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MEA का स्पष्टीकरण : US नेवी के भारतीय बंदरगाहों का इस्तेमाल करने की अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट फर्जी

MEA का स्पष्टीकरण : US नेवी के भारतीय बंदरगाहों का इस्तेमाल करने की अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट फर्जी

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नई दिल्ली, 5 मार्च। मध्य पूर्व में बढ़ते भूराजनीतिक तनाव के बीच विदेश मंत्रालय (MEA) ने उन सनसनीखेज रिपोर्ट को पूरी तरह से नकार दिया, जिनमें आरोप लगाया गया था कि ईरान को टारगेट करने के लिए अमेरिकी नौसेना अपने ऑपरेशन के लिए बेस के तौर पर भारतीय पोर्ट का इस्तेमाल कर रही है।

यह इनकार विदेश मंत्रालय के ऑफिशियल फैक्टचेक (FactCheck) हैंडल से एक साफ सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए आया। इसमें अस्थिर ग्लोबल माहौल में न्यूट्रैलिटी और फैक्ट वाली डिप्लोमेसी के लिए भारत की प्रतिबद्धता को दिखाया गया।

यह विवाद तब शुरू हुआ, जब वन अमेरिका न्यूज (OAN) ने, जो एक कंजर्वेटिव अमेरिकी -बेस्ड टेलीविजन नेटवर्क है और अपनी भड़काऊ कवरेज के लिए जाना जाता है, दावा किया कि भारतीय नेवी की जगहों, खासकर मुंबई और कोच्चि के पश्चिमी बंदरगाहों का इस्तेमाल अमेरिकी जंगी जहाज ईरानी एसेट पर हमले करने के लिए कर रहे हैं।

इस न्यूज चैनल के सेगमेंट को लाखों लोगों ने देखा, जिसमें गुमनाम ‘मिलिट्री सोर्स’ का जिक्र था और अंदाजा लगाया गया कि यह छिपा हुआ सहयोग फारस की खाड़ी में तेहरान के असर के खिलाफ एक बड़े इंडो-अमेरिकी स्ट्रेटेजिक मोड़ का हिस्सा था। यह रिपोर्ट एक्स और टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर तेजी से फैली, जिससे अंदाजे और बढ़ गए और पूरे साउथ एशिया और  मिडिल ईस्ट के नेटिजन्स से इस पर तीखी प्रतिक्रियाएं दी।

विदेश मंत्रालय फैक्टचेक अकाउंट ने सख्ती से जवाब देते हुए कहा, ‘अमेरिकी-बेस्ड चैनल OAN पर किए जा रहे दावे कि अमेरिकी नेवी भारतीय पोर्ट का इस्तेमाल कर रही है, नकली और झूठे हैं। हम आपको ऐसे बेबुनियाद और मनगढ़ंत कमेंट से सावधान करते हैं।’

नई दिल्ली का यह स्पष्टीकरण एक स्थिर करने वाली ताकत के तौर पर उसकी भूमिका को और मजबूत करता है। यह रुख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘मल्टी-अलाइनमेंट’ फॉरेन पॉलिसी से मेल खाता है, जो अमेरिका-इंडिया के मुख्य डिफेंस पार्टनर के साथ रिश्तों को बैलेंस करता है। साथ ही ईरान के, जो एक जरूरी एनर्जी सप्लायर और चाबहार पोर्ट में सहयोगी है, साथ रिश्तों को बेहतर बनाता है।

विदेश मंत्रालय ने जनता से सोर्स वेरिफाई करने और झूठ की रिपोर्ट करने की अपील की और पोस्ट को ‘मुश्किल समय में जिम्मेदार पत्रकारिता की अपील’ के साथ खत्म किया। विदेश मंत्रालय के कड़े जवाब के बाद भारत की एक नॉन-अलाइन्ड पावर ब्रोकर के तौर पर इमेज, तेजी से फैक्ट-चेक घरेलू स्तर पर मीडिया लिटरेसी कैंपेन को बढ़ाने की जरूरत पर भी रोशनी डालता है।

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