नई दिल्ली, 21 सितंबर। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र के हाई-लेवल वीक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने के लिए न्यूयॉर्क पहुंच गए हैं। इस दौरान उनका कार्यक्रम काफी व्यस्त रहने वाला है। जयशंकर विभिन्न देशों के नेताओं, विदेश मंत्रियों और संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों के साथ द्विपक्षीय और बहुपक्षीय बैठकें करेंगे। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, वह 26 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा के हाई-लेवल सेशन में भारत का राष्ट्रीय वक्तव्य भी देंगे। UNGA का हाई-लेवल वीक 22 से 29 सितंबर तक चल रहा है। इस दौरान 193 सदस्य देशों के प्रतिनिधि वैश्विक शांति, सुरक्षा, आर्थिक चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन और अन्य अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर अपने विचार रखेंगे। इस साल महासभा का विषय ‘Restoring Trust, Managing Transformation: A United Nations That Delivers for All’ है।
26 सितंबर को UNGA में संबोधन देंगे जयशंकर
जयशंकर 26 सितंबर को UNGA के आम बहस के दोपहर के सत्र में भारत का पक्ष रखेंगे। अपने संबोधन में वह वैश्विक मुद्दों पर भारत की स्थिति और प्राथमिकताओं को सामने रख सकते हैं। इस वर्ष का हाई-लेवल वीक ऐसे समय में हो रहा है, जब दुनिया कई भू-राजनीतिक संघर्षों, आर्थिक दबावों, जलवायु संबंधी चुनौतियों और बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार से जुड़े सवालों का सामना कर रही है। भारत ने 81वें UNGA के लिए जारी अपनी प्राथमिकताओं में बहुपक्षीय व्यवस्था में सुधार और वैश्विक दक्षिण की आवाज को मजबूत करने सहित कई मुद्दों पर जोर दिया है।
कई देशों के नेताओं और विदेश मंत्रियों से होगी मुलाकात
न्यूयॉर्क प्रवास के दौरान जयशंकर की कई द्विपक्षीय और बहुपक्षीय बैठकें प्रस्तावित हैं। कुछ बैठकें सीधे दो देशों के बीच होंगी, जबकि कुछ बहुपक्षीय मंचों के इतर होंगी। इसके अलावा कई अनौपचारिक मुलाकातें भी होने की उम्मीद है। इन बैठकों में ग्लोबल साउथ के देशों के साथ भारत के सहयोग और सहायता कार्यक्रमों पर चर्चा हो सकती है। भारत कई देशों के साथ विकास साझेदारी कार्यक्रम चलाता है और संयुक्त राष्ट्र तथा अन्य बहुपक्षीय संस्थाओं के माध्यम से भी सहयोग करता है।
2028-29 UNSC सदस्यता के लिए भारत का अभियान
जयशंकर के न्यूयॉर्क दौरे का एक महत्वपूर्ण पहलू संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की 2028-29 की गैर-स्थायी सदस्यता की उम्मीदवारी भी है। भारत ने इस कार्यकाल के लिए अपनी उम्मीदवारी घोषित कर रखी है और इसके लिए अभियान भी शुरू किया है। चुनाव 2027 में होगा और निर्वाचित सदस्य का दो साल का कार्यकाल 2028 से शुरू होगा। भारत ने अपनी उम्मीदवारी के लिए छह प्राथमिकताओं वाले एजेंडे को SHANTI नाम दिया है। इसका विस्तार “Securing Holistic Advancement through Norms, Trust and Integrity” है। भारतीय पक्ष के अनुसार इसका केंद्रीय विचार नियमों, विश्वास और संस्थागत ईमानदारी के आधार पर समग्र विकास और अधिक सुरक्षित वैश्विक व्यवस्था को आगे बढ़ाना है।
भारत की UNSC प्राथमिकताओं में ग्लोबल साउथ और बहुपक्षवाद
भारत की 2028-29 UNSC उम्मीदवारी के लिए घोषित प्राथमिकताओं में एक सुरक्षित और शांतिपूर्ण विश्व, ग्लोबल साउथ की आवाज, आधुनिक चुनौतियों के अनुरूप शांति स्थापना, तकनीक के जिम्मेदार इस्तेमाल, समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद से मुकाबला तथा जलवायु कार्रवाई और सतत विकास जैसे मुद्दे शामिल हैं। भारत की UNGA प्राथमिकताओं में भी बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की सदस्यता के लिए अभियान और वैश्विक मंचों पर भारत की भूमिका को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया है।
26 सितंबर को Asia Society के कार्यक्रम में भी शामिल होंगे
न्यूयॉर्क में जयशंकर के कार्यक्रम में 26 सितंबर को Asia Society में होने वाला एक कार्यक्रम भी शामिल है। UNGA हाई-लेवल वीक के दौरान इस तरह के कार्यक्रमों के जरिए विदेश मंत्री विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भारत के दृष्टिकोण को सामने रख सकते हैं।
बांग्लादेश के विदेश मंत्री UNGA अध्यक्ष
UNGA के 81वें सत्र की अध्यक्षता बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान कर रहे हैं। मौजूदा सत्र में दुनिया के 193 सदस्य देशों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। वहीं, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस का दूसरा कार्यकाल दिसंबर 2026 में समाप्त होने वाला है, इसलिए यह हाई-लेवल वीक संयुक्त राष्ट्र के नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया के बीच भी हो रहा है।
पिछले साल 47 द्विपक्षीय बैठकें की थीं
पिछले वर्ष के UNGA हाई-लेवल वीक के दौरान जयशंकर ने 47 द्विपक्षीय बैठकें और 10 बहुपक्षीय बैठकों में हिस्सा लिया था। इसके अलावा उन्होंने विभिन्न देशों के नेताओं के साथ कई अनौपचारिक मुलाकातें भी की थीं। इस व्यस्त कार्यक्रम का जिक्र उन्होंने बाद में सोशल मीडिया पोस्ट में किया था। इस वर्ष भी न्यूयॉर्क में उनका कार्यक्रम कई बैठकों और बहुपक्षीय संवादों से भरा रहने की उम्मीद है।


