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यूपी में बसपा के इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह का निधन, दिल्ली के फोर्टिस अस्पताल में ली अंतिम सांस

यूपी में बसपा के इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह का निधन, दिल्ली के फोर्टिस अस्पताल में ली अंतिम सांस

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बलिया, 5 अगस्त। उत्तर प्रदेश में बलिया जिले की रसड़ा विधानसभा सीट से बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह का बुधवार को निधन हो गया। ब्रेन ट्यूमर से पीड़ित 55 वर्षीय उमाशंकर का दिल्ली के फोर्टिस अस्पताल में इलाज चल रहा था, जहां उन्होंने शाम को अंतिम सांस ली।

उमाशंकर सिंह के निधन की खबर मिलते ही बलिया समेत पूरे पूर्वांचल में शोक की लहर दौड़ गई। उनके समर्थकों और शुभचिंतकों में दुख का माहौल है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, बसपा प्रमुख मायावती और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव समेत कई नेताओं ने उनके निधन पर शोक जताया है।

उमाशंकर को राखी बांधती थीं बसपा प्रमुख मायावती

बसपा के कद्दावर नेताओं में शुमार उमाशंकर सिंह वस्तुतः पार्टी अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के बेहद करीबी माने जाते थे। इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है कि मायावती उन्हें अपने भाई का दर्जा देते हुए उन्हें राखी बांधती थीं।

मायावती ने परिवार को दिया भावुक संदेश

इस बीच बसपा प्रमुख मायावती ने उमाशंकर सिंह को बसपा का कर्मठ, ईमानदार और पूरी तरह से वफादार नेता बताते हुए उनके निधन की खबर को अत्यंत दुखद करार दिया। सोशल मीडिया प्लेटफार्म ‘एक्स’ पर अपने संदेश में मायावती ने लिखा – ‘उनके परिवार तथा उनके सभी चाहने वालों के प्रति मेरी गहरी शोक संवेदना। पार्टी के प्रति उनकी निष्ठा की जितनी भी तारीफ की जाये वह कम है। उनका पूरा परिवार बसपा परिवार की तरह है। उनके परिवार के सभी लोग मुझे बड़ी बहन की तरह ही पूरा आदर-सम्मान देते हैं।’

मायावती ने आगे लिखा – ‘उनके पुत्र से लगातार सम्पर्क बने रहने के दौरान ही आज शाम उनके देहांत की ख़बर उनके पुत्र से ही मिली। इस दुख की घड़ी में मैं और पूरी पार्टी उनके और उनके परिवार के साथ है। उन्हें किसी भी प्रकार से हिम्मत नहीं हारना है बल्कि इस परिस्थिति का सामना करते हुए आगे बढ़ना है। कुदरत उन सभी लोगों को इस दुख को सहन करने की शक्ति दे।’

आकाश आनंद ने भी जताया गहरा दुख

वहीं मायावती के भतीजे आकाश आनंद ने भी विधायक उमाशंकर सिंह के निधन पर गहरा दुख जताया है। आकाश आनंद ने ‘एक्स’ पर लिखा – ‘बहुजन समाज पार्टी के वरिष्ठ साथी और उत्तर प्रदेश विधानसभा में पार्टी की सशक्त आवाज़, आदरणीय श्री उमाशंकर सिंह जी के निधन का समाचार अत्यंत पीड़ादायक है। उनका जाना केवल बसपा परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि समाज के वंचित, शोषित और जरूरतमंद लोगों के लिए भी एक अपूरणीय क्षति है। बीमारी से संघर्ष करते हुए भी उन्होंने जिस साहस और समर्पण के साथ अपने लोगों और पार्टी के प्रति अपना दायित्व निभाया, वह सदैव स्मरणीय रहेगा। आज हमने एक जनप्रतिनिधि ही नहीं, बहुजन मिशन का एक समर्पित सिपाही खो दिया है। इस दुःख की घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिवार, समर्थकों और शुभचिंतकों के साथ हैं। प्रकृति उनके परिजनों को इस असहनीय दुःख को सहने की शक्ति प्रदान करे।’

सीएम योगी ने जताया शोक

इस बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बसपा विधायक के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा, ‘जनपद बलिया के रसड़ा विधानसभा क्षेत्र से माननीय विधायक उमाशंकर सिंह जी का आकस्मिक निधन अत्यंत दुःखद है। मेरी संवेदनाएं शोक संतप्त परिजनों के साथ हैं। प्रभु श्री राम से प्रार्थना है कि दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्री चरणों में स्थान एवं शोकाकुल परिजनों को यह अथाह दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करें।

