PM Modi Subhashit : ‘भाग्य प्रतिकूल हो तब भी धैर्य न छोड़ें’, पीएम मोदी ने साझा किया प्रेरणादायक संस्कृत श्लोक
नई दिल्ली, 3 अगस्त। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक प्रेरणादायक संस्कृत सुभाषित साझा करते हुए धैर्य और कर्म का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि विपरीत परिस्थितियों में भी मनुष्य को हिम्मत नहीं हारनी चाहिए, क्योंकि धैर्य और निरंतर प्रयास से खोई हुई सफलता दोबारा हासिल की जा सकती है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने पोस्ट में यह श्लोक साझा किया-
“त्याज्यं न धैर्यं विधुरेऽपि दैवे
धैर्यात्कदाचित्स्थितिमाप्नुयात्सः।
याते समुद्रेऽपि च पोतभङ्गे
सांयात्रिको वाञ्छति कर्म एव।।”
इस श्लोक का भावार्थ बताते हुए उन्होंने कहा कि भाग्य प्रतिकूल होने पर भी मनुष्य को धैर्य नहीं छोड़ना चाहिए। धैर्य और कर्म के बल पर वह फिर से अपनी अनुकूल स्थिति प्राप्त कर सकता है। जैसे समुद्र के बीच जहाज टूट जाने पर भी एक कुशल नाविक हार नहीं मानता, बल्कि तैरकर बचने का प्रयास करता रहता है।
पहले भी साझा कर चुके हैं प्रेरक सुभाषित
इससे पहले 29 जुलाई को गुरु पूर्णिमा के अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए गुरु के महत्व पर आधारित संस्कृत श्लोक साझा किया था। उन्होंने लिखा था कि गुरु केवल ज्ञान ही नहीं देते, बल्कि अपने शिष्यों में सकारात्मक ऊर्जा, संस्कार और सही विचारों का भी संचार करते हैं।
उन्होंने यह श्लोक भी साझा किया था-
“प्रेरकः सूचकश्चैव वाचको दर्शकस्तथा।
शिक्षकः बोधकश्चैव षडेते गुरवः स्मृताः॥”
इसका अर्थ बताते हुए उन्होंने कहा था कि प्रेरणा देने वाला, सही दिशा दिखाने वाला, ज्ञान प्रदान करने वाला, मार्गदर्शन करने वाला, शिक्षा देने वाला और सत्य का बोध कराने वाला- ये गुरु के छह स्वरूप माने गए हैं।
प्रकृति संरक्षण का भी दिया था संदेश
28 जुलाई को प्रधानमंत्री मोदी ने प्रकृति संरक्षण और धर्मसम्मत जीवन का संदेश देते हुए एक अन्य संस्कृत श्लोक साझा किया था। उन्होंने कहा था कि प्रकृति का सम्मान और संरक्षण ही मानवता के कल्याण का आधार है तथा भारतीय परंपरा भी इसी जीवन-दृष्टि की प्रेरणा देती है।
