मुंबई, 9 अक्टूबर। सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार ने पिछले सत्र की गिरावट से उबरते हुए बढ़त के साथ कारोबार की शुरुआत की। बीएसई सेंसेक्स 183.43 अंक यानी 0.26 प्रतिशत चढ़कर 71,776.67 पर खुला, जबकि एनएसई निफ्टी 50 में 83.15 अंक यानी 0.37 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई और यह 22,314.95 के स्तर पर खुला। कारोबार के दौरान बाजार की तेजी और बढ़ गई। खबर लिखे जाने तक सेंसेक्स 452.95 अंक यानी 0.63 प्रतिशत की बढ़त के साथ 72,046 के करीब कारोबार कर रहा था। वहीं, निफ्टी 50 167.05 अंक यानी 0.75 प्रतिशत उछलकर 22,398 के स्तर पर पहुंच गया।
IT शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी
व्यापक बाजार में निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स करीब 1 प्रतिशत चढ़ा, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 0.01 प्रतिशत की मामूली बढ़त दर्ज की गई। सेक्टरवार कारोबार में निफ्टी आईटी सबसे आगे रहा। इसमें 3 प्रतिशत से अधिक की तेजी देखने को मिली। इसके अलावा निफ्टी मीडिया, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी एफएमसीजी और निफ्टी प्राइवेट बैंक में भी 1 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त दर्ज की गई। दूसरी ओर, निफ्टी फार्मा और निफ्टी ऑयल एंड गैस दबाव में रहे।
TCS और Infosys के शेयरों में उछाल
निफ्टी 50 में टीसीएस, इंफोसिस, एचडीएफसी लाइफ, आयशर मोटर्स, अपोलो हॉस्पिटल्स और एचसीएल टेक के शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी दर्ज की गई। वहीं, बीईएल, रिलायंस इंडस्ट्रीज, सिप्ला, बीएसई और कोल इंडिया के शेयरों में गिरावट देखने को मिली।
103 डॉलर के पार कच्चा तेल, बाजार के लिए चिंता
मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने से वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर जोखिम बढ़ गया है। इसके चलते ब्रेंट क्रूड की कीमत 103 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारतीय शेयर बाजार के लिए चिंता का विषय हैं, क्योंकि इससे महंगाई और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ सकता है। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, ऊंचे कच्चे तेल के भाव और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के कारण निकट अवधि में बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। मौजूदा माहौल में तेजी के दौरान बिकवाली का दबाव भी देखने को मिल सकता है।
FII की बिकवाली से बाजार पर दबाव
विश्लेषकों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की लगातार बिकवाली से बाजार में मंदी की धारणा मजबूत हुई है। विदेशी निवेशक मजबूत बुनियादी स्थिति वाली कंपनियों के शेयरों में भी बिकवाली कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं और अमेरिका की 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड में पर्याप्त नरमी नहीं आती, तब तक विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी रह सकती है। इसका असर खासकर बड़ी कंपनियों के शेयरों पर पड़ सकता है। हालांकि, बाजार के लंबे समय के रुझान को देखते हुए विशेषज्ञ मौजूदा गिरावट को दीर्घकालिक निवेशकों के लिए संभावित अवसर भी मान रहे हैं। उनके अनुसार, मजबूत बुनियादी स्थिति वाली कंपनियों में चरणबद्ध तरीके से निवेश के मौके बन सकते हैं।
निफ्टी के लिए 22,140 का स्तर अहम
तकनीकी विश्लेषकों के मुताबिक, निफ्टी के लिए 22,050 का स्तर महत्वपूर्ण बना हुआ है। निचले बोलिंजर बैंड के आसपास कारोबार होने से अल्पकालिक रिकवरी की संभावना भी बनी हुई है। विश्लेषकों के अनुसार, यदि निफ्टी 22,290 से 22,350 के दायरे के ऊपर टिकता है, तो इसमें 22,440 से 22,600 तक की तेजी देखने को मिल सकती है। वहीं, नीचे की ओर 22,140 का स्तर अहम समर्थन माना जा रहा है।
FII ने बेचे 12,943 करोड़ रुपये के शेयर
वैश्विक बाजारों से मिलने वाले संकेत अभी मिश्रित बने हुए हैं। अमेरिकी आईटी शेयरों में कमजोरी और पश्चिम एशिया में तनाव के कारण ऊंची तेल कीमतें निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर रही हैं। हालांकि, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में आई कुछ नरमी से बाजार को सीमित राहत मिली है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, गुरुवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 12,943 करोड़ रुपये के शेयरों की बिकवाली की, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 10,703 करोड़ रुपये की खरीदारी की।
घरेलू निवेशकों की खरीदारी ने बाजार को कुछ सहारा दिया। अक्टूबर में अब तक विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से 36,210 करोड़ रुपये निकाल चुके हैं। लगातार जारी इस बिकवाली के कारण बाजार पर दबाव बना हुआ है। ऐसे में आने वाले कारोबारी सत्रों में कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेशकों के रुख और वैश्विक संकेतों पर निवेशकों की नजर रहेगी।


