मध्य पूर्व तनाव : ईरानी विदेश मंत्री अराघची से जयशंकर की वार्ता, संपर्क में बने रहने पर सहमति
नई दिल्ली, 29 अप्रैल। मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने बुधवार की शाम भारतीय समकक्ष डॉ. एस जयशंकर से टेलीफोन पर बातचीत की। इस वार्ता में क्षेत्रीय हालात और मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियों के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। दोनों नेताओं ने आगे भी लगातार संपर्क बनाए रखने पर सहमति जताई।
विदेश मंत्री जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि बातचीत में मौजूदा परिस्थितियों के कई पहलुओं पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों ने संवाद जारी रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।
Received a phone call from Foreign Minister Seyed Abbas Araghchi of Iran this evening. @araghchi
Had a detailed conversation about various aspects of the current situation. We agreed to remain in close touch.
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) April 29, 2026
मध्य पूर्व में सक्रिय कूटनीति
उल्लेखनीय है कि अमेरिका से समझौता वार्ता के क्रम में अराघची हाल के दिनों में पाकिस्तान, ओमान और रूस के दौरे पर रहे हैं। इस क्रम में वह 48 घंटे के भीतर तीन बार पाकिस्तान दौरे पर पहुंचे। इन यात्राओं के दौरान उन्होंने मध्य पूर्व के हालात और विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े तनावपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की।
ओमान में क्षेत्रीय स्थिरता पर जोर
ओमान में अराघची ने सुल्तान हैथम बिन तारिक अल सईद और विदेश मंत्री बदर बिन हमद अल बुसैदी से मुलाकात की। उन्होंने सुरक्षित समुद्री ट्रांजिट और क्षेत्रीय सहयोग को प्राथमिकता बताते हुए कहा कि इससे न केवल पड़ोसी देशों बल्कि वैश्विक समुदाय को भी लाभ होगा।
रूस में पुतिन से मुलाकात, समर्थन की मांग
अपने दौरे के अंतिम चरण में अराघची ने सेंट पीटर्सबर्ग में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की। इस दौरान द्विपक्षीय संबंधों, क्षेत्रीय हालात और अमेरिका तथा इजराइल से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। रूसी समाचार एजेंसी के अनुसार, पुतिन ने शांति बहाली के लिए हरसंभव प्रयास करने का भरोसा दिया और ईरान के साथ संबंध मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
इस पूरी कूटनीतिक गतिविधि को ऐसे समय में अहम माना जा रहा है, जब मध्य पूर्व में तनाव बना हुआ है और वैश्विक स्तर पर स्थिरता बनाए रखने के लिए प्रमुख देशों के बीच संवाद लगातार बढ़ रहा है।
