शेयर बाजार में लगातार छठे दिन गिरावट, सेंसेक्स 309 अंक टूटकर खुला; क्रूड 91 डॉलर के पार

मुंबई, 18 अगस्त। पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन मंगलवार को घरेलू शेयर बाजार लगातार छठे सत्र में गिरावट के साथ लाल निशान में खुला। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 309 अंक से ज्यादा फिसला, जबकि निफ्टी भी 24,250 के आसपास दबाव में कारोबार करता नजर आया। निवेशकों की नजर इस समय भू-राजनीतिक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड पर है। ब्रेंट क्रूड के 91 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने से भारतीय बाजार में महंगाई और कॉरपोरेट लागत को लेकर चिंता बढ़ी है।

सेंसेक्स 309 अंक गिरकर खुला

बीएसई सेंसेक्स सोमवार के 77,728.16 के स्तर के मुकाबले मंगलवार को 309.19 अंक यानी 0.39 प्रतिशत की गिरावट के साथ 77,418.97 पर खुला। कारोबार आगे बढ़ने के साथ सेंसेक्स ने 77,575.21 का उच्च स्तर और 77,362.19 का निचला स्तर छुआ। खबर लिखे जाने तक सेंसेक्स 263.98 अंक यानी 0.34 प्रतिशत की गिरावट के साथ 77,464.18 के आसपास कारोबार कर रहा था।

निफ्टी भी दबाव में, 24,250 के आसपास कारोबार

एनएसई का निफ्टी 50 भी कमजोरी के साथ खुला। यह पिछले बंद 24,287.65 के मुकाबले 0.26 प्रतिशत की गिरावट के साथ 24,223.85 पर खुला। शुरुआती कारोबार में निफ्टी ने 24,211.10 का निचला स्तर और 24,269.65 का उच्च स्तर बनाया। खबर लिखे जाने तक निफ्टी 42.40 अंक यानी 0.17 प्रतिशत की गिरावट के साथ करीब 24,245.25 पर कारोबार कर रहा था।

मिडकैप में हल्की गिरावट, स्मॉलकैप मजबूत

व्यापक बाजार की बात करें तो निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.08 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। वहीं निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स करीब 0.27 प्रतिशत की बढ़त के साथ कारोबार करता नजर आया। इससे संकेत मिलता है कि बाजार में चुनिंदा शेयरों और सेक्टरों में खरीदारी बनी हुई है।

आईटी शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव

सेक्टोरल इंडेक्स में मंगलवार को निफ्टी आईटी सबसे ज्यादा दबाव में रहा और इसमें 1 प्रतिशत से अधिक की गिरावट देखने को मिली। इसके अलावा निफ्टी मिडस्मॉल आईटी एंड टेलीकॉम में करीब 0.62 प्रतिशत और निफ्टी रियल्टी में लगभग 0.40 प्रतिशत की कमजोरी रही। निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, प्राइवेट बैंक, मीडिया, मेटल और एफएमसीजी शेयरों में भी बिकवाली का दबाव देखने को मिला।

ऑटो और पीएसयू बैंक इंडेक्स में खरीदारी

बाजार की गिरावट के बीच कुछ सेक्टरों में खरीदारी भी देखने को मिली। निफ्टी ऑटो इंडेक्स करीब 0.40 प्रतिशत चढ़ा, जबकि पीएसयू बैंक इंडेक्स में लगभग 0.29 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। इससे संकेत मिलता है कि निवेशक बाजार में पूरी तरह जोखिम से दूर नहीं हुए हैं और चुनिंदा सेक्टरों में अवसर तलाश रहे हैं।

ब्रेंट क्रूड 91 डॉलर के पार, WTI भी चढ़ा

भारतीय शेयर बाजार पर दबाव की प्रमुख वजहों में कच्चे तेल की बढ़ती कीमत भी शामिल है। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बाद ब्रेंट क्रूड पिछले बंद स्तर से करीब 0.60 प्रतिशत बढ़कर 91 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी WTI क्रूड भी 1 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी के साथ 85.37 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता नजर आया।

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ने से भी बाजार पर दबाव

अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड बढ़कर 4.73 प्रतिशत तक पहुंच गई है। ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के कारण विदेशी निवेशकों के लिए उभरते बाजारों की तुलना में अमेरिकी परिसंपत्तियां अधिक आकर्षक हो सकती हैं। इसका असर भारत जैसे बाजारों में विदेशी संस्थागत निवेश के प्रवाह पर पड़ सकता है।

महंगा तेल भारत के लिए क्यों है चिंता की बात?

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के एक बड़े हिस्से के लिए कच्चे तेल के आयात पर निर्भर है। ऐसे में लंबे समय तक तेल की कीमतें ऊंची रहने पर देश के आयात बिल पर दबाव बढ़ सकता है। इसका असर महंगाई, चालू खाते के घाटे और कंपनियों की लागत पर भी पड़ सकता है। विशेष रूप से एयरलाइंस, लॉजिस्टिक्स, पेंट, केमिकल और अन्य ऐसे उद्योगों पर दबाव बढ़ सकता है जिनकी लागत कच्चे तेल या पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों से प्रभावित होती है।

घरेलू निवेशकों से बाजार को मिल सकता है सहारा

हालांकि बाजार में मौजूदा समय में कई वैश्विक जोखिम मौजूद हैं, लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और कंपनियों की कमाई में सुधार के संकेत घरेलू बाजार को सहारा दे सकते हैं। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी डीआईआई के पास पर्याप्त नकदी होने से बड़ी गिरावट की स्थिति में खरीदारी देखने को मिल सकती है। वहीं लंबी अवधि के निवेशक भी बाजार की कमजोरी का इस्तेमाल मजबूत कंपनियों में धीरे-धीरे निवेश बढ़ाने के लिए कर सकते हैं।

आगे बाजार की दिशा किन बातों पर निर्भर करेगी?

फिलहाल भारतीय शेयर बाजार की दिशा मुख्य रूप से पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों से प्रभावित हो सकती है। जब तक पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं होता और अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में स्थिरता नहीं आती, तब तक भारतीय बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने की आशंका है। निवेशकों की नजर अब तेल की कीमतों और वैश्विक घटनाक्रमों के साथ-साथ घरेलू कॉरपोरेट आय पर भी रहेगी।

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