पीएम मोदी को लेकर राहुल गांधी के तंज पर भाजपा का पलटवार : इंदिरा गांधी के वीडियो से दिया जवाब

नई दिल्ली, 14 अगस्त। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक दिन पहले रचनात्मक कांग्रेस सम्मेलन में मोदी सरकार व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर तीखे प्रहार किए थे और विदेशी दौरों पर समकक्ष नेताओं से पीएम मोदी की भेंट-मुलाकात का मजाक उड़ाते हुए उनकी विदेश नीति पर ही सवाल खड़े कर दिए थे।

अब कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के इस तौर-तरीके पर शुक्रवार को भाजपा नेताओं ने सवाल खड़े करते हुए उनपर जोरदार पलटवार किया और दिवंगत पूर्व पीएम इंदिरा गांधी की विदेशी नेताओं से मुलाकात के वीडियो से करारा जवाब दिया है।

निशिकांत दुबे ने तो राहुल की मानसिक स्थिति पर ही सवाल उठा दिए

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने तो राहुल गांधी की मानसिक स्थिति पर ही सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने इंदिरा गांधी की क्यूबा के पूर्व राष्ट्रपति फिदेल कास्त्रो और फिलिस्तीनी नेता यासर अराफात के साथ तस्वीरें शेयर कर राहुल गांधी पर निशाना साधा।

निशिकांत दुबे से लेकर भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज, केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी और गिरिराज सिंह समेत कई नेताओं ने राहुल गांधी की कड़ी आलोचना की है। यू कहें कि भाजपा की पूरी फौज ने ही पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

राहुल ने संदीप दीक्षित को गले लगाकर समझाया था मौजूदा सरकार की विदेश नीति का मतलब

गौरतलब है कि दिल्ली के मावलंकर हाल में गुरुवार को रचनात्मक कांग्रेस के राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा था, ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन में कहीं न कहीं यह बात बैठ गई है कि विदेश नीति का मतलब नेताओं को गले लगाना है। इसके बाद राहुल गांधी ने संदीप दीक्षित को गले लगाकर दिखाया कि मौजूदा सरकार के लिए आज विदेश नीति का क्या मतलब है?

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निशिकांत ने इंदिरा गांधी का वीडियो-फोटो शेयर कर राहुल से पूछा सवाल

अब भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने भारत के प्रधानमंत्री के तौर पर क्यूबा यात्रा के दौरान इंदिरा गांधी का एक वीडियो शेयर किया। इस वीडियो में इंदिरा गांधी से क्यूबा के राष्ट्रपति फिडेल कास्त्रो गले मिल रहे हैं। निशिकांत दुबे ने इस वीडियो-फोटो को शेयर करते हुए पूछा कि राहुल गांधी आप बताएं इसे गले पड़ने को जठराग्नि कहते हैं कि कामाग्नि?

इसके साथ ही निशिकांत दुबे ने आठ वर्ष पहले लोकसभा में राहुल गांधी के पीएम मोदी को गले लगाने वाली वायरल तस्वीर भी शेयर की और कैप्शन लिखा, ‘राहुल गांधी जी, क्या इसे दम घुटने जैसा एहसास या ‘गैस्ट्रिक फायर’ कहते हैं, या फिर यह हवस की आग है?’

स्मृति ईरानी ने नाम लिए बिना साधा निशाना

वहीं पूर्व केंद्रीय मंत्री व भाजपा नेता स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी का नाम लिए बगैर उन पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि ऊंचाई तक पहुंच न पाए, अभद्र व्यवहार करते हैं, तर्कों से जो हार गए, मर्यादा तार-तार करते हैं।

पीएम मोदी पर अशोभनीय टिप्पणियां करना बेहद अपमानजक : विनोद तावड़े

राज्यसभा सांसद और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े ने एक्स पर लिखा, ‘देश के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा एक संप्रभु देश की राष्ट्रध्यक्ष और भारतीय प्रधानमंत्री पर अशोभनीय टिप्पणियां करना बेहद अपमानजक है। भारतीय विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को लेकर ऐसा आचरण भारतीय राजनीति को शर्मसार करने वाला है।

बांसुरी स्वराज बोलीं – वे हल्की और छिछोरी बातें कर रहे थे

भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने कहा राहुल गांधी विपक्ष के नेता कम और एक फेल स्टैंड-अप कॉमेडियन ज्यादा लग रहे थे। वे हल्की और छिछोरी बातें कर रहे थे। उनकी भाषा विपक्ष के नेता से अपेक्षित गरिमा के खिलाफ थी। पीएम मोदी के खिलाफ राहुल गांधी ने जिस तरह की असभ्य, अश्लील और अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया है, वह विपक्ष के नेता जैसे संवैधानिक पद की गरिमा के पूरी तरह खिलाफ है।

कांग्रेस के वंशवादी नेतृत्व ने फिर पार कर दीं शालीनता की सारी हदें – हिमंत

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भी राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए एक्स पर लिखा, ‘कांग्रेस के वंशवादी नेतृत्व ने एक बार फिर शालीनता की सारी हदें पार कर दी हैं। एक मित्र देश की महिला राष्ट्राध्यक्ष के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी की गई जबकि मंच पर और दर्शकों में मौजूद महिलाएं भी उस पर हंसती रहीं। यह केवल राजनीतिक अशिष्टता नहीं बल्कि भारत के विदेश संबंधों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश भी है। जब महिलाओं का अपमान मनोरंजन का जरिया बन जाए तो इससे उस संस्कृति के बारे में बहुत कुछ पता चलता है, जिसे बढ़ावा दिया जा रहा है।’

प्रह्लाद जोशी बोले – राहुल गांधी में हताशा, निराशा और मायूसी साफ तौर पर देखी जा सकती है

केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने राहुल गांधी की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ‘राहुल गांधी में हताशा, निराशा और मायूसी साफ तौर पर देखी जा सकती है। जब परीक्षा का पेपर लीक होने और जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के मुद्दों पर चर्चा की मांग उठी तो विपक्ष भाषण सुनने के लिए भी तैयार नहीं था।’

जोशी ने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए प्रधानमंत्री के खिलाफ राहुल गांधी जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल करते हैं, उसे देखिए। विरोधी नेताओं की आलोचना करते समय हमेशा एक बुनियादी शिष्टाचार और सभ्य भाषा का इस्तेमाल किया जाता रहा है, चाहे वह प्रधानमंत्री हों या विपक्ष के नेता। उन्होंने उस शिष्टाचार को पूरी तरह से छोड़ दिया है क्योंकि उनमें इसकी कमी है।

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