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केशव मौर्य का तंज-बिहार-बंगाल में भाजपा की जीत से अखिलेश की बढ़ी बेचैनी, भविष्य दिखने लगा धूमिल

केशव मौर्य का तंज-बिहार-बंगाल में भाजपा की जीत से अखिलेश की बढ़ी बेचैनी, भविष्य दिखने लगा धूमिल

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लखनऊ, 15 जून। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि बिहार में राजद और पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की करारी हार तथा भाजपा की ऐतिहासिक जीत ने उनके माथे की शिकन बढ़ा दी है। उन्होंने कहा कि सपा प्रमुख इतने निराश और हताश हो चुके हैं कि उन्हें उत्तर प्रदेश में अपनी पार्टी का भविष्य धूमिल नजर आने लगा है, जिसके चलते वे अवसाद में गैर-जिम्मेदाराना बयानबाजी कर धमकी की राजनीति पर उतर आए हैं।

यूपी के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि बिहार में राजद और पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की करारी शिकस्त तथा भाजपा की ऐतिहासिक जीत ने सपा बहादुर अखिलेश यादव के माथे की शिकन बढ़ा दी है। वे इतने निराश व हताश हैं कि उत्तर प्रदेश में उन्हें अपनी ‘जेबी’ सपा का भविष्य ‘धूमिल’ नजर आने लगा है। इसी अवसाद के कारण वे गैर-जिम्मेदाराना राग अलाप कर धमकी के मोड में आ जाते हैं।

उन्होंने लिखा कि भारत के मूल में लोकतंत्र है। यहां चुनाव किसी दल की इच्छा से नहीं, बल्कि संविधान के अनुसार हर पांच साल में होते हैं। जनता ही अंतिम निर्णायक है। 2047 के विकसित भारत के संकल्प के साथ भाजपा का कमल लगातार खिलता रहेगा, जबकि नकारात्मकता और हताशा की राजनीति सपा को और कमजोर करती रहेगी।

इससे पहले डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने एक एक्स पोस्ट में लिखा कि कांग्रेस के नेता राहुल गांधी 2029 के लिए मुंगेरी लाल के हसीन सपने देख रहे हैं जबकि देश 2047 के विकसित भारत के संकल्प के साथ तेजी से आगे बढ़ रहा है। जनता परिवारवाद, तुष्टिकरण और खोखले वादों की राजनीति की असलियत पहचान चुकी है। देश ने विकास, सुशासन और आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मजबूत एवं निर्णायक नेतृत्व पर बार-बार अपना अटूट विश्वास जताया है।

उन्होंने कहा कि आज कांग्रेस अपनी खोई हुई ‘सियासी ज़मीन’ तलाश रही है और सपा उत्तर प्रदेश में अपना अस्तित्व बचाने के लिए ‘हांफ’ रही है। जनता के बीच इन दोनों की पैठ इतनी कमज़ोर हो चुकी है कि अब न इनका कोई ठौर है, न ठिकाना। ऐसे में इनके द्वारा सत्ता की बातें करना बिल्कुल वैसा है, जैसे कोई बिना पतवार की फूटी नाव पर बैठकर समंदर जीतने का मुगालता पाले।

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