एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित ने संभाला वायुसेना प्रमुख का कार्यभार, 43 वर्षों की सेवा के बाद एपी सिंह सेवानिवृत्त

नई दिल्ली, 31 अक्टूबर। एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित ने शनिवार को नए वायुसेना प्रमुख का कार्यभार संभाल लिया। 20 से अधिक विमानों पर 3500 घंटे से ज्यादा उड़ान का अनुभव रखने वाले दीक्षित अनुभवी लड़ाकू विमान पायलट रहे हैं। उन्होने एयर चीफ मार्शल एपी सिंह का स्थान लिया, जो 43 वर्षों के शानदार सेवाकाल के बाद शनिवार को सेवानिवृत्त हो गए। कार्यभार सौंपने से पहले रेस कोर्स एयर फोर्स स्टेशन पर भारतीय वायुसेना की ओर से एपी सिंह को औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।

इससे पहले वायुसेना के उप प्रमुख के पद पर कार्यरत थे आशुतोष दीक्षित

रणनीतिक योजना बनाने में दक्ष और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अहम भूमिका निभाने वाले एयर चीफ मार्शल दीक्षित इससे पहले वायुसेना के उप प्रमुख के पद पर कार्यरत थे। चार दशकों के शानदार करियर के दौरान एयर चीफ मार्शल दीक्षित ने कमान, स्टाफ और प्रशिक्षण से जुड़े कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है। नौ दिसंबर, 1966 को जन्मे एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित को 6 दिसंबर, 1986 को भारतीय वायुसेना की लड़ाकू विमान शाखा में कमीशन मिला था। दीक्षित ने फील्ड और स्टाफ से जुड़े कई महत्वपूर्ण पदों पर भी काम किया है।

प्रमुख पदों और जिम्मेदारियों का सफर

वायुसेना के उप प्रमुख का कार्यभार संभालने से पहले एयर चीफ मार्शल दीक्षित ने मुख्यालय, एकीकृत रक्षा स्टाफ में चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ टू द चेयरमैन, चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी के रूप में सेवाएं दी थीं। इससे पहले वह मध्य वायु कमान के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के पद पर तैनात थे। दीक्षित नेशनल डिफेंस एकेडमी, डिफेंस स्टाफ सर्विस कॉलेज (बांग्लादेश) और नेशनल डिफेंस कॉलेज के पूर्व छात्र हैं।

उड़ान अनुभव और सैन्य अभियान

एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित ने मिराज-2000, मिग के विभिन्न संस्करणों, किरण, जगुआर, आईएल-78, हॉक और तेजस सहित कई विमानों पर 3,500 घंटे से अधिक उड़ान भरने का व्यापक अनुभव है। दीक्षित एक प्रायोगिक परीक्षण पायलट और योग्य फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर भी हैं। ऑपरेशन सफेद सागर, ऑपरेशन रक्षक और ऑपरेशन सिंदूर सहित कई सैन्य अभियानों और अभ्यासों में सक्रिय रूप से शामिल रहे हैं।

स्क्वाड्रन और कमान में भूमिका

कमांडिंग ऑफिसर के रूप में इन्होंने नंबर 9 स्क्वाड्रन को मिराज-2000 विमानों से लैस किया। पश्चिमी क्षेत्र में एक अग्रिम लड़ाकू विमान बेस और दक्षिणी क्षेत्र में एक प्रमुख लड़ाकू प्रशिक्षण बेस की कमान संभाली। सदर्न एयर कमांड के एयर डिफेंस कमांडर के रूप में कार्य किया। वायु भवन में असिस्टेंट चीफ ऑफ द एयर स्टाफ (प्रोजेक्ट्स) और असिस्टेंट चीफ ऑफ द एयर स्टाफ (प्लान्स) जैसे अहम पद संभाल चुके हैं।

सैन्य सेवा के लिए सम्मान

एयर मार्शल दीक्षित को कई सैन्य सम्मान मिल चुके हैं। वर्ष 2006 में वायु सेना मेडल, 2011 में विशिष्ट सेवा मेडल, 2023 में अति विशिष्ट सेवा मेडल और 2026 में परम विशिष्ट सेवा मेडल प्रदान किया गया। परम विशिष्ट सेवा मेडल देश के सर्वोच्च सैन्य सम्मानों में से एक है, जो विशिष्ट सेवा के लिए दिया जाता है। नेशनल डिफेंस एकेडमी (एनडीए), डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज और नेशनल डिफेंस कॉलेज के पूर्व छात्र हैं।

वायुसेना की प्राथमिकताएं और बदलाव

एयर मार्शल दीक्षित ने वायुसेना प्रमुख की जिम्मेदारी ऐसे समय में संभाली है जब वायुसेना बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। लड़ाकू विमानों का बेड़ा बढ़ाने, वायुसेना को आधुनिक बनाने के साथ वायु रक्षा, मानवरहित युद्ध प्रणाली, ड्रोन रोधी क्षमता और नेटवर्क-केंद्रित युद्ध क्षमता को मजबूत करने की जिम्मेदारी होगी। तीनों सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय भी उनके कार्यकाल की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल होगा।

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