नई दिल्ली/कोलकाता, 17 सितम्बर। भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर विरोधी धड़ों के बीच चल रही लड़ाई में गुरुवार को TMC को झटका देते हुए पार्टी का नाम व सिंबल (चुनाव चिह्न) ही फ्रीज कर दिया। इस क्रम में आयोग ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले विरोधी गुटों को आगामी विधानसभा उपचुनाव में पार्टी का नाम (TMC) और मौजूदा चुनाव चिह्न का इस्तेमाल करने से रोक दिया है।
नाम और चिह्न के लिए दोनों गुटों को दिए 3 विकल्प
चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों को निर्देश दिया है कि वे शुक्रवार को पूर्वाह्न 11 बजे तक अपने गुट के लिए तीन नामों के विकल्प और तीन फ्री सिंबल के विकल्प (वरीयता क्रम में) जमा करें। यह अंतरिम व्यवस्था सिर्फ मौजूदा उपचुनावों के लिए लागू रहेगी और Symbols Order 1968 के पैरा 15 के तहत विवाद के अंतिम फैसले तक जारी रहेगी। आदेश पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तथा चुनाव आयुक्त डॉ. विवेक जोशी और डॉ. सुखबीर सिंह संधू के हस्ताक्षर हैं।
आयोग ने गुरुवार को जारी अंतरिम आदेश में स्पष्ट किया कि अरुप रॉय के नेतृत्व वाले गुट और ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट में से कोई भी ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम का सीधा इस्तेमाल नहीं कर सकेगा। दोनों गुटों को ‘दो फूल और घास’ चिह्न का उपयोग करने से भी मना कर दिया गया है, जो पार्टी के लिए आरक्षित है।
आयोग ने कहा कि दोनों गुट अपने-अपने नाम चुन सकते हैं। यदि वे चाहें तो मूल पार्टी के नाम से जुड़ाव भी दिखा सकते हैं। साथ ही दोनों गुटों को फ्री सिंबल सूची में से अलग-अलग चुनाव चिह्न आवंटित किए जाएंगे।
पहले भी फ्रीज हो चुके हैं चुनाव चिह्न
उल्लेखनीय है कि चुनाव आयोग इससे पहले भी विभिन्न राजनीतिक दलों में टूट के बाद चुनाव चिह्न फ्रीज कर चुका है। 2021 में लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) में चिराग पासवान और पशुपति कुमार पारस के बीच विवाद के बाद पार्टी का ‘बंगला’ चुनाव चिह्न फ्रीज किया गया था। इसके बाद 2022 में उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे के बीच शिवसेना को लेकर विवाद के दौरान आयोग ने पार्टी के ‘धनुष-बाण’ चुनाव चिह्न को भी फ्रीज कर दिया था।
पश्चिम बंगाल में 6 अक्टूबर को होना है उपचुनाव
ज्ञातव्य है कि पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर छह अक्टूबर को उपचुनाव होना है। दोनों सीटों पर TMC के दोनों गुटों ने अपने-अपने उम्मीदवार उतारे हैं और पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर दावा किया है।
चुनाव आयोग ने दोनों गुटों की अलग-अलग सुनवाई की
चुनाव आयोग ने इसी विवाद के मद्देनजर गुरुवार को दोनों गुटों की अलग-अलग सुनवाई की। पहले ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला गुट आयोग के सामने पहुंचा। इस प्रतिनिधिमंडल में ऋतब्रत बनर्जी के अलावा चंद्रिमा भट्टाचार्य, अकरुल जमान, अरुप रॉय और एक वकील शामिल थे। अरूप रॉय को इस गुट ने दल का चेयरपर्सन चुना हुआ है।
ऋतब्रत बनर्जी ने सुनवाई के बाद कहा कि उन्होंने आयोग के सवालों का जवाब दिया और जल्द फैसला लेने की मांग की है। उन्होंने कहा कि नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव नजदीक हैं और दोनों पक्षों ने नामांकन दाखिल कर दिया है.
इसके बाद ममता बनर्जी के गुट की ओर से डेरेक ओ’ब्रायन, कल्याण बनर्जी, महुआ मोइत्रा और सागरिका घोष आयोग के सामने पहुंचे कल्याण बनर्जी ने अंतरिम आदेश का विरोध किया। उनका कहना था कि ऐसा कोई आदेश जारी करने का आधार नहीं है।
संगठनात्मक चुनाव को लेकर दोनों गुटों के विरोधी दावे
ममता गुट ने पार्टी के संविधान का हवाला देते हुए कहा कि संगठनात्मक चुनाव पांच वर्ष के भीतर होते हैं और अगला संगठनात्मक चुनाव 31 जनवरी, 2027 तक पूरा होना है। दूसरी ओर, ऋतब्रत गुट का दावा है कि पार्टी की राष्ट्रीय कार्यसमिति का गठन हर तीन वर्ष में होना चाहिए था और पिछली कार्यसमिति का कार्यकाल फरवरी, 2025 में खत्म हो चुका है।
स्मरण रहे कि दोनों गुटों के बीच विवाद 22 जून को और बढ़ गया था, जब ऋतब्रत बनर्जी ने बागी नेताओं की बैठक बुलाकर नई राष्ट्रीय कार्यसमिति बनाने का एलान किया था। इसके बाद दोनों पक्षों ने पार्टी के संगठन, नाम और चुनाव चिह्न पर अपना-अपना दावा चुनाव आयोग के सामने रखा।


