1. Home
  2. देश-विदेश
  3. अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्णकांता को लिखा पत्र, कहा- अब आपसे न्याय की उम्मीद नहीं
अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्णकांता को लिखा पत्र, कहा- अब आपसे न्याय की उम्मीद नहीं

अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्णकांता को लिखा पत्र, कहा- अब आपसे न्याय की उम्मीद नहीं

0
Social Share

नई दिल्ली, 27 अप्रैल। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्णकांता को एक पत्र लिखकर बड़ा फैसला जाहिर किया है। उन्होंने कहा कि उन्हें अब जस्टिस स्वर्णकांता से न्याय मिलने की उम्मीद नहीं रही, इसलिए वे न तो खुद अदालत में पेश होंगे और न ही अपने वकील को भेजेंगे। अपने पत्र में केजरीवाल ने स्पष्ट किया कि उन्होंने यह निर्णय अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनकर लिया है। उन्होंने महात्मा गांधी के सत्याग्रह का हवाला देते हुए कहा कि अब वे कानूनी लड़ाई के बजाय नैतिक और वैचारिक विरोध का रास्ता अपनाएंगे।

केजरीवाल ने यह भी संकेत दिया कि उनका यह कदम न्याय व्यवस्था के खिलाफ नहीं, बल्कि अपने सिद्धांतों के समर्थन में है। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि यदि जस्टिस स्वर्णकांता कोई फैसला सुनाती हैं, तो उसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने का अधिकार वे अपने पास सुरक्षित रखेंगे। गौरतलब है कि इससे पहले 20 अप्रैल को दिल्ली हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा ने अरविंद केजरीवाल की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें उन्होंने दिल्ली आबकारी नीति मामले की सुनवाई से न्यायमूर्ति को खुद को अलग करने की मांग की थी। अपना निर्णय सुनाते हुए न्यायमूर्ति शर्मा ने स्पष्ट किया कि याचिका पर विचार किए बिना सुनवाई से पीछे हट जाना एक आसान विकल्प होता, किंतु उन्होंने संस्थागत शुचिता और गरिमा को सर्वोपरि रखते हुए मामले के गुण-दोष के आधार पर निर्णय लेना उचित समझा।

उन्होंने उल्लेख किया कि जब उन्होंने अपना फैसला पढ़ना शुरू किया, तो न्यायालय कक्ष में पूर्ण निस्तब्धता (सन्नाटा) छा गई थी। न्यायमूर्ति ने आगे कहा कि उनके समक्ष यह केवल एक कानूनी प्रश्न नहीं था, बल्कि एक ऐसी चुनौती थी जिसने न्यायाधीश और न्यायिक संस्था, दोनों को ‘परीक्षण’ की कसौटी पर खड़ा कर दिया था। दिल्ली हाईकोर्ट ने इस बात को दोहराते हुए कहा था कि जब तक ठोस सबूतों से खंडन न हो जाए, न्यायाधीश की निष्पक्षता को मान लिया जाता है और किसी वादी की महज आशंका या व्यक्तिगत धारणा के आधार पर न्यायाधीश को मामले से अलग नहीं किया जा सकता है।

न्यायमूर्ति शर्मा ने कहा कि किसी वादी को ऐसी स्थिति उत्पन्न करने की अनुमति नहीं दी जा सकती, जिससे न्यायिक प्रक्रिया का स्तर गिरे। झूठ, चाहे अदालत में या सोशल मीडिया पर, हजार बार दोहराया जाए, सच नहीं बनता। केजरीवाल द्वारा लगाए गए आरोपों का जवाब देते हुए न्यायाधीश ने कहा कि पक्षपात के दावों को साबित करने के लिए कोई सबूत नहीं है, जिनमें अधिवक्ता परिषद द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में उनकी भागीदारी या उनके परिवार के सदस्यों की पेशेवर व्यस्तता से संबंधित आरोप भी शामिल हैं।

Join our WhatsApp Channel

And stay informed with the latest news and updates.

Join Now
revoi whats app qr code