शत्रुघ्न सिन्हा ने ममता बनर्जी के प्रति दोहराई निष्ठा, बोले- ‘उन्होंने मुसीबत में मेरा साथ दिया था, मैं TMC में ही रहूंगा’

कोलकाता, 11 जून। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की डेढ़ दशक से चली आ रही सत्ता छिनते ही पार्टी जहां छिन्न-भिन्न होती नजर आ रही है और विधायक से लेकर सांसद तक लगातार ममता बनर्जी का साथ छोड़ने लगे हैं वहीं अभिनेता से नेता बने शत्रुघ्न सिन्हा ने टीएमसी प्रमुख के प्रति अपनी निष्ठा दोहराते हुए गुरुवार को कहा कि वह मुश्किल समय में ममता बनर्जी का साथ नहीं छोड़ेंगे।

‘मेरा नैतिक और राजनीतिक दायित्व है कि मैं उनके साथ खड़ा रहूं’

कभी भाजपा के कद्दावर नेता माने जाने वाले शत्रुघ्न ने मीडिया से बातचीत में कहा कि जब वह अपने जीवन के एक कठिन दौर से गुजर रहे थे, तब ममता बनर्जी उनके साथ मजबूती से खड़ी रहीं थीं। अब उनका कर्तव्य है कि वह भी पार्टी और उसके नेतृत्व के साथ खड़े रहें। शत्रुघ्न ने कहा, ‘मेरे मुश्किल समय में तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी मेरे साथ खड़ी रहीं। ऐसे समय में मेरा नैतिक और राजनीतिक दायित्व है कि मैं उनके साथ खड़ा रहूं।’

ममता बनर्जी एक जुझारू नेता हैं’

हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों और पार्टी के भीतर उभरी चुनौतियों के बीच सिन्हा ने स्पष्ट किया कि वह किसी भी बागी गुट का हिस्सा नहीं बनने जा रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘मैं उन लोगों का आभारी हूं, जिन्होंने मुझे तृणमूल कांग्रेस के बागी गुट में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया। लेकिन मेरा सैद्धांतिक रुख यह है कि मुझे इस समय ममता बनर्जी के साथ खड़े रहना चाहिए।’

41% मत पाने वाली नेता को कमजोर नहीं आंका जाना चाहिए

आसनसोल से टीएमसी सांसद ने यह भी कहा कि चुनावी नतीजों के आधार पर ममता बनर्जी की राजनीतिक ताकत को कम करके नहीं आंका जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘ममता बनर्जी एक जुझारू नेता हैं। उन्हें अब भी 41 प्रतिशत मत मिले हैं, जो यह दिखाता है कि राज्य में उनका जनाधार पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।’

राजनीति केवल सत्ता का खेल नहीं..सिद्धांतों और रिश्तों का भी सवाल

शत्रुघ्न सिन्हा ने पार्टी छोड़ने वाले नेताओं पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा, ‘कुछ लोग मजबूरी, डर या प्रलोभन के चलते ममता बनर्जी से दूर हुए होंगे, लेकिन मैं अपना रास्ता नहीं बदलूंगा।’ उन्होंने जोर देकर कहा कि राजनीति केवल सत्ता का खेल नहीं है बल्कि सिद्धांतों और रिश्तों का भी सवाल है। उनके अनुसार, जिन लोगों ने कठिन समय में उनका साथ दिया, उनके प्रति वफादार रहना उनकी राजनीतिक और व्यक्तिगत प्रतिबद्धता का हिस्सा है।

शत्रुघ्न सिन्हा के इस बयान को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के भविष्य और पार्टी के भीतर संभावित पुनर्गठन को लेकर चर्चाएं तेज हैं। उनके बयान से यह संकेत मिलता है कि पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेता अब भी ममता बनर्जी के नेतृत्व में भरोसा जता रहे हैं और संगठन को मजबूत करने के पक्ष में हैं।

विधानसभा चुनाव में हार के बाद टीएमसी में बढ़ती जा रही बगावत

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद टीएमसी में बगावत बढ़ती जा रही है। राज्य में ऋतब्रत के नेतृत्व में विधायकों ने अलग गुट बना लिया है। वहीं, दिल्ली में सांसदों के हस्ताक्षर वाली एक चिट्ठी अलग लोकसभा स्पीकर को सौंपी गई है। दावा किया जा रहा है कि इस चिट्ठी में 19 सांसदों के हस्ताक्षर हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में टीएमसी के 28 सांसद जीते थे।

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