अखिलेश यादव ने भी जताया शोक

समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी उमाशंकर सिंह के निधन पर श्रद्धांजलि दी। उन्होंने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, ‘बलिया की रसड़ा विधानसभा से बसपा के विधायक उमाशंकर सिंह जी का निधन, अत्यंत दुखद। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दें।’

प्रारंभिक जीवन और परिवार

उमाशंकर सिंह का जन्म 2 जनवरी, 1971 को उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के रसड़ा क्षेत्र स्थित खनवर गांव में हुआ। उनके पिता घुराहु सिंह भारतीय सेना से सेवानिवृत्त पूर्व सैन्यकर्मी थे। पारिवारिक संस्कारों और अनुशासित वातावरण ने ही उनके व्यक्तित्व और सार्वजनिक जीवन को मजबूत आधार प्रदान किया।

रसड़ा से तीन बार विधायक निर्वाचित हुए 

उमाशंकर सिंह ने पहली बार 2012 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में रसड़ा विधानसभा सीट से जीत दर्ज कर विधानसभा में प्रवेश किया। हालांकि उन्होंने लाभ के पद से जुड़े मामले में विधानसभा सदस्यता गंवानी पड़ी थी, लेकिन बाद में उनकी सदस्यता बहाल कर दी गई थी और उन्होंने फिर से राजनीतिक गतिविधियां जारी रखीं। इसके बाद उन्होंने 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में भी लगातार विजय हासिल कर अपनी राजनीतिक पकड़ और मजबूत की। 2022 की उनकी जीत तो ऐतिहासिक थी क्योंकि वह जीत हासिल करने वाले बसपा के इकलौते विधायक थे।

देखा जाए तो लगातार तीन बार जनता का विश्वास प्राप्त करना उनके क्षेत्र में मजबूत जनाधार और लोकप्रियता का प्रमाण माना जाता है। देखा जाए तो उमाशंखर सिंह के निधन से पार्टी को बहुत बड़ी क्षति हुई है। मौत की सूचना मिलते ही उनके आवास पर समर्थकों की भीड़ जुटने लगी।

बसपा के संगठनात्मक ढांचे में उनका विशेष स्थान था

देखा जाए तो उमाशंकर सिंह की राजनीतिक यात्रा आसान नहीं थी। बलिया के नगरा क्षेत्र के खनवर गांव से निकलकर उन्होंने अपने दम पर ऐसा जनाधार बनाया कि रसड़ा विधानसभा उनकी राजनीतिक कर्मभूमि बन गई। बसपा के संगठनात्मक ढांचे में उनका विशेष स्थान था और पार्टी सुप्रीमो मायावती के विश्वासपात्र नेताओं में उनकी गिनती होती थी। यही कारण था कि प्रदेश में बसपा के लगातार कमजोर होते जनाधार के बीच भी वह अपनी सीट बचाए रखने में सफल रहे।

सामाजिक कार्यों से भी बनाई पहचान

राजनीति के साथ-साथ उमाशंकर सिंह व्यवसाय (ठेकेदारी) और सामाजिक कार्यों से भी जुड़े रहे हैं। छात्र शक्ति कंस्ट्रक्शन नाम की कम्पनी स्थापित कर उन्होंने ठेकेदारी में लंबा सफर तय किया। अपने विधानसभा क्षेत्र में लोगों की समस्याओं के समाधान, जनसंपर्क और सक्रिय कार्यशैली के कारण उन्होंने एक अलग पहचान बनाई है। स्थानीय स्तर पर उन्हें एक कद्दावर, प्रभावशाली और मददगार नेता के रूप में देखा जाता है। क्षेत्र में उनकी लोकप्रियता का आधार जनता के बीच लगातार सक्रिय रहना और विकास से जुड़े मुद्दों पर काम करना माना जाता है।

सामूहिक रूप से 251 जोड़ों की शादी कराने के साथ सुर्खियां बटोरी थीं

उमाशंकर सिंह की समाज सेवा की बात करें तो एक बार सामूहिक रूप से 251 जोड़ों की शादी कराने के बाद वह प्रदेशभर में चर्चा के विषय बन गए थे। उसके बाद उन्होंने पुनः 351 जोड़ों की शादी कराकर विधानसभा सहित प्रदेशभर में वाहवाही लूटी। उन्होंने विधानसभा क्षेत्र सहित जनपद के बाहर भी समाज सेवा कर अपनी एक अलग पहचान बनाई थी।

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