नई दिल्ली, 8 सितंबर: दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पांच मंजिला पीजी इमारत ढहने से सात लोगों की मौत और छह अन्य के घायल होने की घटना के बाद दिल्ली नगर निगम (MCD) ने राजधानी में इमारतों की सुरक्षा जांच को लेकर बड़ा कदम उठाया है। नगर निगम ने सभी जोन के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर्स (बिल्डिंग) को अपने-अपने क्षेत्रों में इमारतों का त्वरित निरीक्षण करने और 10 सितंबर तक विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।
सत्य निकेतन हादसे के बाद पुराने और जर्जर भवनों के साथ-साथ अवैध निर्माण और भवन सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में एमसीडी की यह कवायद राजधानी में संभावित रूप से खतरनाक इमारतों की पहचान करने के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
हाईकोर्ट में दाखिल होगा विस्तृत हलफनामा
सत्य निकेतन हादसे के बाद मामले में न्यायिक स्तर पर भी कार्रवाई आगे बढ़ रही है। एमसीडी की ओर से किए जा रहे नए निरीक्षण से जुटाए गए आंकड़ों को संकलित कर दिल्ली हाईकोर्ट में विस्तृत हलफनामा दाखिल किया जाएगा। नगर निगम को निरीक्षण के बाद प्राप्त जानकारी को तैयार कर निर्धारित समयसीमा के भीतर अदालत के सामने रखने के निर्देश हैं। मामले की अगली सुनवाई 25 सितंबर को होने वाली है।
पुराने सर्वे पर उठे सवाल
एमसीडी के नए सर्वे के आदेश के बीच इसी साल की शुरुआत में किए गए पुराने सर्वे के आंकड़े भी चर्चा में हैं। निगम के अनुसार, उस दौरान दिल्ली में करीब 27,84,286 इमारतों का निरीक्षण किया गया था। हैरानी की बात यह है कि इतने बड़े सर्वे में केवल 19 इमारतों को खतरनाक श्रेणी में चिह्नित किया गया था। सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत के ढहने की घटना के बाद अब इस आंकड़े को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या पुराने सर्वे में सभी संभावित जोखिम वाली इमारतों की सही तरीके से पहचान हो पाई थी।
क्या नया सर्वे जमीनी हकीकत सामने ला पाएगा?
राजधानी के कई इलाकों में घनी आबादी, संकरी गलियां और पुराने भवन बड़ी चुनौती हैं। वहीं, कोचिंग और पीजी हब वाले इलाकों में बड़ी संख्या में छात्र और किरायेदार रहते हैं। ऐसे क्षेत्रों में भवनों की संरचनात्मक सुरक्षा और नियमों के पालन की निगरानी बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
एमसीडी की ओर से अब दोबारा किए जा रहे निरीक्षण से यह पता चल सकेगा कि राजधानी में कितनी इमारतें वास्तव में जोखिम वाली स्थिति में हैं और कितनी जगहों पर भवन सुरक्षा मानकों का उल्लंघन हो रहा है।
हालांकि, नए सर्वे की समयसीमा काफी कम है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह निरीक्षण वास्तविक जमीनी जोखिम की पहचान कर पाएगा या फिर इसकी उपयोगिता मुख्य रूप से अदालत में दाखिल होने वाली रिपोर्ट तक सीमित रह जाएगी?
सत्य निकेतन हादसे ने बढ़ाई चिंता
सत्य निकेतन में पांच मंजिला पीजी इमारत गिरने की घटना ने राजधानी में छात्रों और किरायेदारों के लिए सुरक्षित आवास की व्यवस्था पर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। हादसे में सात लोगों की जान गई और छह अन्य घायल हुए।
घटना के बाद पुराने भवनों की संरचनात्मक मजबूती, पीजी संचालन, अवैध निर्माण और सुरक्षा मानकों की निगरानी को लेकर सवाल एक बार फिर सामने आए हैं।
अब एमसीडी के सामने चुनौती केवल इमारतों का सर्वे करने की नहीं, बल्कि खतरनाक भवनों की पहचान के बाद समय पर कार्रवाई सुनिश्चित करने की भी है। यही तय करेगा कि नए निरीक्षण का असर कागजी रिपोर्ट से आगे कितना दिखाई देता है।


