नई दिल्ली, 15 अगस्त। बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया (BCI) के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने शनिवार को देशभर के लॉ छात्रों से माफी मांगी। यह माफी NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के 2026 बैच के ग्रेजुएट्स को एडवोकेट के तौर पर एनरोल करने से देशभर के राज्य बार काउंसिलों को रोकने वाले बीसीआई के आदेश को लेकर मचे भारी विवाद के बीच मांगी गई। हालांकि बाद में इस फैसले को वापस ले लिया गया था। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने बी बीसीआई को फटकार लगाई थी।
मनन मिश्रा ने एक बयान में कहा, ‘पिछले कुछ दिनों की घटनाओं से छात्रों के एक वर्ग में चिंता और दुख पैदा हुआ है। जब भी छात्र आहत या परेशान महसूस करते हैं तो उनकी चिंताओं को धैर्य, संवेदनशीलता और सम्मान के साथ सुना जाना चाहिए। यदि इस विवाद से जुड़ी किसी भी चीज़, मेरे किसी शब्द या पत्र से हमारे लॉ के छात्रों की भावनाएं आहत हुई हैं तो मैं इसके लिए ईमानदारी से खेद व्यक्त करता हूं और माफ़ी मांगता हूं।’
Bar Council of India chairman and Rajya Sabha MP Manan Kumar Mishra expressed regret and apologised to law students if his words or letter had hurt their sentiments, urging a fair and reconciliatory resolution to the ongoing issue without external or political influence.… pic.twitter.com/bLqaC9lOH7
— United News of India (@uniindianews) August 15, 2026
सीजेआई सूर्यकांत की कठोर टिप्पणी के एक दिन बाद आया माफानामा
यह माफीनामा प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की नाराजगी और उनकी टिप्पणी के एक दिन बाद आया आया है, जिन्होंने शुक्रवार को मामले की सुनवाई के दौरान कहा था कि नालसार विवाद में बीसीआई के दखल देने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने यह भी साफ किया था कि छात्रों को विरोध करने का अधिकार है, बशर्ते उनका विरोध कानूनी और शांतिपूर्ण हो।
सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने, जिसमें जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल थे, बीसीआई और सभी राज्य बार काउंसिलों को इस विवाद के सिलसिले में नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज़ या दूसरी यूनिवर्सिटीज़ के छात्रों और फैकल्टी के ख़िलाफ कोई भी दंडात्मक या आपराधिक काररवाई करने से रोक दिया था। कोर्ट का यह दखल तब आया, जब बीसीआई ने हैदराबाद के नालसार के 2026 में ग्रेजुएट होने वाले बैच के एनरोलमेंट को लेकर अपना फैसला अचानक बदल दिया।
सीजेआई के अपमान के खिलाफ बीसीआई ने उठाया था कदम
उल्लेखनीय है कि बीते दिनों उक्त यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में CJI की भागीदारी के खिलाफ कथित तौर पर चलाए गए एक संगठित अभियान के बारे में सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रिपोर्टों व जानकारियों का बीसीआई ने संज्ञान लिया और सभी राज्य बार काउंसिलों को निर्देश जारी कर दिया कि वे NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ, हैदराबाद के 2026 बैच के किसी भी लॉ ग्रेजुएट का वकील के तौर पर एनरोलमेंट (पंजीकरण) अगले आदेश तक रोक दें। बार काउंसिल ने इसके साथ ही यूनिवर्सिटी से तीन दिनों के भीतर तथ्यों पर आधारित एक प्रमाणित रिपोर्ट भी मांगी थी।
हालांकि बीसीआई ने कुछ घंटों बाद रोक तो हटा ली, लेकिन इस आरोप की जांच जारी रखी कि कुछ शिक्षकों और बाहरी लोगों ने छात्रों को उकसाया या गुमराह किया था। शुक्रवार को मनन मिश्रा ने घोषणा की कि पूरे 2026 बैच के खिलाफ काररवाई बंद की जा रही है।

