मथुरा, 18 अगस्त। पद्म भूषण से सम्मानित साध्वी ऋतंभरा ने कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के गायन के दौरान सामने आए कथित वीडियो को लेकर सोनिया गांधी की आलोचना की। साध्वी ऋतंभरा ने इसे देश और राष्ट्रगीत का अपमान बताते हुए कहा कि सोनिया गांधी का दिल कभी सच्चे मन से देश के लिए नहीं धड़का। कांग्रेस मुख्यालय में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान सामने आए एक वीडियो को लेकर विवाद खड़ा हुआ था।
वीडियो में कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेता ‘वंदे मातरम’ के गायन के दौरान आपस में बातचीत करते नजर आए। इसी को लेकर साध्वी ऋतंभरा ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि ‘वंदे मातरम’ के दौरान सोनिया गांधी के हाव-भाव से उनकी कथित असहजता और नाराजगी साफ दिखाई दे रही थी। उन्होंने कहा, “सोनिया गांधी ने बहुत बड़ा अपमान किया है। जब ‘वंदे मातरम’ गाया जा रहा था, तो उनके हाव-भाव से साफ पता चल रहा था कि वह कितनी असहज और नाराज थीं। ये वे लोग हैं जो देश की तरक्की बर्दाश्त नहीं कर सकते। उनके दिल कभी भी देश के लिए सच्चे मन से नहीं धड़के।”
साध्वी ऋतंभरा ने कहा कि ‘वंदे मातरम’ सुनते ही देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान की याद आती है। उन्होंने कहा कि इस राष्ट्रगीत से लोगों के भीतर देशभक्ति और मातृभूमि के प्रति प्रेम की भावना जागती है। उन्होंने कहा, “यह वही ‘वंदे मातरम’ है, जिसे देश की आजादी की लड़ाई लड़ने और बलिदान देने वाले स्वतंत्रता सेनानियों ने गाया था। लेकिन हम भी कितने अजीब लोग हैं, जो मानसिक गुलामी में जकड़े हुए हैं और हमारे दिलों-दिमाग पर कब्जा करना चाहते हैं। उन्हें भारत से प्यार भी नहीं है और ‘वंदे मातरम’ से इतनी तकलीफ होती है।”
जंतर-मंतर प्रदर्शन पर भी साध्वी ऋतंभरा ने साधा निशाना
साध्वी ऋतंभरा ने जंतर-मंतर पर हुए सीजेपी के विरोध-प्रदर्शन को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर बांटे गए खाने और प्रदर्शन में शामिल महिलाओं के पहनावे पर भी उन्होंने सवाल उठाए। हालांकि, उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अपनी मांगों और मुद्दों को लेकर विरोध करना लोगों का अधिकार है। उन्होंने कहा कि जब सत्ता में बैठे लोग जनता की बात नहीं सुनते, तो लोगों को अपनी आवाज उठानी पड़ती है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर देश एक विशाल बरगद के पेड़ की तरह है और उसमें दीमक लग गई है, तो समाधान पूरे पेड़ को काटना नहीं बल्कि दीमक का इलाज करना होना चाहिए।साध्वी ऋतंभरा ने कहा कि देश में किसी भी स्थिति में अराजकता को स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने उन लोगों पर भी निशाना साधा जो यह कहते हैं कि अब देश के फैसले सड़कों पर लिए जाएंगे।

