IMF ने भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ाया, 7% विकास दर की उम्मीद

नई दिल्ली, 15 अक्टूबर। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और सरकार के नीतिगत कदमों की सराहना की है। आईएमएफ के मुताबिक, भारत वैश्विक ऊर्जा संकट और वित्तीय अनिश्चितताओं के बावजूद मजबूती से आगे बढ़ रहा है। देश दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अपनी स्थिति बनाए हुए है। अप्रैल-जून तिमाही में उम्मीद से बेहतर आर्थिक प्रदर्शन के बाद आईएमएफ ने भारत की विकास दर का अनुमान भी बढ़ा दिया है। आईएमएफ के एशिया और प्रशांत विभाग के निदेशक कृष्णा श्रीनिवासन ने बैंकॉक में आयोजित प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कहा कि हालिया ऊर्जा संकट के समय भारत की आर्थिक स्थिति मजबूत थी। वित्तीय अनुशासन और बेहतर आर्थिक विकास ने देश को बाहरी चुनौतियों का सामना करने में मदद की।

चालू और अगले साल 7% विकास दर का अनुमान

आईएमएफ की ताजा ‘वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक’ रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय अर्थव्यवस्था के चालू वर्ष और अगले वर्ष दोनों में 7 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है। वहीं, मध्यम अवधि में विकास दर लगभग 6.9 प्रतिशत रहने की संभावना जताई गई है। गौरतलब है कि आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल-जून तिमाही में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही थी। बेहतर आर्थिक प्रदर्शन को विकास दर के अनुमान में बढ़ोतरी की प्रमुख वजह माना जा रहा है।

मजबूत घरेलू मांग से मिल रहा सहारा

आईएमएफ के अनुसार, भारत की आर्थिक मजबूती के पीछे कई महत्वपूर्ण कारक हैं। इनमें मजबूत घरेलू मांग, सेवा क्षेत्र में बेहतर गतिविधियां, अनुकूल जनसांख्यिकीय स्थिति और लगातार बढ़ता घरेलू बाजार शामिल हैं। इसके अलावा, देश में जारी संरचनात्मक सुधार भी आर्थिक विकास को गति देने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बने रहने के बावजूद भारत का प्रदर्शन क्षेत्र की कई अन्य अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में बेहतर रहा है।

रुपए में गिरावट को आर्थिक कमजोरी मानना सही नहीं

भारतीय रुपए पर हाल में बने दबाव को लेकर भी आईएमएफ ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। कृष्णा श्रीनिवासन ने कहा कि मुद्रा की विनिमय दर कई वैश्विक कारकों से प्रभावित होती है। इनमें अंतरराष्ट्रीय ब्याज दरें, निवेशकों की धारणा और कच्चे तेल की कीमतें प्रमुख हैं। उन्होंने कहा कि भारत एक बड़ा तेल आयातक देश है, इसलिए वैश्विक ऊर्जा संकट का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ना स्वाभाविक है। हालांकि, किसी देश की आर्थिक सफलता या कमजोरी का आकलन केवल उसकी मुद्रा की चाल के आधार पर नहीं किया जा सकता।

जीडीपी गणना के नए तरीके का समर्थन

आईएमएफ ने भारत की संशोधित जीडीपी गणना पद्धति का भी समर्थन किया है। श्रीनिवासन के मुताबिक, इस पद्धति में किए गए बदलाव अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं और आईएमएफ की पूर्व सिफारिशों के अनुरूप हैं। उन्होंने सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) की ओर से राष्ट्रीय लेखा सांख्यिकी को बेहतर बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।

एशिया में भारत का प्रदर्शन बेहतर

क्षेत्रीय आर्थिक परिस्थितियों पर चर्चा करते हुए श्रीनिवासन ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण एशिया की कई अर्थव्यवस्थाओं की विकास संभावनाएं प्रभावित हुई हैं। इसके बावजूद भारत ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया है। आईएमएफ के आकलन से संकेत मिलता है कि घरेलू मांग, सेवा क्षेत्र और संरचनात्मक सुधारों के सहारे भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास गति मजबूत बनी हुई है।

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