं के भाजपा में शामिल होने के कार्यक्रम से जुड़ी पूरी जानकारी दी जा सकती है। कार्यक्रम में कौन-कौन से नेता शामिल होंगे और आयोजन किस तरह होगा, इसे लेकर भी तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।
दरअसल, राकेश प्रताप सिंह लंबे समय से समाजवादी पार्टी से अलग रुख अपनाए हुए थे। 2024 के राज्यसभा चुनाव में बीजेपी प्रत्याशी के पक्ष में क्रॉस वोटिंग करने वाले सपा विधायकों में उनका नाम सामने आया था। इसके बाद जून 2025 में समाजवादी पार्टी ने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया था।
सपा ने राकेश प्रताप सिंह के साथ अयोध्या के गोसाईगंज विधायक अभय सिंह और रायबरली के ऊंचाहार विधायक मनोज पांडेय को भी पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था। विधानसभा में इन नेताओं को बाद में असंबद्ध सदस्यों के तौर पर मान्यता दी गई। हालांकि विनोद चतुर्वेदी उन सपा विधायकों में शामिल रहे हैं, जिन्होंने 2024 के राज्यसभा चुनाव में भाजपा के पक्ष में क्रॉस वोट किया था, लेकिन उन्हें उस समय सपा से निष्कासित नहीं किया गया था।


