नई दिल्ली, 23 अगस्त। त्रीसा जॉली व गायत्री गोपीचंद पुलेला ने यहां BWF विश्व बैडमिंटन चैम्पियनशिप में कांस्य जीतकर न सिर्फ महिला युगल में पदक का 15 वर्षों से चला आ रहा लंबा इंतजार खत्म किया वरन सुनहरे भविष्य की उम्मीदें भी जगा दीं।
📸 🇮🇳 India's Treesa Jolly and Gayatri Gopichand pose with their bronze medals in women's doubles at the 2026 BWF World Championships
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— ESPN India (@ESPNIndia) August 23, 2026
विश्व रैंकिंग में 39वें क्रम पर काबिज हमउम्र 23 वर्षीय गायत्री व त्रीसा ने इस शानदार उपलब्धि के लिए प्रतियोगिता के दौरान तीन सीडेड जोड़ियों को किनारे लगाया और तीन गेमों तक खिंचे संघर्षपूर्ण सेमीफाइनल में विश्व नंबर एक चीनी जोड़ी – लियू शेंग शू व टैन निंग से परास्त हुईं।
फाइनल मुकाबलों के परिणामों पर एक नजर
उल्लेखनीय है कि ज्वाला गुट्टा व अश्विनी पोनप्पा ने 15 वर्ष पहले लंदन में कांस्य पदक जीता था और वहीं से हर संस्करण में भारत के कम से कम एक पदक जीतने का सिलसिला शुरू हुआ था, जिसे त्रीसा व गायत्री ने कायम रखा और विश्व चैम्पियनशिप में पदक जीतने वाली दूसरी भारतीय महिला युगल जोड़ी बन गईं। यह कहने में झिझक नहीं कि इन युवा शटलरों ने दुनियाभर की मजबूत टीमों के बीच अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराई।
आलोचकों को दिया करारा जवाब जवाब
देख जाए तो गैर वरीय जोड़ी के रूप में उतरीं गायत्री व त्रीसा ने अपने असाधारण प्रदर्शन से आलोचकों को करारा जवाब भी दिया। रविवार को पुरस्कार वितरण समारोह के बाद उन्होंने कहा कि आलोचकों का सबसे अच्छा जबाव उन्हें अपने प्रदर्शन से देना है। त्रीसा ने कहा, ‘हमें लोगों को यह बताने की जरूरत नहीं है कि हम कौन हैं या कया कर सकते हैं। हमारे नतीजे ही हमारे बारे में बता सकते हैं।’
शंकाओं पर काबू पाने के बाद जीती पदक
त्रीसा के लिए यह यात्रा और भी खास थी क्योंकि वह हाल ही में टखने की चोट से लौटी थीं। उन्हें अप्रैल में चोट लगी थी और वह कई महीनों तक बैडमिंटन से दूर रहीं। मुख्य रूप से अन्य भारतीय सितारों पर ध्यान केंद्रित होने के कारण, दुनिया की 39वें नंबर की जोड़ी से ज्यादा उम्मीदें नहीं थीं।
Treesa and Gayatri – BWF World Championships Bronze Medalists 🥹🏅
Proud moment for 🇮🇳 and TreeGa on the home soil.#bwfworldchampionships #newdelhi2026 #smashforIndia #delhishormacha pic.twitter.com/75yYtgCjPa
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जॉली ने कहा कि परिणाम उनके लिए यह प्रदर्शित करने का सबसे अच्छा साधन थे कि वे क्या हासिल कर सकती हैं। वहीं गायत्री ने इस सप्ताह को भावनात्मक और अविस्मरणीय करार देते हुए कहा कि यह जोड़ी कांस्य पदक से बहुत खुश है और इस उपलब्धि को हमेशा याद रखेगी।
दुनिया की सर्वश्रेष्ठ शटलरों से मिली मूल्यवान सीख
सबसे बड़े बात तो यह रही कि विश्व नंबर एक व गत चैम्पियन लियू शेंग शू व टैन निंग सहित दुनिया की सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों का सामना करने से त्रीसा व गायत्री को मूल्यवान सीख मिली। त्रीसा ने कहा कि उनके सबसे बड़े सबक में से एक महत्वपूर्ण क्षणों के दौरान शांत रहने की आवश्यकता थी। इसी क्रम में गायत्री व त्रीसा ने दुनिया की शीर्ष शटलरों से मुकाबला करने का आत्मविश्वास भी हासिल किया।


