नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर संस्कृत का एक सुभाषित साझा किया। महाभारत में वर्णित विदुर नीति के इस श्लोक के जरिए क्षमा, विद्या और अहिंसा जैसे जीवन मूल्यों के महत्व का संदेश दिया गया है।
प्रधानमंत्री की ओर से साझा किया गया श्लोक है-
“एको धर्मः परं श्रेयः क्षमैका शान्तिरुत्तमा।
विद्यैका परमा तृप्तिरहिंसैका सुखावहा॥”
इसका भावार्थ है कि धर्म मनुष्य को कल्याण और उन्नति के मार्ग पर आगे बढ़ाता है। क्षमा मानसिक शांति का श्रेष्ठ साधन है। विद्या वास्तविक संतोष का आधार है, जबकि अहिंसा जीवन में सुख और शांति का मार्ग प्रशस्त करती है।
महाभारत की विदुर नीति से जुड़ा है श्लोक
बताया गया है कि यह श्लोक महाभारत के उद्योग पर्व में वर्णित विदुर नीति का हिस्सा है। विदुर ने हस्तिनापुर के राजा धृतराष्ट्र को नीति, धर्म और जीवन से जुड़े कई महत्वपूर्ण सिद्धांतों का बोध कराया था। महाभारत के प्रसंग में धृतराष्ट्र मानसिक द्वंद्व और पुत्र मोह से परेशान थे। ऐसे समय में विदुर ने उन्हें जीवन, कर्तव्य और नैतिकता से जुड़े सिद्धांत समझाए थे। इसी क्रम में क्षमा, विद्या और अहिंसा के महत्व को भी रेखांकित किया गया है।
धर्म का अर्थ केवल पूजा-पद्धति नहीं
इस श्लोक की व्याख्या में धर्म को केवल किसी संप्रदाय या पूजा-पद्धति तक सीमित नहीं माना गया है। यहां धर्म का संबंध कर्तव्य, नैतिकता, सत्य और अच्छे आचरण से जोड़ा गया है। जीवन में धन, प्रतिष्ठा या सत्ता हासिल करने के बावजूद व्यक्ति के लिए सही मार्ग पर चलना महत्वपूर्ण माना गया है। श्लोक का संदेश है कि धर्म और अच्छे कर्म मनुष्य को कल्याण के मार्ग पर आगे ले जाते हैं।
क्षमा से मिलती है मानसिक शांति
श्लोक में क्षमा को शांति का सर्वोत्तम साधन बताया गया है। क्रोध, द्वेष और बदले की भावना व्यक्ति के मन में तनाव और अशांति पैदा कर सकती है। इसके विपरीत, किसी की गलती को क्षमा करने से मन में जमा द्वेष और नकारात्मकता कम हो सकती है। भारतीय नीति परंपरा में क्षमा को कमजोरी के बजाय आत्मसंयम और उच्च चरित्र से जोड़कर देखा गया है।
विद्या को बताया गया वास्तविक संतोष का आधार
श्लोक में विद्या को परम तृप्ति का साधन बताया गया है। इसका आशय केवल किताबी ज्ञान से नहीं, बल्कि ऐसे ज्ञान और विवेक से है जो व्यक्ति को सही और गलत के बीच अंतर समझने में मदद करे। धन और भौतिक उपलब्धियों की इच्छा लगातार बढ़ सकती है, लेकिन ज्ञान व्यक्ति के दृष्टिकोण को व्यापक बनाता है और परिस्थितियों को समझने की क्षमता देता है। इसी कारण विद्या को स्थायी संतोष से जोड़ा गया है।
अहिंसा से सुख और शांति का संदेश
श्लोक में अहिंसा को सुख प्रदान करने वाली बताया गया है। हिंसा, द्वेष और लगातार संघर्ष से भय और असुरक्षा का वातावरण पैदा हो सकता है। वहीं, अहिंसा और करुणा को समाज में प्रेम, सहयोग और भाईचारे की भावना मजबूत करने वाले मूल्यों के रूप में देखा जाता है। श्लोक का संदेश व्यक्तिगत जीवन के साथ-साथ सामाजिक व्यवहार में भी शांति और सद्भाव की महत्ता को रेखांकित करता है।
चार मूल्यों पर केंद्रित है संदेश
प्रधानमंत्री द्वारा साझा किए गए इस सुभाषित का केंद्रीय संदेश जीवन के कुछ महत्वपूर्ण मूल्यों के इर्द-गिर्द है—धर्म, क्षमा, विद्या और अहिंसा। श्लोक के माध्यम से बताया गया है कि नैतिक आचरण, मानसिक शांति, ज्ञान और अहिंसक व्यवहार व्यक्ति के जीवन को बेहतर दिशा दे सकते हैं।


