By Varsha Pargat
जंतर मंतर से कॉकरोच जनता पार्टी का आंदोलन शुरू हुआ और संसद भवन तक जाते-जाते हिंसक हो गया.
सुरक्षा बल और आंदोलनजीवी ,दोनों पक्ष आपस में भिड़ गए I दोनों तरफ के लोग जख्मी हुए I दोनों तरफ से आरोप प्रत्यारोप हो रहे हैं I लेकिन सवाल यह है कि जिस मुद्दे को लेकर यह आंदोलन शुरू हुआ वह मुद्दा कहीं पर भी दिखाही नहीं देता I
अमेरिका से बड़ी जोश के साथ अभिजीत दीपके भारत आए पर जिस तरह से वह और उनके समर्थक आगे बढ़े वह कई सारे सवाल उपस्थित करते हैं I 2014 से लगातार हम देख रहे हैं कि हर साल कोई ना कोई आंदोलन शुरू होता है I दिल्ली में जाकर धरना प्रदर्शन होते हैं, आंदोलन हिंसक बन जाते हैं I आंदोलन के नाम पर क्या देश में अराजकता फैलाना चाहते हैं ? I पिछले दो-चार सालों में दिल्ली में हुए आंदोलन इसी ओर जाते हुए दिखते हैं I इन आंदोलनों के बीच दिल्ली में हुए दंगे और हिंसा को हम कैसे भूल सकते हैं?.
पिछले चार-पांच सालों से लगातार यह चर्चा हो रही है कि भारत विरोधी शक्तियां पूरा जोर लगाकर काम कर रही है I भारत को अस्थिर करना चाहते हैं और विकास के मार्ग से हटाने पर तुले हुए हैं I फिर से भारत को तोड़ा जाए यह उनकी मनीषा है I
कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन का अब ऐसा ही कुछ चित्र बनता हुआ दिखता है Iअभिजीत दीपके आए और तुरंत उनके साथ देने आए लेफ्ट और लिब्रालू गैंग के लोग I मतलब जो अभिजीत अमेरिका से लगातार यह कह रहे थे कि वह भारत के युवाओं के लिए लड़ना चाहते हैं और उनका कोई पॉलिटिकल मोटिव नहीं है, आज पूरी तरह से आंदोलन पॉलिटिकल बन गया है I
अभिजीत दीपक जंतर मंतर बैठे और उन्होंने यह समझ लिया कि उनका आंदोलन एक बहुत बड़ा आंदोलन बन जाएगा I जो पहले सिर्फ भारत और भारत के युवाओं की बात कर रहे थे वह अपना “जाति कार्ड” खेलने लगे I
जैसे ही दिल्ली पहुंचे तो हाथ में डॉ. अंबेडकर की किताब दिखाकर सामने आए I जैसे राहुल गांधी एक लाल डायरी सबको दिखाते हुए घूमते हैं I बस उसी तरह दीपके घूमने लगे I
अभिजीत को शायद यह गलतफैमी हो गई है कि वह बहुत बड़े नेता बन सकते हैं I युवाओं का चेहरा बन सकते हैं I दीपके जी इसके लिए आपको बहुत मेहनत करनी पड़ेगी I भारत को समझना होगा I भारत को दिल से अपना ना होगा I भारत के युवाओं के सपने, उनके इरादे और उनके विचारों का अभ्यास करना होगा I जंतर मंतर पर बर्गर और वडा पाव और पिज्जा खाकर विरोध प्रदर्शन करते हुए पूरे भारत ने देखा I आपने अपने आप को एक बड़ा नेता प्रस्तावित करने के लिए उन फिल्म स्टार्स, लेखक और नेताओं को बुलाया जो भारत में रहकर ही भारत तोड़ने की बात करते आ रहे हैं I
वह फिल्म स्टार्स जो भारत में रहते हैं, भारत का खाते हैं, पैसा कमाते हैं और कहते हैं कि भारत उनके लिए सुरक्षित जगह नहीं है I जो लोग हमारी संस्कृति, हमारे भगवान, हमारे देवताओं का अपमान करते हैं, आपने उन्हें अपने साथ ले लिया I तो आपका मूल मुद्दा कहां खो गया? I डॉ. अंबेडकर का नाम लेकर आप सिस्टम को कोस रहे हो, इस सिस्टम से अIपने शिक्षा ली और अमेरिका गए I तब आपको यह याद नहीं आया कि भारत के कितने ही युवा है जो सिस्टम से लड़ते हुए भी आगे बढ़ रहे हैं I
दीपके जी भारत स्वतंत्र हुआ पर ब्रिटिशों की सिस्टम वैसे ही रही I भारत की सिस्टम बदलने में इतने साल गुजर गए I लेकिन ना ही लोगों की मानसिकता बदली ना ही सिस्टम बदल पाए और जब प्रयास हो रहे थे तो कुछ लोग आंदोलन के नाम पर खड़े हो जाते हैं I आपके साथ वो लेखिका खड़ी रही जो कश्मीर को भारत का अंग नहीं मानती I आप उसके साथ दिखे I तो आखिर आप चाहते क्या है? I आपने अपने पत्ते धीरे-धीरे खोले I आज आप प्रधानमंत्री का इस्तीफा मांग रहे हो I
NEET और पेपर लीक को आपने अपना राजनीतिक हथियार बनाया और आज सारे विपक्ष के नेता आपके कंधे पर बंदूक रखकर युवाओं की समस्या और उनकी आवाज बनने की कोशिश कर रहे हैं I आप सिस्टम बदलने की बात कर रहे हो I तो क्या आपके पास उनका कोई रोड मैप, विजन, प्लानिंग है? I आपने युवाओं को क्या दिशा दी? उलटI आपके आंदोलन के बीच हमने सुना कि हमारी संसद पर आक्रमण करेंगे ,जैसे नेपाल और श्रीलंका में हुआ I आप आए दिन नए बयान और नए agenda करते हो जिसका पेपर लिख से कोई लेना-देना नहीं होता I
दीपके जी भगत सिंह की तस्वीर लेकर आप बैठे हो, उन्होंने लगातार कई दिन अनशन किया था I जिसका एक रिकॉर्ड है I आप और आपके सहयोगी तो रात के अंधेरे में बर्गर और पिज्जा खाते हुए पकड़े गए I आंदोलन स्थल र कौन पिज़्ज़ा के ऑर्डर दे रहे हैं ? I आपको आंदोलन का सही अर्थ भी मालूम है ?
अमेरिका से पट्टी पढ़ कर भारत में क्रांति लाने वाले लोग हमें नहीं चाहिए I यहां क्रांति लाने वाले कई युवा है जो चुपचाप अपना काम करते हुए देश के विकास में अपना अमूल्य योगदान दे रहे हैं I हमें ऐसे युवा नहीं चाहिए जो स्वार्थी और देश विरोधियों का मोहरा बने I
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