श्री माता वैष्णो देवी मंदिर तक पहुंची चढ़ावा चोरी की आंच : 550 करोड़ की चांदी के गबन का आरोप? कोर्ट पहुंचा मामला

जम्मू, 14 जुलाई। मंदिरों में चढ़ावा चोरी व दान गबन की ऐसी आग अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर में लगी कि उसकी आंच देश के विभिन्न मंदिरों से होती हुई अब श्री माता वैष्णो देवी के दरबार तक पहुंच गई है।

20 टन चांदी के चढ़ावे में मिलावट की गया अथवा उसका गबन किया गया

दरअसल, जम्मू की एक अदालत ने जम्मू-कश्मीर पुलिस की क्राइम ब्रांच से उन आरोपों के सिलसिले में पूरा रिकार्ड मांगा है, जिनमें कहा गया है कि श्री माता वैष्णो देवी मंदिर में भक्तों द्वारा चढ़ाए गए लगभग 20 टन चांदी के चढ़ावे (जिसकी कीमत अनुमानित 550 करोड़ रुपये थी) में या तो मिलावट की गई, उसे बदला गया अथवा उसका गबन किया गया।

अदालत ने जांच अधिकारी को 29 जुलाई को केस के रिकॉर्ड के साथ व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया है। यह आदेश उन आरोपों के बीच आया है, जिनमें कहा गया है कि जब श्राइन बोर्ड ने जमा किए गए चढ़ावे को सरकारी टकसाल (मिंट) में भेजा, तो मेटलर्जिकल टेस्ट में पता चला कि खेप का केवल पांच प्रतिशत हिस्सा ही असली चांदी थी जबकि बाकी सामग्री में मुख्य रूप से कैडमियम और लोहा था।

चांदी की कीमत 550 करोड़ से घटकर 30 करोड़ रह गई

रिपोर्ट के अनुसार, अदालत में दायर शिकायत में कहा गया है कि इससे इसकी अनुमानित कीमत लगभग 550 करोड़ रुपये से घटकर लगभग 30 करोड़ रुपये रह गई। यह कार्यवाही जम्मू के वकील दीपक शर्मा द्वारा दायर एक याचिका से शुरू हुई है, जिसमें उन्होंने अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।

जम्मू के वकील दीपक शर्मा ने एक याचिका में लगाए हैं ये आरोप

वकील दीपक शर्मा ने आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, गबन, मिलावट, चांदी के चढ़ावे को बदलने और आधिकारिक रिकार्ड में हेरफेर का आरोप लगाया है। शिकायत में चढ़ावे में जहरीले कैडमियम की मौजूदगी के बारे में भी चिंता जताई गई है।

क्राइम ब्रांच ने CJM के समक्ष पेश होकर एक स्टेटस रिपोर्ट सौंपी

इस बीच क्राइम ब्रांच ने चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (CJN) की अदालत के समक्ष पेश होकर एक स्टेटस रिपोर्ट सौंपी, जिसमें कहा गया कि शिकायत को आवश्यक काररवाई के लिए श्रीनगर स्थित क्राइम हेडक्वार्टर और बाद में जम्मू स्थित जोनल पुलिस हेडक्वार्टर को भेज दिया गया था। हालांकि, शिकायतकर्ता ने तर्क दिया कि केवल शिकायत को आगे भेजने से एफआईआर दर्ज करने की कानूनी बाध्यता पूरी नहीं होती, खासकर तब जब संज्ञेय अपराधों का पता चला हो।

अगली तारीख पर क्राइम ब्रांच को पूरे रिकॉर्ड के साथ उपस्थित रहने का निर्देश

अदालत ने अब क्राइम ब्रांच के जांच अधिकारी को अगली सुनवाई की तारीख पर शिकायत से संबंधित पूरे रिकार्ड के साथ व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। अदालत में दायर आपत्तियों में दीपक शर्मा ने तर्क दिया कि नौ मई और 13 मई, 2026 को क्राइम ब्रांच में शिकायतें दर्ज कराने के बावजूद, कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई और न ही जांच का कोई ठोस कदम उठाया गया।

उन्होंने तर्क दिया कि स्टेटस रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया कि क्या कोई प्रारंभिक जांच शुरू की गई थी, क्या रिकार्ड जब्त किए गए थे, सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखे गए थे, गवाहों से पूछताछ की गई थी या फोरेंसिक जांच की गई थी। शिकायतकर्ता के अनुसार, रिपोर्ट में दिखाई गई एकमात्र काररवाई विभिन्न पुलिस कार्यालयों के बीच शिकायत का आदान-प्रदान थी।

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