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भारत-ऑस्ट्रेलिया रिश्तों को नई रफ्तार, पीएम मोदी बोले- वैश्विक संकट में दोनों देश हैं स्वाभाविक और भरोसेमंद साझेदार

भारत-ऑस्ट्रेलिया रिश्तों को नई रफ्तार, पीएम मोदी बोले- वैश्विक संकट में दोनों देश हैं स्वाभाविक और भरोसेमंद साझेदार

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मेलबर्न, 9 जुलाई। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती देने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज़ ने मेलबर्न में आयोजित भारत-ऑस्ट्रेलिया सीईओ फोरम (India-Australia CEO Forum) और इकोनॉमिक रोडमैप बिजनेस रिसेप्शन में संयुक्त रूप से हिस्सा लिया। इस उच्चस्तरीय कार्यक्रम में दोनों देशों के प्रमुख उद्योगपतियों और मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (CEO) ने भाग लिया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज दुनिया अनिश्चितता, सप्लाई चेन में व्यवधान और ऊर्जा संकट जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे समय में भारत और ऑस्ट्रेलिया का स्वाभाविक, भरोसेमंद और रणनीतिक साझेदार के रूप में साथ आगे बढ़ना न केवल आवश्यक है, बल्कि वैश्विक स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, “आज इस हॉल में भारत और ऑस्ट्रेलिया की बिजनेस शक्ति और बिजनेस महत्वाकांक्षा एक साथ दिखाई दे रही है। वैश्विक चुनौतियों के इस दौर में दोनों देशों का सहयोग नई संभावनाओं के द्वार खोल रहा है।”

ECTA से आर्थिक साझेदारी को मिली नई ताकत

प्रधानमंत्री मोदी ने वर्ष 2022 में हुए आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौते (ECTA) को दोनों देशों के रिश्तों में मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि यह समझौता रिकॉर्ड समय में संपन्न हुआ और इसके लागू होने के बाद भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच आर्थिक संबंध पहले से कहीं अधिक मजबूत हुए हैं। पीएम मोदी ने कहा, “बीते वर्षों में हमने भविष्य की साझेदारी के लिए मजबूत फ्रेमवर्क तैयार किया है। ECTA लागू होने के बाद भारत से ऑस्ट्रेलिया को होने वाला निर्यात दोगुना हो गया है।”

व्यापार और निवेश को मिलेगा नया आयाम

प्रधानमंत्री ने कहा कि ECTA ने दोनों देशों के बीच व्यापारिक बाधाओं को कम किया है और भारतीय कंपनियों के लिए ऑस्ट्रेलियाई बाजार में नए अवसर पैदा किए हैं। इससे निवेश, रोजगार और औद्योगिक सहयोग को भी नई गति मिली है। बैठक का मुख्य उद्देश्य वैश्विक सप्लाई चेन को मजबूत बनाना, ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाना और भविष्य के आर्थिक सहयोग के लिए साझा रोडमैप तैयार करना रहा। दोनों नेताओं की मौजूदगी इस बात का संकेत है कि भारत और ऑस्ट्रेलिया हिंद-प्रशांत क्षेत्र ही नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में भी दीर्घकालिक और विश्वसनीय साझेदार बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

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