मुंबई, 25 अगस्त। कमजोर वैश्विक संकेतों और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच भारतीय शेयर बाजार ने मंगलवार को गिरावट के साथ कारोबार की शुरुआत की। निफ्टी-50 की मासिक एक्सपायरी से पहले निवेशकों की सतर्कता ने भी बाजार पर दबाव बढ़ाया। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में नजर आए। शुरुआती कारोबार में BSE Sensex 223 अंक यानी 0.28 फीसदी गिरकर 77,146 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं, NSE Nifty 90 अंक यानी 0.37 फीसदी की गिरावट के साथ 24,128 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। बाजार में बिकवाली का दबाव खासतौर पर मेटल, ऑयल एंड गैस, आईटी और ऑटो शेयरों में देखने को मिला।
मेटल और ऑयल एंड गैस शेयरों में दबाव
सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो मेटल इंडेक्स करीब 0.48 फीसदी नीचे रहा। इसके बाद ऑयल एंड गैस सेक्टर में 0.40 फीसदी, आईटी में 0.37 फीसदी और ऑटो सेक्टर में करीब 0.32 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। रियल्टी शेयर भी कमजोर नजर आए। हालांकि, बाजार में निचले स्तरों पर खरीदारी के चलते कुछ सेक्टरों ने मजबूती दिखाई। मीडिया, पीएसयू बैंक और केमिकल सेक्टर में करीब 0.6 फीसदी तक की बढ़त देखने को मिली।
Nifty के लिए 24,100 से 24,500 का दायरा अहम
मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारतीय शेयर बाजार की तेजी के लिए चुनौती बनी हुई हैं। फिलहाल Nifty के लिए 24,100 से 24,500 का स्तर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। तकनीकी स्तरों पर 24,200 और 24,144 के सपोर्ट को अहम माना जा रहा है। अगर निफ्टी इन स्तरों को बनाए रखने में विफल रहता है तो इसमें और कमजोरी देखने को मिल सकती है और इंडेक्स 24,060 या 23,575 के स्तर तक फिसल सकता है। वहीं, तेजी की स्थिति में 24,400 का स्तर प्रमुख रेजिस्टेंस माना जा रहा है।
FII-DII की खरीदारी से बाजार को सहारा
बाजार में गिरावट के बावजूद संस्थागत निवेशकों की खरीदारी से घरेलू बाजार को कुछ सहारा मिल रहा है। पिछले कारोबारी सत्र में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने 1,181 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने 2,493 करोड़ रुपये का निवेश किया। यह लगातार 10वां कारोबारी दिन रहा जब DIIs ने बाजार में खरीदारी की। विशेषज्ञों के मुताबिक, घरेलू संस्थागत निवेशकों की लगातार खरीदारी बाजार में बड़ी गिरावट को सीमित करने में अहम भूमिका निभा रही है।
निवेशकों की नजर एक्सपायरी और ग्लोबल संकेतों पर
आज निफ्टी-50 की मासिक एक्सपायरी होने के कारण बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ने की संभावना बनी हुई है। इसके अलावा निवेशक मध्य पूर्व के घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक बाजारों के रुख पर भी नजर रख रहे हैं। फिलहाल बाजार की दिशा तय करने में सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तरों के साथ-साथ विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां भी महत्वपूर्ण रहेंगी।


