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पासपोर्ट विवाद : कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा अग्रिम जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचे, गुवाहाटी हाई कोर्ट से लगा था झटका

पासपोर्ट विवाद : कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा अग्रिम जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचे, गुवाहाटी हाई कोर्ट से लगा था झटका

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नई दिल्ली, 26 अप्रैल। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां से जुड़े पासपोर्ट को लेकर दिए गए विवादित बयान से बुरी तरह फंसे कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने मानहानि व जालसाजी के मामले में अग्रिम जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट में अर्जी लगाई है।

पवन खेड़ा ने गुवाहाटी उच्च न्यायालय द्वारा उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। असम पुलिस ने उनके खिलाफ यह मामला दर्ज किया था। गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने 24 अप्रैल को गुवाहाटी में असम पुलिस की क्राइम ब्रांच द्वारा खेड़ा के खिलाफ दर्ज मामले में उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी।

रिंकी भुइयां पर पासपोर्ट को लेकर लगाए थे गंभीर आरोप

दरअसल, खेड़ा ने असम विधानसभा के चुनावी माहौल में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दावा किया था कि असम की मुख्यमंत्री की पत्नी रिंकी भुइयां के पास कई विदेशी पासपोर्ट और विदेशों में अघोषित संपत्तियां हैं। इसके बाद ही पवन खेड़ा के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।

एडवोकेट जनरल ने पवन खेड़ा पर लगाए गंभीर आरोप

पिछली सुनवाई के दौरान, अभिषेक मनु सिंघवी के नेतृत्व में खेड़ा के वकील ने तर्क दिया कि उनके भागने का कोई खतरा नहीं है और गिरफ्तारी अनावश्यक है। साथ ही उन्होंने इस मामले को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया।

वहीं असम सरकार का प्रतिनिधित्व करते हुए एडवोकेट जनरल देवजीत लोन सैकिया ने खेड़ा को राहत का विरोध करते हुए तर्क दिया कि यह मामला केवल मानहानि का नहीं बल्कि धोखाधड़ी और जालसाजी सहित गंभीर अपराधों से संबंधित है। दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलों के बाद अदालत ने पहले अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

सुप्रीम कोर्ट में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की दलील

असम पुलिस की ओर से पेश होते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तेलंगाना उच्च न्यायालय में दायर याचिका की वैधता पर सवाल उठाते हुए इसे क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र का स्पष्ट अभाव बताया। उन्होंने कहा कि एफआईआर असम में दर्ज की गई थी और खेड़ा ने यह स्पष्ट नहीं किया कि वह वहां अग्रिम जमानत क्यों नहीं मांग सकते।

मेहता ने यह भी बताया कि खेड़ा ने तेलंगाना में अग्रिम जमानत मांगी थी जबकि उन्होंने राज्य में अपनी उपस्थिति स्पष्ट रूप से साबित नहीं की थी। उन्होंने कहा कि केवल कुछ संपत्ति होने से अधिकार क्षेत्र प्राप्त नहीं हो जाता। उन्होंने बेंच को बताया कि यह प्रक्रिया का पूर्ण दुरुपयोग और न्यायालय चुनने का मामला है।

तेलंगाना हाईकोर्ट ने दी थी राहत, असम सरकार ने आदेश को दी थी चुनौती

गौरतलब है कि तेलंगाना उच्च न्यायालय ने इससे पहले खेड़ा को एक सप्ताह के लिए सीमित पारगमन अग्रिम जमानत दी थी। न्यायालय ने पाया कि उनकी गिरफ्तारी की आशंका ‘उचित और रिकॉर्ड में मौजूद सबूतों से समर्थित’ प्रतीत होती है। हाई कोर्ट ने साथ ही जांच में सहयोग करने और जांच को प्रभावित कर सकने वाले सार्वजनिक बयानों से परहेज करने जैसी शर्तें भी लगाईं। फिर असम सरकार ने इस आदेश को चुनौती देते हुए तर्क दिया कि खेड़ा ने असम की अदालतों को दरकिनार करने का कोई ठोस कारण नहीं बताया है, जहां मामला दर्ज किया गया था।

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