इंस्टाग्राम पर बच्चों के आपत्तिजनक विज्ञापन मामले में NHRC सख्त, दिल्ली पुलिस कमिश्नर को किया तलब

नई दिल्ली, 5 अगस्त। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़े विज्ञापनों के मामले में सख्त रुख अपनाया है और दिल्ली पुलिस कमिश्नर को समन जारी करते हुए उन्हें सात सितम्बर को पेश होने का आदेश दिया है।

बीबीसी वर्ल्ड सर्विस की एक रिपोर्ट से जुड़ा है यह मामला

यह मामला बीबीसी वर्ल्ड सर्विस की एक रिपोर्ट से जुड़ा है। रिपोर्ट में कहा गया था कि इंस्टाग्राम पर ‘रेप वीडियो’ और ‘चाइल्ड वीडियो’ जैसे शब्दों वाले पेड विज्ञापन दिखाए जा रहे थे। इन विज्ञापनों पर क्लिक करने पर यूजर्स को टेलीग्राम के चैनलों पर भेजा जा रहा था, जहां चाइल्ड सेक्सुअल अब्यूज मटेरियल (सीएसएएम) बेचा जा रहा था।

नोटिस व रिमाइंडर की अनदेखी के बाद आयोग ने भेजा समन

एनएचआरसी ने इस खबर को खुद संज्ञान में लिया था। आयोग ने गत आठ जुलाई को दिल्ली पुलिस कमिश्नर को नोटिस भेजकर 15 दिनों में एक्शन टेकन रिपोर्ट मांगी थी। 15 दिन बाद भी जब रिपोर्ट नहीं आई तो एनएचआरसी ने 29 जुलाई को रिमाइंडर भेजा और सात दिनों का और समय दिया। चेतावनी भी दी कि यदि रिपोर्ट नहीं आई तो सख्त कदम उठाए जाएंगे।

लेकिन तय समय में भी रिपोर्ट नहीं पहुंची। इसके बाद बुधवार को एनएचआरसी के सदस्य प्रियांक कानूनगो की बेंच ने इसे ‘बहुत गंभीर’ मानते हुए दिल्ली पुलिस कमिश्नर को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का समन जारी किया है। आदेश में कहा गया है कि कमिश्नर सात सितम्बर को पूर्वाह्न 11.30 बजे मानव अधिकार भवन, नई दिल्ली में रिपोर्ट और देरी की वजह के साथ पेश हों।

आदेश का पालन नहीं हुआ तो सीपीसी के नियम 16 के तहत होगी काररवाई

हालांकि आयोग ने यह भी कहा कि यदि 31 अगस्त तक रिपोर्ट भेज दी जाती है तो व्यक्तिगत पेशी की जरूरत नहीं होगी। समन में चेतावनी दी गई है कि यदि बिना वजह आदेश का पालन नहीं हुआ तो सीपीसी के नियम 16 के तहत काररवाई की जाएगी।

एनएचआरसी ने कहा कि यदि ये आरोप सच हैं तो यह बच्चों के ऑनलाइन यौन शोषण, सीएसएएम के प्रचार और बिक्री और संगठित अपराध का मामला है। इससे सोशल मीडिया कम्पनियों की जिम्मेदारी और बच्चों की सुरक्षा के सिस्टम पर भी सवाल उठते हैं। आयोग ने कहा कि इस मामले की जांच पोक्सो एक्ट, आईटी एक्ट और डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट 2023 के तहत होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए एनएचआरसी ने कहा कि सोशल मीडिया कम्पनियों की जिम्मेदारी है कि वे पोक्सो से जुड़े अपराधों की जानकारी स्पेशल जुवेनाइल पुलिस यूनिट या लोकल पुलिस और एनसीएमईसी को तुरंत दें।

एनएचआरसी ने दिल्ली पुलिस को इस मामले की जल्द जांच कर रिपोर्ट देने को कहा है। इसमें डिजिटल सबूत सुरक्षित रखना, पीड़ित बच्चों और आरोपियों की पहचान करना, मेटा और अन्य कम्पनियों द्वारा पोक्सो की धारा 19 और 20 के तहत रिपोर्टिंग की जानकारी, जरूरी जगहों पर एफआईआर दर्ज करना, विज्ञापनों के पीछे के लेन-देन ट्रेस करना और पीड़ित बच्चों को बचाने एवं मदद के कदम शामिल हों। आयोग ने यह भी कहा कि पुलिस जांच करे कि मेटा और उसके जिम्मेदार अधिकारियों ने रिपोर्टिंग की अनिवार्य जिम्मेदारी निभाई या नहीं। यदि चूक मिली तो कानून के मुताबिक काररवाई की जाए।

 

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