मेलबर्न, 13 अगस्त। ऑस्ट्रेलियाई वैज्ञानिकों ने चिकित्सा विज्ञान में बड़ी सफलता हासिल करते हुए स्टेम सेल की मदद से इंसानी हृदय के वाल्व जैसा ऊतक तैयार किया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह तकनीक भविष्य में खासतौर पर बच्चों में हृदय वाल्व से जुड़ी गंभीर बीमारियों के इलाज का नया रास्ता खोल सकती है। मर्डोक चिल्ड्रन्स रिसर्च इंस्टीट्यूट (MCRI) के नेतृत्व में हुए इस अध्ययन में प्रयोगशाला में तैयार हृदय वाल्व के ऊतक मानव शरीर में मौजूद वाल्व की तरह विकसित होते और प्रतिक्रिया करते दिखाई दिए। यह शोध ‘Cell Stem Cell’ पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।
वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस तकनीक से यह समझने में मदद मिलेगी कि इंसानी हृदय के वाल्व जन्म से वयस्क होने तक किस तरह विकसित होते हैं और बीमारी या संक्रमण के कारण उनमें किस तरह के बदलाव आते हैं। MCRI की हार्ट रीजेनरेशन ग्रुप की टीम लीडर हॉली वोगेस ने कहा कि यह उपलब्धि क्षतिग्रस्त हृदय वाल्व की मरम्मत के लिए ऐसे उपचार विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, जिनमें मरीज के शरीर की अपनी कोशिकाओं का इस्तेमाल किया जा सके।
2.8 करोड़ लोग हृदय वाल्व की बीमारी से प्रभावित
दुनिया भर में करीब 2.8 करोड़ लोग हृदय वाल्व की बीमारी से जूझ रहे हैं। इसके पीछे जन्मजात हृदय संबंधी समस्याएं, संक्रमण और उम्र बढ़ने के साथ वाल्व का कमजोर होना जैसे कई कारण हो सकते हैं। फिलहाल क्षतिग्रस्त हृदय वाल्व को पूरी तरह स्वस्थ करने वाला कोई प्रभावी उपचार उपलब्ध नहीं है। ऐसे में कई मरीजों को वाल्व बदलने की सर्जरी करानी पड़ती है।
रूमेटिक हार्ट डिजीज को समझने में भी मदद
इस शोध की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि वैज्ञानिकों ने तैयार किए गए ऊतक का इस्तेमाल रूमेटिक हार्ट डिजीज (RHD) को समझने के लिए भी किया। शोधकर्ताओं ने जब आरएचडी से जुड़े सूजनकारी प्रोटीन इन ऊतकों के संपर्क में लाए, तो ऊतक कठोर हो गए। इनमें ऐसे जैविक संकेतक भी दिखाई दिए, जो रोगग्रस्त मानव हृदय वाल्व में पाए जाते हैं।
ऑस्ट्रेलिया में रूमेटिक हार्ट डिजीज का प्रभाव वहां की स्वदेशी आबादी पर अपेक्षाकृत अधिक है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह नया प्रयोगशाला मॉडल बीमारी के विकास को समझने और भविष्य में बेहतर उपचार विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
बच्चों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह शोध?
MCRI के प्रोफेसर एंजो पोरेल्लो के अनुसार, भविष्य में इसी तकनीक की मदद से ऐसे हृदय वाल्व विकसित किए जा सकते हैं, जो मरीज के शरीर के साथ बढ़ सकें और उसकी बदलती जरूरतों के अनुरूप खुद को ढाल सकें।
बच्चों के मामले में यह तकनीक विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो सकती है। मौजूदा वाल्व प्रत्यारोपण की बड़ी चुनौती यह है कि बच्चे के शरीर के बढ़ने के साथ प्रत्यारोपित वाल्व को भी बदलने की जरूरत पड़ सकती है। स्टेम सेल से तैयार होने वाले वाल्व भविष्य में इस समस्या का समाधान देने में मदद कर सकते हैं।
हालांकि, इस तकनीक को मरीजों के इलाज में इस्तेमाल करने से पहले आगे के परीक्षण और सुरक्षा संबंधी अध्ययन जरूरी होंगे। अगर आगामी परीक्षण सफल रहते हैं, तो स्टेम सेल आधारित हृदय वाल्व बच्चों और अन्य मरीजों के लिए भविष्य में एक नई उपचार पद्धति का आधार बन सकते हैं।

