जम्मू-कश्मीर के सीएम उमर अब्दुल्ला का बड़ा आरोप- ‘NC तोड़ने की कोशिश कर रही भाजपा, 20-30 करोड़ का ऑफर’
श्रीनगर, 11 जुलाई। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शनिवार को यहां एक रैली में भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा BJP राज्य में सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) को तोड़कर उनकी सरकार गिराने की कोशिश कर रही है। हालिया महीनों में केंद्र सरकार को लेकर सॉफ्ट राजनीति करने का आरोप झेलने वाले उमर अब्दुल्ला ने यह भी कहा कि भाजपा चाहे कितनी भी कोशिश क्यों न कर ले, नेशनल कॉन्फ्रेंस का एक भी विधायक नहीं टूटेगा।
सीएम उमर अब्दुल्ला ने कहा, “नेशनल कांफ्रेंस को तोड़ने की कोशिशें की जा रही हैं। हमारे एक विधायक ने बताया है कि भाजपा की तरफ से 20 से 30 करोड़ का ऑफर आया है। पैसे और मंत्री पद का लालच काम न आने पर भाजपा अब बंद दरवाजों के पीछे मेरे विधायकों से कह रही है – ‘हमारे साथ आ जाओ और हम तुम्हें राज्य का दर्जा दिला देंगे’।”
‘भगवान गवाह है..विधायक ने भाजपा नेता का लिया नाम’
आगामी 20 जुलाई से नई दिल्ली में नया प्रदर्शन खड़ा करने की सोच रहे उमर अब्दुल्ला ने केंद्र के ऊपर जमकर अपनी भड़ास निकाली। विधायकों को मिले ऑफर की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि एक भाजपा नेता ने, जो सुप्रीम कोर्ट का वकील भी है, विधायकों को ऑफर दिया है। उन्होंने कहा, ‘भगवान गवाह है कि जम्मू के एक विधायक ने मुझे बताया कि भाजपा के एक पदाधिकारी ने, जो उच्चतम न्यायालय के वकील भी हैं, उनसे समर्थन मांगा और बदले में 20-30 करोड़ रुपये, एक मंत्री पद और राज्य का दर्जा देने की पेशकश की। उन्हें लगता है कि लोगों का भरोसा इतना कमजोर है।’

अब्दुल्ला ने कहा, ‘नेशनल कांफ्रेंस के विधायक खुद को नहीं बेचेंगे। उन्होंने कहा कि एक भी ऐसा विधायक नहीं है, जो 20 करोड़ या 100 करोड़ रुपये के लिए अपनी ईमानदारी बेच दे क्योंकि हम जानते हैं कि हमें भगवान को जवाब देना है। यह मत सोचिए कि हम इतने कमजोर हैं कि आप पिछले दरवाजे से सत्ता पर काबिज हो जाएंगे।’
केंद्र को दी धमकी – ‘मेरे सब्र को कमजोरी न समझें‘
उमर अब्दुल्ला ने राज्य के दर्जे को लेकर नई दिल्ली में प्रस्तावित धरना प्रदर्शन को लेकर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि वह राज्य के दर्जे को लेकर धैर्य रखे हुए हैं। लेकिन उनके धैर्य को उनकी कमजोरी न समझा जाए। उन्होंने कहा, ‘हमें धैर्य रखना होगा जैसा कि उन्होंने (लद्दाख) रखा था। धैर्य रखना कमजोरी नहीं है और इसका मतलब यह भी नहीं कि हम चुप रहें। इसका मतलब यह नहीं है कि हमें अपने अधिकारों के लिए आवाज नहीं उठानी चाहिए। इसका मतलब यह नहीं है कि आप हमारे सब्र का नाजायज फायदा उठाएं। इसका मतलब यह नहीं है कि आप हमें कमजोर समझें। यह सब्र ही हमारी ताकत है, यही हमारी आवाज है और ईश्वर ने चाहा तो यही सब्र हमारी कामयाबी का जरिया बनेगा।’
‘केंद्र बताए कि हमें जंतर मंतर पर प्रदर्शन की जरूरत क्यों पड़ी’
जंतर मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन के लिए उमर अब्दुल्ला ने केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को खुद से यह सवाल पूछना चाहिए कि सत्ता में आए डेढ़ साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद जम्मू-कश्मीर की सत्तारूढ़ पार्टी (नेशनल कॉन्फ्रेंस) को जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन करने की जरूरत क्यों पड़ रही है। उन्होंने कहा, ‘जरूर कोई मजबूरी रही होगी। कुछ तो हुआ होगा। मैंने अपने राजनीतिक भविष्य और प्रतिष्ठा को दांव पर लगाकर केंद्र से कहा कि हम हिंसा के बजाय बातचीत के जरिए अपने अधिकार हासिल करना चाहते हैं, जबकि मुझे पता था कि यह फैसला मेरे राजनीतिक करिअर के लिए बहुत जोखिम भरा हो सकता है।’
काम नहीं करने दे रहे तो सरकार का क्या फायदा?
मुख्यमंत्री ने कहा कि विधानसभा चुनावों में उनकी पार्टी की जीत जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए एक ‘सजा’ बन गई है। उन्होंने कहा, “अगर आप सरकार को काम नहीं करने देंगे तो आपने हमें सरकार बनाने ही क्यों दी? इसका क्या फायदा? तब तो आपको चुनाव ही नहीं करवाने चाहिए थे।”
उन्होंने भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर उप राज्यपाल के जरिए जम्मू-कश्मीर में शासन-व्यवस्था पर नियंत्रण करने का आरोप लगाया और कहा, ‘अगर आपको राजभवन के जरिए लोगों को परेशान करना था, कर्मचारियों को नौकरी से निकालना था और बुलडोजर चलवाना था तो फिर आप हमें आगे क्यों लाए? उन्हें उस समय ही हमें बता देना चाहिए था कि आप आगे आइए, लेकिन हम आपके हाथ पीछे बांध देंगे। हम आपको ऐसे अधिकारी देंगे जो (आपके) फैसलों को लागू नहीं करेंगे। यह हमारा सब्र ही है कि हम अब भी जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए कुछ हासिल करने के वास्ते रात-दिन काम कर रहे हैं।’
20 जुलाई से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की तैयारी
गौरतलब है कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर से राज्य का दर्जा भी छीन लिया था और उसे दो हिस्सों में बांट दिया था। इसके बाद से कश्मीर की सुरक्षा व्यवस्था सीधे गृह मंत्रालय के आधीन आ गई थी। इसके बाद केंद्र ने राज्य में चुनाव करवाए। इस चुनाव में नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार बनाने में कामयाब रही। इसके बाद उमर अब्दुल्ला और केंद्र सरकार के बीच रिश्ते थोड़े बेहतर होते नजर आए। हालांकि, हाल ही में केंद्र द्वारा बार-बार नजरअंदाज किए जाने का आरोप लगाकर उमर अब्दुल्ला ने प्रदर्शन का एलान कर दिया। नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता के अनुसार उनकी पार्टी अपने तमाम राजनीतिक साथियों के साथ मिलकर 20 जुलाई से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करेगी।
