UP Monsoon Session: मायावती की नसीहत, जनहित के मुद्दों पर हो चर्चा, हंगामे की भेंट न चढ़े सदन
लखनऊ, 3 अगस्त। उत्तर प्रदेश विधानमंडल का चार दिवसीय मानसून सत्र सोमवार से शुरू हो गया। सत्र की शुरुआत से पहले बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने उम्मीद जताई कि सदन की कार्यवाही जनहित और जनकल्याण के मुद्दों पर केंद्रित रहेगी। उन्होंने कहा कि यह सत्र संकीर्ण दलगत राजनीति, आरोप-प्रत्यारोप और हंगामे की भेंट नहीं चढ़ना चाहिए, बल्कि प्रदेश की ज्वलंत समस्याओं पर गंभीर चर्चा का मंच बनना चाहिए।
मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि 3 अगस्त से शुरू हो रहे उत्तर प्रदेश विधानमंडल के मानसून सत्र में कुल चार कार्य दिवस निर्धारित हैं। उन्होंने बताया कि 4 अगस्त को राज्य सरकार विधानसभा में सरकारी खर्चों से संबंधित अनुपूरक बजट पेश करेगी। उन्होंने कहा कि भले ही यह सत्र अल्पकालीन है, लेकिन जनता की अपेक्षा है कि इसमें प्रदेश और जनहित से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर सार्थक चर्चा हो। उन्होंने आशंका जताई कि कहीं यह सत्र भी संसद के मौजूदा सत्र की तरह दलगत राजनीति, खींचतान, आरोप-प्रत्यारोप और हंगामे की भेंट न चढ़ जाए।
विधायिका की ताकत कम नहीं होनी चाहिए: मायावती
बसपा प्रमुख ने कहा कि अफसरशाही को संविधान के प्रति जवाबदेह और जनहित व जनकल्याण के प्रति उत्तरदायी बनाए रखने के लिए विधायिका का संवैधानिक प्रभाव मजबूत रहना आवश्यक है। उन्होंने सवाल उठाया कि विधानसभा के लगातार घटते सत्र और इतने संक्षिप्त मानसून सत्र से क्या अपने वास्तविक उद्देश्य पूरे हो पाएंगे या यह केवल औपचारिकता बनकर रह जाएगा।
सरकार और विपक्ष दोनों निभाएं जिम्मेदारी
मायावती ने कहा कि संविधान, लोकतंत्र और अफसरशाही पर प्रभावी नियंत्रण के लिए विधायिका का मजबूत होना बेहद जरूरी है। इसके लिए सरकार और विपक्ष, दोनों को गंभीर और जिम्मेदार संसदीय आचरण का परिचय देना चाहिए, ताकि सदन जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतर सके।
