Maa Dhari Devi Temple : चारधाम की रक्षक मानी जाती हैं मां धारी देवी, अलकनंदा के बीचों-बीच विराजमान हैं माता

उत्तराखंड, 8 सितंबर : देवभूमि उत्तराखंड अपने धार्मिक स्थलों, प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक वातावरण के लिए देश-दुनिया में प्रसिद्ध है। यहां स्थित कई मंदिर अपनी पौराणिक मान्यताओं और अनोखी भौगोलिक स्थिति के कारण श्रद्धालुओं के बीच विशेष महत्व रखते हैं। इन्हीं में से एक है मां धारी देवी मंदिर, जो अलकनंदा नदी के बीच स्थित है।

पौड़ी गढ़वाल जिले में श्रीनगर और रुद्रप्रयाग के बीच स्थित यह मंदिर श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, मां धारी देवी को उत्तराखंड के चारधाम-बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री की रक्षक देवी माना जाता है।

सीएम धामी ने शेयर किया मंदिर का वीडियो

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर मां धारी देवी मंदिर का एक वीडियो साझा किया। उन्होंने मंदिर की बढ़ती लोकप्रियता और श्रद्धालुओं की संख्या का जिक्र करते हुए लिखा कि पौड़ी गढ़वाल जिले के श्रीनगर में स्थित मां धारी देवी मंदिर अनगिनत भक्तों की आस्था का केंद्र है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार के लगातार प्रयासों से 2026 के पहले छह महीनों में मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में लगभग दोगुनी बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार तीर्थस्थलों के समग्र विकास, श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने और धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए लगातार काम कर रही है।

अलकनंदा नदी के बीच स्थित है मंदिर

मां धारी देवी मंदिर की सबसे खास बात इसकी भौगोलिक स्थिति है। मंदिर अलकनंदा नदी के बीच स्थित है और चारों तरफ पहाड़ों से घिरा हुआ प्राकृतिक वातावरण इसे और आकर्षक बनाता है। यह स्थान धार्मिक आस्था के साथ-साथ उत्तराखंड की प्राकृतिक खूबसूरती का भी अनूठा संगम है। यहां पहुंचने वाले श्रद्धालु मां के दर्शन के साथ अलकनंदा नदी और आसपास के पहाड़ी दृश्यों का भी अनुभव करते हैं।

मां धारी देवी की मूर्ति से जुड़ी है खास मान्यता

मां धारी देवी की प्रतिमा को लेकर भी एक विशेष धार्मिक मान्यता है। बताया जाता है कि मूर्ति का ऊपरी हिस्सा श्रीनगर और रुद्रप्रयाग के बीच अलकनंदा नदी के तट पर स्थित धारी देवी मंदिर में स्थापित है, जबकि प्रतिमा का निचला हिस्सा कालीमठ में विराजमान है, जहां माता की पूजा देवी काली के स्वरूप में की जाती है। स्थानीय श्रद्धालुओं का विश्वास है कि मां धारी देवी अपने भक्तों की रक्षा करती हैं और सच्चे मन से प्रार्थना करने वालों की मनोकामनाएं पूरी करती हैं।

चारधाम की रक्षक मानी जाती हैं मां धारी देवी

उत्तराखंड में मां धारी देवी को चारधाम की रक्षक देवी के रूप में विशेष सम्मान प्राप्त है। स्थानीय धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता के आशीर्वाद के बिना चारधाम यात्रा को पूर्ण नहीं माना जाता। बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री की यात्रा पर जाने वाले कई श्रद्धालु मां धारी देवी के दर्शन को महत्वपूर्ण मानते हैं।

2013 की केदारनाथ आपदा से भी जोड़ी जाती है मान्यता

मां धारी देवी मंदिर से जुड़ी सबसे चर्चित मान्यताओं में से एक जून 2013 की केदारनाथ आपदा से संबंधित है। स्थानीय लोगों के बीच यह विश्वास प्रचलित है कि 2013 में एक जलविद्युत परियोजना से जुड़े निर्माण कार्य के दौरान मां धारी देवी की प्रतिमा को उसके मूल स्थान से हटाया गया था। इसी दौरान उत्तराखंड में विनाशकारी प्राकृतिक आपदा आई थी। स्थानीय मान्यता में दोनों घटनाओं के बीच संबंध जोड़ा जाता है और इसे मां धारी देवी के प्रकोप से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि, यह धार्मिक और स्थानीय मान्यता है, जिसका वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित संबंध स्थापित नहीं है।

आस्था के साथ पर्यटन का भी प्रमुख केंद्र

मां धारी देवी मंदिर आज धार्मिक आस्था के साथ उत्तराखंड के पर्यटन मानचित्र पर भी महत्वपूर्ण स्थान रखता है। अलकनंदा नदी, पहाड़ों और मंदिर का प्राकृतिक परिवेश श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करता है। राज्य सरकार की ओर से तीर्थस्थलों में सुविधाओं के विस्तार और बुनियादी ढांचे के विकास पर जोर दिए जाने के बीच मां धारी देवी मंदिर में बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या इसे उत्तराखंड के प्रमुख धार्मिक स्थलों में और महत्वपूर्ण बनाती है।

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