UP Rajya Sabha Election : अखिलेश यादव के ‘403’ वाले पोस्ट से सियासी हलचल, तीसरी सीट पर सपा का दांव खत्म?

लखनऊ, 6 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश में 10 राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव के एक छोटे से सोशल मीडिया पोस्ट ने प्रदेश की सियासत में चर्चाओं को हवा दे दी है। अखिलेश यादव ने मंगलवार को एक्स पर लिखा, “अब हमारी निगाह तीन पर नहीं, चार सौ तीन पर है।” उनके इस बयान को राज्यसभा चुनाव के साथ-साथ आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है।

अखिलेश यादव के इस पोस्ट के बाद सियासी हलकों में चर्चा है कि सपा राज्यसभा की तीसरी सीट के लिए उम्मीदवार नहीं उतारेगी। पार्टी की ओर से पहले ही धनराज लखवानी और प्रो. रामगोपाल यादव को प्रत्याशी बनाया जा चुका है। ऐसे में तीसरे उम्मीदवार को लेकर चल रही अटकलों के बीच अखिलेश के पोस्ट को पार्टी की रणनीति का संकेत माना जा रहा है।

‘403’ पर अखिलेश का फोकस

अखिलेश यादव के पोस्ट में ‘तीन’ की जगह ‘403’ का जिक्र खासा महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उत्तर प्रदेश विधानसभा में कुल 403 सीटें हैं। ऐसे में राजनीतिक विश्लेषक इसे राज्यसभा की तीसरी सीट के बजाय अगले विधानसभा चुनाव पर सपा का फोकस बढ़ाने के संकेत के तौर पर देख रहे हैं। हालांकि, अखिलेश यादव के पोस्ट पर सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष और प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने तंज कसा। उन्होंने एक्स पर लिखा, “मित्र अखिलेश जी, बस हो गया टांय टांय फिस्स! वैसे कभी-कभी ही सही, आप कुछ समझदारी का काम भी कर ही लेते हैं। जैसे आज किया।” 403 सीटों के लक्ष्य पर राजभर ने कहा कि सपने देखना बुरी बात नहीं है।

क्या है राज्यसभा चुनाव का गणित?

उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए एक उम्मीदवार को जीतने के लिए 37 प्रथम वरीयता मतों की जरूरत है। मौजूदा विधानसभा में प्रभावी संख्या करीब 396 मानी जा रही है। सपा के पास अपने विधायकों के साथ कांग्रेस के संभावित समर्थन को जोड़ने पर दो सीटों के लिए जरूरी संख्या मौजूद बताई जा रही है। दो उम्मीदवारों को जिताने के लिए सपा को कुल 74 वोट चाहिए। इसके बाद तीसरे उम्मीदवार को मैदान में उतारने पर पार्टी के सामने संख्या जुटाने की चुनौती पैदा होती। तीन उम्मीदवारों को जिताने के लिए करीब 111 प्रथम वरीयता मतों की जरूरत होगी। ऐसे में तीसरी सीट के लिए सपा को अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की जरूरत पड़ती।

भाजपा के सामने आठवीं सीट की चुनौती

दूसरी ओर, भाजपा के पास अपने 255 विधायक हैं। इसके अलावा अपना दल (सोनेलाल) के 13, राष्ट्रीय लोक दल के 9, सुभासपा के 6 और निषाद पार्टी के 5 विधायक हैं। तीन निर्दलीय और जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) के दो विधायकों के समर्थन को भी भाजपा के पक्ष में माना जा रहा है।

इस गणित के मुताबिक भाजपा खेमे के पास करीब 293 विधायकों का समर्थन माना जा रहा है। वहीं, आठ राज्यसभा सीटें जीतने के लिए करीब 296 मतों की जरूरत होगी। ऐसे में आठवीं सीट के लिए भाजपा को भी कुछ अतिरिक्त समर्थन जुटाने की आवश्यकता पड़ सकती है।

राज्यसभा चुनाव की यह गणित इसलिए भी अहम है क्योंकि एक ओर सपा के सामने तीसरी सीट हासिल करने के लिए जरूरी संख्या जुटाने की चुनौती है, वहीं भाजपा के लिए आठवीं सीट का समीकरण अतिरिक्त समर्थन पर निर्भर कर सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में दोनों खेमों की रणनीति और विधायकों के रुख पर नजर रहेगी।

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