नई दिल्ली, 21 सितंबर। हमारा शरीर कई बार किसी बीमारी या संक्रमण के बारे में पहले ही छोटे-छोटे संकेत देने लगता है। अचानक ज्यादा थकान, भूख कम लगना या पेट से जुड़ी परेशानी जैसे लक्षणों की तरह पेशाब करने के तरीके में बदलाव भी सेहत से जुड़ी किसी समस्या का संकेत हो सकता है। अगर कुछ दिनों से पेशाब करते समय जलन हो रही है, बार-बार पेशाब लग रहा है या पेशाब करने के बाद भी ब्लैडर पूरी तरह खाली न होने जैसा महसूस हो रहा है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
इन लक्षणों की एक वजह कम पानी पीना हो सकती है, लेकिन कई मामलों में ये यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI) के संकेत भी हो सकते हैं। UTI पेशाब की नली और उससे जुड़े अंगों में होने वाला संक्रमण है। यह संक्रमण यूरिनरी ट्रैक्ट के अलग-अलग हिस्सों को प्रभावित कर सकता है और कुछ मामलों में किडनी तक भी पहुंच सकता है।
- क्या होता है UTI?
जब बैक्टीरिया यूरिनरी ट्रैक्ट के रास्ते शरीर में प्रवेश करके वहां बढ़ने लगते हैं, तो संक्रमण हो सकता है। यह संक्रमण पेशाब की नली, ब्लैडर और कभी-कभी किडनी को प्रभावित कर सकता है।
आमतौर पर UTI का इलाज संभव है, लेकिन संक्रमण का समय पर इलाज न होने पर यह गंभीर रूप ले सकता है। खासतौर पर जब संक्रमण किडनी तक पहुंच जाए, तब डॉक्टर की सलाह लेना बेहद जरूरी हो जाता है।
- पेशाब में जलन से लेकर बार-बार यूरिन आना, ये हैं प्रमुख लक्षण
UTI में हर व्यक्ति में एक जैसे लक्षण नहीं दिखाई देते। हालांकि, कुछ सामान्य संकेतों पर ध्यान देना जरूरी है।
पेशाब करते समय जलन या दर्द होना
बार-बार पेशाब लगना
पेशाब करने के बाद भी ब्लैडर पूरी तरह खाली न होने जैसा महसूस होना
पेट के निचले हिस्से में दर्द या भारीपन
पेशाब का धुंधला दिखाई देना
पेशाब से सामान्य से ज्यादा तेज गंध आना
पेशाब में खून दिखाई देना
अगर पेशाब में खून नजर आए तो इसे सामान्य समस्या समझकर टालना नहीं चाहिए। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
- बुखार और कमर दर्द हो तो रहें सावधान
अगर पेशाब में जलन या बार-बार पेशाब आने के साथ बुखार, ठंड लगना, कमर या पीठ में दर्द, जी मिचलाना या उल्टी जैसी समस्याएं भी हो रही हैं, तो जल्द चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
ऐसे लक्षण संक्रमण के ऊपर की ओर फैलने और किडनी को प्रभावित करने की संभावना से जुड़े हो सकते हैं। किडनी का संक्रमण गंभीर हो सकता है, इसलिए ऐसे लक्षणों में इलाज में देरी नहीं करनी चाहिए।
- महिलाओं में UTI का खतरा ज्यादा क्यों?
महिलाओं में UTI की समस्या पुरुषों की तुलना में अधिक आम हो सकती है। इसका एक कारण शरीर की बनावट है। महिलाओं की पेशाब की नली अपेक्षाकृत छोटी होती है, जिससे बैक्टीरिया के लिए यूरिनरी ट्रैक्ट में ऊपर की ओर पहुंचना आसान हो सकता है।
कुछ महिलाओं में यौन संबंध के बाद भी UTI का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा मेनोपॉज के बाद होने वाले हार्मोनल बदलाव भी यूरिनरी ट्रैक्ट में संक्रमण की संभावना को प्रभावित कर सकते हैं।
- डायबिटीज और कमजोर इम्युनिटी में भी बढ़ सकता है खतरा
डायबिटीज से जूझ रहे लोगों में UTI का जोखिम बढ़ सकता है। इसी तरह जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है, उनमें भी संक्रमण होने की संभावना अधिक हो सकती है।
लंबे समय तक पेशाब रोककर रखना या किसी कारण से ब्लैडर का पूरी तरह खाली न हो पाना भी बैक्टीरिया के बढ़ने के लिए अनुकूल स्थिति बना सकता है।
- UTI से बचाव के लिए क्या करें?
UTI के जोखिम को कम करने के लिए रोजमर्रा की कुछ आदतों पर ध्यान देना जरूरी है।
पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें।
पेशाब आने पर लंबे समय तक उसे रोककर न रखें।
व्यक्तिगत साफ-सफाई का ध्यान रखें।
महिलाओं को टॉयलेट के बाद सफाई करते समय आगे से पीछे की ओर सफाई करने की सलाह दी जाती है।
अगर बार-बार UTI की समस्या होती है, तो डॉक्टर से कारण और बचाव के उपायों के बारे में सलाह लें।
ध्यान रखें कि पेशाब में जलन या बार-बार पेशाब आना हमेशा UTI की वजह से ही नहीं होता। इसके पीछे अन्य कारण भी हो सकते हैं। इसलिए लगातार या गंभीर लक्षण होने पर खुद से दवा लेने के बजाय डॉक्टर से जांच और उचित सलाह लेना बेहतर है।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। इसमें दी गई जानकारी किसी बीमारी के निदान या इलाज का विकल्प नहीं है। लगातार जलन, पेशाब में खून, तेज बुखार, कमर/पीठ में दर्द, उल्टी या अन्य गंभीर लक्षण होने पर चिकित्सक से संपर्क करें।


