लखनऊ, 20 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार गोशालाओं को केवल गोवंश संरक्षण तक सीमित रखने के बजाय उन्हें किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का माध्यम बनाने की तैयारी कर रही है। इसके तहत गोबर और अन्य जैविक संसाधनों को प्राकृतिक खेती से जोड़कर खाद, जैविक उत्पाद और ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा। इस मॉडल को सबसे पहले ललितपुर में पायलट परियोजना के रूप में विकसित करने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। योजना के अनुभवों के आधार पर प्रदेश के प्रत्येक मंडल के एक जिले में इसे लागू करने पर भी विचार किया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप इस पहल पर काम शुरू किया गया है। गो सेवा आयोग और राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के अधिकारियों के बीच हुई बैठक में प्रस्तावित मॉडल की रूपरेखा पर चर्चा की गई। इसमें उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद (उपकार) और कृषि विज्ञान केंद्रों की तकनीकी भागीदारी की संभावनाओं पर भी विचार किया गया।
प्रस्तावित योजना के तहत नाबार्ड से वित्तीय सहयोग और क्षमता विकास में मदद लेने, जबकि उपकार तथा कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से किसानों और गोशाला संचालकों को तकनीकी प्रशिक्षण देने की संभावनाएं देखी जा रही हैं। इसका मुख्य उद्देश्य गोवंश संरक्षण, प्राकृतिक खेती और ग्रामीण उद्यमिता को एक साथ जोड़कर गोशालाओं और किसानों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है।
गोबर से बनेगी खाद, ऊर्जा और रोजगार के अवसर
इस मॉडल में गोशालाओं में उपलब्ध गोबर का उपयोग प्राकृतिक खाद, वर्मी कम्पोस्ट, जैविक कीट नियंत्रक और पंचगव्य आधारित उत्पाद तैयार करने में किया जाएगा। इसके अलावा गो-काष्ठ, गोबर आधारित बायोगैस और कम्प्रेस्ड बायोगैस (बायो-सीबीजी) संयंत्रों की संभावनाएं भी तलाशी जा रही हैं। इससे गोशालाओं के लिए आय के नए स्रोत विकसित हो सकते हैं। वहीं, किसानों को स्थानीय स्तर पर प्राकृतिक खेती के लिए खाद और अन्य जैविक संसाधन उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। गोबर आधारित उत्पादों के निर्माण और विपणन से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार तथा छोटे उद्यमों के विकास के अवसर भी पैदा हो सकते हैं।
खेत से बाजार तक विकसित होगी पूरी व्यवस्था
ललितपुर में प्रस्तावित मॉडल के तहत गोशालाओं को किसानों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण उद्यमियों के साथ जोड़ने की योजना है। इसका उद्देश्य कृषि उत्पादन से लेकर बाजार तक एक समन्वित व्यवस्था तैयार करना है। इसके लिए कृषि उपज के संग्रहण, प्रसंस्करण, गुणवत्ता नियंत्रण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और विपणन की सुविधाएं विकसित करने पर जोर दिया जाएगा। इससे किसानों को अपने उत्पादों की बेहतर कीमत दिलाने और स्थानीय स्तर पर कृषि आधारित व्यवसायों को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है।
हर मंडल में लागू हो सकता है ललितपुर मॉडल
ललितपुर को पायलट नेचुरल फार्मिंग डिस्ट्रिक्ट के रूप में विकसित करने की संभावनाएं तलाशने के बाद इस मॉडल के परिणामों का आकलन किया जाएगा। इसके आधार पर प्रदेश के हर मंडल के एक जिले में इसे लागू करने पर विचार किया जा रहा है। यदि प्रस्तावित योजना प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो इससे गोशालाओं के संसाधनों का बेहतर उपयोग, प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है। हालांकि, योजना का वास्तविक प्रभाव इसके क्रियान्वयन, वित्तीय सहयोग और किसानों व गोशाला संचालकों की भागीदारी पर निर्भर करेगा।


